हलधर किसान, श्रीकृष्ण दुबे इंदौर। बीज कृषक की जान है, इस पर फसल की उत्पादकता निर्भर करती है इसलिये बीज को गुणवत्तायुक्त रखने के लिये पवित्र पुनीत एवं पावन बनाने से पूर्व बीज का श्रोत एवं अन्य दस्तावेज पुष्ठि करने के बाद खड़ी फसल का निरीक्षण कर अनुवांशिक शुद्धता की जांच कर रा-सीड को मशीनों से गुजार कर कचरा, हल्के बीज, कटे दाने, बारीक मिट्टिकण दूर कर दाने को बीज का रूप दिया जाता है। प्रमाणीकरण ऐसी विधा है जिसका पालन कर दाने को बीज का रूप दिया जाता है। उपरोक्त प्रक्रिया करने के बाद आजकल बीज उत्पादक बीज के रंग में एक रूपता लाने के लिये SORTEX मशीन से गुजारते हैं उसके बाद बीज का उपचार किया जाता है।
1.पालीमर बनाम ब्यूटी पारलर :- उपचार के नाम पर कवकनाशी, कीटनाशी रसायनों को लगाने के लिए पालीमर का उपयोग किया जाता है दलील यह है कि यह कीट एवं कवकनाशी उपचार सामग्री को बीज सतह पर Coating (लेपन) करता है जिससे कीट एवं कवकनाशी का शत प्रतिशत उपयोग ले सकें।
2. वास्तविकता यह है कि रसायन के लेपन का बहाना है बल्कि पालीमर केउपयोग का मुख्य उद्देश्य बीज को विभिन्न रंगों में रंग कर बाहरी आकृति को आकर्षक बनाना है यानि बीज को ब्यूटी पारलर लेकर जाना है।
आकर्षक बनाना :-
एक चलन निकल चुका है कि बीज को पालीमर लगा कर आकर्षक बनाया जाए। ऐसे कार्यों की शुरूआत पहले बड़ी कम्पनियाँ करती है और उनको देखकर सभी कम्पनियाँ पालीमर का उपयोग करने लगती हैं। यह बीज के बाह्य आकार को आकर्षित कर प्रस्तुत करना है। जैसे एक स्त्री अपने आप को अधिक सुन्दर दिखने के लिये सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग करती है उसी प्रकार बीज को पोलीमर से उपचारित किया जाता है। दलील दी जाती है कि पालीमर से अंकुरण बढता है बाह्य वातावरण के घर्षण को सह लेता है आदि सब अर्थहीन है और पालीमर से लेपन बन्द होना चाहिए।
3. वास्तविकता को छुपाना :- पोलीमर लेपन से बीज की वास्तविकता छुप जाती है। किस्म की पहचान में बीज का रंग और Texture मुख्य कारक होते हैं और पालीमर लेपन से ये दोनों गुण छुप जाते हैं, किस्म की पहचान लुप्त हो जाती है और कानून की दृष्टि से पालीमर से लेपन बन्द होना चाहिए। पोलीमर लिपित कपास बीज में खड़ी फसल में कीट ग्रसित बीज का दोष छिप जाता है। इसी प्रकार मूंग में पीला मूंग वायरस का पीलापन, पानी से प्रभावित बीज की चमक बदरंग गेहूँ का करनाल बन्ट धान का बन्ट सरसों में पीले लाल दाने, ग्वार में काले दाने, कच्चे दाने आदि ऐब छुप जाते हैं। अतः पालीमर का उपयोग नहीं होना चाहिए।
4. बीज कानूनों में समावेश नहीं :- बीज व्यापारियों ने स्वयं ही गलाकाट प्रतियोगिता के चलते अपने आप का अति आधुनिक दिखने की ऑड में पालीमर लेपन की पद्धति अपना ली जबकि बीज कानून निर्मात्री संस्था केन्द्रीय बीज कमेटी ने अभी तक पोलीमर लेपन की कोई अनुसंशा नहीं की है। कृषि विभाग का अभी तक इस बारे ध्यान ही नहीं गया है कि यह कितना घातक है।
5. कीट रोधी रसायन से उपचार :- पोलीमर लेपन के पक्षधर अवश्य आपत्ति उठायेंगे कि कार्बडाजिम, रैक्सिल, कारवोक्सिन आदि फंफूदीनाशक रसायनों से उपचारित करवाने से भी बीज का रंग एवं टैक्सचर छुप जायेंगे। अवश्य छुपेंगे और बीज को उनसे भी उपचारित नहीं करना चाहिए बल्कि रसायन का एक पैकेट बीज पात्र में रखना चाहिए और ऐसी सूचना साथ दें कि किसान रखे गये रसायन से बीज बोने से पूर्व बीज उपचारित कर ले।
6. शेष उपचारित बीज का निस्तारण विधि सम्मत नहीं :- शेष उपचारित बीज के अनेकों रंग बिरंगे ढेर मण्डियों में विक्रय के लिए लगे रहते हैं ये सभी पालीमर उपचारित बीज था जो सीजन में नहीं बिक सका। पालीमर भी एक रसायन द्वारा निर्मित उपचार है। इसी प्रकार राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं भी आधार बीज या कभी-2 प्रमाणित बीज अगले वर्ष बीजोत्पादन के लिए तथा कभी-2 प्रमाणित बीज व्यापारिक उपयोग के लिये प्रमाणित बीज उत्पादक (CSP) की मर्जी पर उपचारित करती है परन्तु इनका शेष बीज मण्डियों, पशुचारे, या मनुष्यों के आटे के उपयोग के लिये बेचा जाता है। यह शेष बीज (Remainent Seed) भारत सरकार के पत्र 17-11/87-S.D.-IV दिनांक 03.03.1988 के अनुसार राज्य कृषि अधिकारियों की उपस्थिति में गैर पशुराशन एवं गैर भोजन उपयोग के लिये करते हैं। अभी तक सरकारी निजी संस्थाएं, राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थायें, राज्य मार्केट कमेटी, बीज निरीक्षक, राज्य बीज निगमें आपत्ति नहीं उठा रही बल्कि खरीदार से 10/- रुपये के Non-Judicial Stamp Paper पर हल्फनामा लेकर कि मैं अपनी मर्जी और जोखिम पर उपचारित बीज खरीद रहा हूँ, यह बीज बेचती है। उपचारित बीज के लिये स्टाम्प पेपर पर लिख कर लेने पर विक्रय कर अपने दायित्व की इतिश्री कर देते हैं। परन्तु जिस दिन कोई दुर्घटना होगी उस दिन बीज कानून के रखवालों को कोई नहीं पूछेगा बल्कि इन बीज उत्पादकों / विक्रेताओं पर ही कानून का पालन न करने की गाज गिरेगी। किसान को पालीमर के अवगुणों का पता नहीं है तो बीज व्यापारियों का कर्त्तव्य बनता है कि किसानों की कम समझ का फायदा न उठाए।
(लेखक)

आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन”, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)
श्री दुबे की प्रतिक्रिया
*हमारे* *देश* *के* *बीज* *उत्पादन क्षेत्र में प्रोसेसिंग प्लांट में और बीजों को पैकिंग करके मार्केट में देने तक की यात्रा में कुछ कार्य ऐसे हो रहे हैं जो नहीं* *होना चाहिए हमारे आदरणीय मार्गदर्शक आरबीसीह साहब ने बीज पर पॉलीमर का कोटिंग करने का विरोध किया है क्योंकि बीजों पर यह कोटिंग अलग-अलग रंगों में इसलिए किया जा रहा है कि उस बीजों की सुंदरता बढ़ जाती है और बीजों में समानता दिखने लगती है इसके साथ-साथ बीजों में चमक भी बढ़ जाती है लेकिन यह कार्य सिर्फ बीजों को अच्छा सुंदर दिखाने के लिए किया जा रहा है जबकि ऐसा करने से बीजों का जो प्राकृतिक रंग है उसकी वैरायटी के* *गुण है या जैसा वह दिखना चाहिए वैसा नहीं दिखता है उसको छुपा दिया जाता है बारिश के पानी से बद रंग हुए और दागी बीजों को छुपाने के लिए बीज उत्पादन क्षेत्र में यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है जो की उचित नहीं है इससे बीजों के जो वास्तविक उसको देखकर पहचान करने वाले जो गुण हैं जो प्रक्रिया है वह छुप जाती है और ऐसा करने से सिर्फ और सिर्फ बीज उत्पादक कंपनियों को फायदा होता है साथियों आप सभी को ज्ञात होगा कि अभी पिछले दिनों राजस्थान के कृषि मंत्री माननीय श्री किरोड़ी लाल जी मीणा जी ने कुछ बीज उत्पादक कंपनियों के यहां पर छापामार कार्यवाही की थी और वहां उन्होंने यह प्रक्रिया देखी थी कि बीजों को रंग लगाया जा रहा है या कलर किया जा रहा है यह वही प्रक्रिया है जिसको पॉलीमर बोलते हैं और उन्होंने अपने बयान में कहा था कि यहां पर बीजों को कलर करके रंग के और पैकिंग किया जा रहा है यह वही पॉलीमर प्रक्रिया है जिसको हम शुद्ध हिंदी में कहेंगे कि बीजों को पार्लर वाली स्थिति में लाया जाता है उनको सुंदर बनाया जाता है जो जानकार लोग है बीज उत्पादन क्षेत्र में इतने सालों से लगे हैं यदि वह वास्तविक कुदरत जो कलर बीज लेकर आया हुआ है वह अपने हाथों में लेकर हथेली पर फैला कर देखें और पॉलीमर या कलर* *किए हुए बीजों को हथेली पर रखकर देखें तो आपको वास्तविकता का पता चलेगा अभी हमारे यहां यह पॉलीमर रंग वाली प्रक्रिया मेथी दाना के बीजों पर की जा रही है क्योंकि जो ओरिजिनल अच्छी क्वालिटी के मेथी दाने के बीज हैं वह पीले कलर में केसरिया कलर में आते हैं और यदि बारिश से उन बीजों को कोई नुकसान हुआ है तो कुछ दाने काले रंग के हो जाते हैं उन काले रंग के मेथी दाने के बीजों को छुपाने के लिए यह पॉलीमर कलर का उपयोग धड़ले से किया जा रहा है आप स्वयं देखें और पहचाने हम देश के कृषि मंत्रालय से यह बात कहते हैं कि बीजों को उपचारित कीजिए उनको ट्रीटेड कीजिए लेकिन उनके वास्तविक रंगों को या उनके अंदर जो पानी लगने से या बद रंग होने से या जो बीज अपरिपक्व है उनको एक समान दिखे ऐसा करने से जो पॉलीमर किया रंग की कलर की जो प्रक्रिया चल रही है इसको बंद करना चाहिए इस मामले में सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए देश के समस्त किसान भाइयों के हित में जारी l

श्री कृष्णा दुबे अध्यक्ष
जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिला इंदौर*
यह भी पढेंः- बीज कानून पाठशाला – 30 “बीज की एम०आर०पी०”
