पूसा वैज्ञानिकों ने उन्नत किस्मो का किया प्रदर्शन  >

सेंटर फॉर प्रोटेक्शन कल्टीवेशन टेक्नोलॉजी (सीपीसीटी) ने जेडटीएम और बीपीडी यूनिट, आईसीएआर-आईएआरआई के साथ मिलकर सीपीसीटी और सब्जी विज्ञान प्रभाग में एक 'फील्ड डे' का आयोजन किया.  

जिसका उद्देश्य किसानों और बीज कंपनियों को टमाटर की नई किस्मों की जानकारी उपलब्ध करवाना था. इस दौरान किसानों और बीज कंपनियों के लिए संरक्षित और खुले खेत में टमाटर की उन्नत किस्मों की जीवंत प्रदर्शनी आयोजित की गई.

किसानों और छात्रों के अलावा, बायर, एडवांटा, नुजिवीडु सहित 20 से अधिक बीज कंपनियों ने भी इस जिवंत प्रदर्शनी में भाग लिया 

ए.के. सिंह ने टमाटर की किस्मों की मुख्य विशेषता पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे आईएआरआई की आनुवंशिक सामग्री विभिन्न तरीकों से किसानों तक पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हम उद्योग जगत को अपनी लागत प्रभावी तकनीकें देने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे इसे आगे किसानों को प्रदान कर सकें. 

इस 'फील्ड डे'का उद्देश्य बताते हुए डॉ. पी.के. सिंह ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हमारे वैज्ञानिकों द्वारा किया गया शोध उद्योग और फिर किसानों तक पहुंचे, जिससे अंततः उन्हें अपनी आय बढ़ाने में मदद मिले. उन्होंने कहा कि टमाटर की ये सभी किस्में रोग प्रतिरोधी हैं और किसान इन्हें बरसात के मौसम में भी बो सकते हैं 

उन्होंने आगे कहा कि टमाटर की ये संकर किस्में प्रति हेक्टेयर 80 से 100 टन तक उत्पादन कर सकती हैं, जो वास्तव में बहुत बड़ी है. वहां मौजूद डॉ. जाकिर हुसैन ने एक प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को टमाटर की सभी किस्मों के बारे में विस्तार से बताया. 

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