तेजी से घटते कार्बन के चलते 60 प्रतिशत कॄषि भूमि हो रही बंजर:रघुवंशी

60 percent of agricultural land is becoming barren due to rapidly decreasing carbon

भूमिपूजन से हुई सुपोषण एवं संरक्षण हेतु कार्यशाला 

खरगोन। भारत में कृषि भूमि के घटते कार्बन स्तर और बंजर होती जा रही धरती को बचाने के लिये  शहर के सनावद रोड स्थित रिसोर्ट में भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु  कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुरुआत क्षैत्र के किसानो के साथ भूमि माता का पूजन कर की गई।

 अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक नवल रघुवंशी ने  कहा कि आज भूमि माता की स्थिति अत्यन्त चिंतनिय है। भूमि में जैविक कार्बन की लगातार घटती मात्रा के कारण देश में कृषि योग्य भूमि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा बंजर बनने की ओर अग्रसर है। इससे भावी पीढियो के भोजन एवं भविष्य संकट मे है। अतः भूमि सुपोषण एवं संरक्षण के अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग का जागरण एवं प्रबोदन ही इस समस्या का एक मात्र समाधान है।

उन्होंने आव्हान किया कि वह 30 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 30 अप्रैल अक्षय तृतिया तक संचालित होने वाले अभियान अन्तर्गत अपनी अपनी संस्थाओं में क्षैत्र के किसानों को आमंत्रित कर न्यूनतम पांच-पांच भूमि माता पूजन एवं प्रबोदन कार्यक्रम आयोजित कर इस पवित्र अभियान में अपना अमुल्य योगदान देवे ताकि भूमि पूजन कार्यक्रमों के माध्यम से भूमि सुपोषण एवं संरक्षण कार्य को बढ़ावा मिले एवं किसान भूमि के प्रति जाग्रत होकर रसायन मुक्त खेती की ओर अग्रसर हो सकें। 

           जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक प्रबंध संचालक पीएस धनवाल ने किसानों से अपील की कि वह अणुवृत सिद्धांत अनुसार रासायनिक खाद के उपयोग को धीरे-धीरे कम कर जैविक खेती की ओर अग्रसर हो। शुरूवात में अपने परिवार के उपयोग हेतु आवष्यक अनाज, फल एवं सब्जियों का उत्पादन करें। तत्पष्चात जैविक खेती की ओर बढे़ तथा उत्पादित अनाज, फल एवं सब्जियों का वैल्यू एडिषन कर खेती को लाभ का धंधा बनाये तथा आय में वृद्धि करें।

जिला विपणन अधिकारी रोहित श्रीवास्तव के द्वारा भी कार्यषाला को संबोधित किया गया तथा उनके द्वारा कहा गया कि वर्तमान में रासायनिक खाद के अंधाधुंध उपयोग करने के कारण आज कैंसर जैसी घातक बिमारियां पैर पसार रही है। अधिक उत्पादन कर किसान आर्थिक लाभ तो अर्जित कर रहा है किन्तु उसकी कीमत के रूप में कैंसर जैसी घातक बिमारियों को भी आमंत्रण दे रहा है इसलिए हमे जागरूक होकर शनै-षनै जैविक खेती की ओर रूख करना चाहिए। 

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