हलधर किसान भोपाल l वन क्षेत्रों से लगे गांवों में आए दिन हिंसक जंगली जानवरों की मौजूदगी किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। अक्सर वन विभाग की टीमें कई-कई दिन तक पीछा करने के बाद भी जानवरों को ढूंढ नहीं पातीं। लेकिन अब यह समस्या अत्याधुनिक तकनीक से काफी हद तक खत्म हो सकती है। बच्चों की नवाचारी सोच और एआई (Artificial Intelligence) का संगम जंगली जानवरों की ट्रैकिंग और पकड़ने के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
राजधानी भोपाल में आयोजित 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने ऐसे कई मॉडल प्रस्तुत किए, जो आने वाले समय में देश की बड़ी चुनौतियों का समाधान बन सकते हैं। खासकर जंगलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर बच्चों ने नए आयाम प्रस्तावित किए।
एआई मशीन खुद पकड़ेगी जंगली जानवर
वन विभाग की मुश्किलों को आसान बनाने वाले इन मॉडलों में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र वह एआई आधारित मशीन रही, जो जंगली जानवरों को खुद ट्रैक कर पकड़ने की क्षमता रखती है। यह मशीन सेंसर और स्मार्ट एल्गोरिथ्म की मदद से आसपास की गतिविधियों को रिकॉर्ड करती है।
जैसे ही इलाके में जंगली जानवर की मौजूदगी का पता चलता है, यह मशीन स्वतः सक्रिय होकर उसका पीछा करते हुए सुरक्षित तरीके से पकड़ लेती है। ग्रामीणों के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है, जिससे न सिर्फ जान-माल की सुरक्षा होगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
सीमा पर दुश्मन की पहचान करेगी एआई आधारित डिफेंस प्रणाली
देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित एआई आधारित डिफेंस सिस्टम भी चर्चा में रहा। यह तकनीक कपड़ों और गतिविधियों के आधार पर दुश्मन की पहचान कर सकती है।
यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति सीमा के करीब आता है, तो यह प्रणाली स्वचालित रूप से अलर्ट जारी करते हुए आवश्यक कार्रवाई तक कर सकती है। भविष्य में इस तरह की तकनीक सेना और अर्द्धसैनिक बलों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
मुख्यमंत्री का अनोखे रोबोट ने किया स्वागत
प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे। जैसे ही वे प्रवेश द्वार की ओर बढ़े, बच्चों द्वारा तैयार एक रोबोट ने उनका अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के उत्साह और नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की समझ और उपयोग से ही देश आगे बढ़ सकता है।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल और लोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता भी उपस्थित रहे।
देशभर के बच्चों ने पेश किए आधुनिक विज्ञान समाधान
NCERT और मप्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त आयोजन में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से छात्र शामिल हुए। बच्चों ने जल संरक्षण, ऊर्जा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण जैसे विषयों पर अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए।
बस कंडक्टर के लिए सुरक्षा जैकेट—भोपाल के बच्चों की अनोखी सोच
भोपाल की शासकीय उमावि चूनाभट्टी के विद्यार्थी मयंक कुशवाहा और उनकी टीम ने बस कंडक्टरों के लिए एक अनोखी सेफ्टी जैकेट तैयार की, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
कंडक्टर को अक्सर चलती बस में टिकट काटते समय अचानक ब्रेक लगने पर आगे गिरने की समस्या होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बच्चों ने जैकेट में मजबूत सेफ्टी हुक लगाया है, जिससे कंडक्टर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
जैकेट में शामिल अन्य विशेषताएं–
- ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड,
- अंधेरे में दिखने वाली रेडियम पट्टी,
- सिग्नल देने के लिए सीटी,
- सुरक्षित जेबें, जिनमें जरूरी सामान रखा जा सके।
यह मॉडल न केवल सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में तकनीकी उपयोग को भी प्रोत्साहित करता है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में उभरती प्रतिभाओं ने यह साबित कर दिया कि देश का भविष्य तकनीक और नवाचार के दम पर और अधिक सुरक्षित, सशक्त और प्रगतिशील होगा।
जंगली जानवरों की समस्याओं से लेकर सीमा सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन तक—बच्चों के ये मॉडल वास्तव में जन-हित में एक बड़ा कदम हैं।
