मिर्च से अधिक उपज चाहते है, तो, इन बातों का रखें ध्यान
देश में खाने के लिए लोग हरी और लाल मिर्च दोनों का ही प्रयोग करते हैं. यह एक ऐसी खेती होती है जो सालोभर किया जा सकता है. इसका मतलब साल में कभी भी आप इसे लगा सकते हैं और फसल हासिल कर सकते हैं.
पर ऐसा कहा जाता है कि अगर किसान मॉनसून के सीजन में मिर्च की खेती करते हैं तो उन्हें अच्छी गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है, साथ ही उत्पादन भी अधिक होता है.
हालांकि जिन क्षेत्रों में बारिश कम होती है उन क्षेत्रों में भी मिर्च की पैदावार अच्छी होती है. हालांकि अधिक, गर्मी, सर्दी या बारिश से फसल को नुकसान हो सकता है. मिर्च की खेती की खासियत यह होती है कि इसे किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है. ऐसे में खेत या गमला कहीं भी इसके पौधे लगा सकते हैं.
हालांकि मर्च के बेहतर उपज के लिए अधिक कार्बन कंटेट वाली दोमट मिट्टी और बलुई मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है. पौधों के उचित विकास के लिए पर्याप्त रोशनी की जरूरत पड़ती है.
इसके बीच लगाने के लिए दो दिन पहले पानी में भीगोकर रख देना चाहिए फिर बीजों को एक लाइन से लगाना चाहिए. इसके बाद इसे सूखे पत्ते या पुअल से ढंक देना चाहिए. इसके साथ ही दीमक की दवा का छिड़काव चारो तरफ करना चाहिए.
मिर्च का पौधा बहुत ही संवेदनशील होता है इसलिए थोड़ी सी लापरवाही फसल को खराब कर सकती है. यही वजह है कि मिर्च की खेती करने के बाद उसका पूरा ख्यान रखना चाहिए. खास कर खेत में जलजमाव नहीं होने देना चाहिए.
अगर गमला में पौधे लगाए हैं तो अधिक मात्रा में पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. क्योंकी पानी अधिक होने से पौधे गलने लगते हैं. अधिक गुणवत्ता वाले मिर्च हासिल करने के लिए उन्नत किस्म के बीज का उपयोग करें और जैविक विधि से गोबर का इस्तेमाल करके खेती करें.