हलधर किसान, इंदौर। रबी सीजन की शुरुआत के पहले ही शासन की खाद नीति पर सवाल खड़े होने लगे है। मार्कफेड के सहकारी समितियों और व्यापारियों को 80 और 20 प्रतिशत रेशों अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था का लंबे समय से विरोध हो रहा है। कृषि आदान विक्रेता संघ इंदौर जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण दुबे ने शासन की नीति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मप्र एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां देख के अन्य राज्यों के मुकाबले खाद वितरण प्रणाली अलग है। यहां अनुपात में खाद उपलब्ध कराने के बाद भी व्यापारी इस व्यवस्था में भी सहयोग करते हुए खाद खरीदकर किसानों को उपलब्ध करा रहे है। इसके बावजूद व्यापारी खुद को उस वक्त ठगा महसूस करता है, जब 80 प्रतिशत माल सोसायटी को देने के बाद भी महज 20 प्रतिशत माल बेचने वाले व्यापारी के यहां से सैंपलिंग की जाती है, लेकिन सोसायटी में यदि अमानक खाद की शिकायत भी मिलती है तो कार्रवाई के नाम पर महज जांच दल गठित किए जाते है। यह भेदभाव कहीं न कहीं व्यापारी का मनोबल गिराकर कृषि व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाली नीति है।
अब तक व्यापारी जहां ऑफ सीजन में खाद खरीदकर किसानों को उपलब्ध करा रहे थे तो इस व्यवस्था में सीजन से पहले बड़ा बदलाव करते हुए कैश में खाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है जो व्यापारियों के लिए संभव नही है। श्री दुबे ने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार खाद नीति स्पष्ट नही करती है तब तक कैश व्यापार करना जोखिम भरा है।
यह नीति समझ से परे
. मध्यप्रदेश में किसानों को खाद उर्वरक नीति के कारण उपलब्धता में परेशानी आ रही हैं। उर्वरक वितरण व्यवस्था में इस दोहरे रवैये के चलते किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रहा है। दूसरा मजेदार पहलू कम्पनियां और कृषि विभाग भी निजी विक्रेताओ को कष्ट देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
.कम्पनियां निजी विक्रेताओ को खाद के साथ टैगिंग कर रही हैं, तो कृषि विभाग सैंपलिंग के टारगेट लेकर निजी व्यापारियों के यहां से अधिक से अधिक सैम्पल ले रहे हैं। 80 प्रतिशत माल मार्कफेड . सहकारी समितियों को दे रहे है और सैंपल जिस निजी विक्रेता को 20 प्रतिशत भी माल नहीं मिल पाता है उसके यहां से अधिक लिए जा रहे है।
.जब माल अधिक जिसे दिया है तो उसी अनुपात में सैंपलिंग भी वहां से ही होनी चाहिए। इस सब समस्याओं के चलते निजी विक्रेताओ का पतन हो रहा है, कई निजी व्यापारियों ने खाद बेचना ही बन्द कर दिया है।
सोसायटी से सैंपल क्यों नही?
खाद व्यापारियों के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार शुरू से ही प्रदेश के साथ में सौतेला व्यवहार कर रही है , सोचने वाली बात है कि जब खाद की मात्रा का 80 प्रतिशत माल मार्कफेड की सोसाइटियों को जाता है, तो वहां से विभाग के द्वारा सैंपल क्यों नहीं लिये जाते ? आज तक किसी समाचार पत्र में या कोई न्यूज चैनल में सोसायटी में खाद सैंपल जांच की कोई सूचना न ही देखी न पढ़ी। केंद्र सरकार को इस मामले में ध्यान देना चाहिए।
व्यापारी की परिस्थिति को समझें केंद्र और प्रदेश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान नकली बीज, नकली खाद, नकली दवाइयों की बात कर रहे हैं, उन्होंने कभी इस पर फोकस किया कि यह प्राइवेट सेक्टर के कृषि आदान व्यापारी कैसे व्यापार कर रहे हैं ? किन परिस्थितियों में व्यापार कर रहे हैं। वे केवल अपना ही राग अलापने मैं लगे हुए हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन समस्त देश- प्रदेश के कृषि आदान व्यापारी अपना कारोबार बंद करने को मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति में सोचा जाए कि जो सरकार समय पर खाद उपलब्ध नही करा पा रही, वह बीज, रसायन आदि कैसे उपलब्ध कराएगी। इसलिए निजी सेक्टर के प्रति भी सरकार को सहानुभूति रखते हुए व्यापारियों के हित, अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए।

श्रीकृष्ण दुबे
जिलाध्यक्ष- कृषि आदान विक्रेता संघ इंदौर
