हर खेत-स्वस्थ खेत अभियान: हरियाणा में जांच के लिए 29 लाख मिट्टी नमूनों का दावा

हलधर किसान। हर खेत-स्वस्थ खेत अभियान के तहत हरियाणा में मृदा स्वास्थ्य की जांच तेज कर दी गई है. राज्य सरकार ने दावा किया है कि 31 अगस्त 2022 तक 28,95,399 मृदा के सैंपल एकत्रित किए जा चुके हैं, जिनके विश्लेषण का कार्य तेज गति से किया जा रहा है. अभियान के तहत आगामी वर्षों में राज्य के प्रत्येक एकड़ के मृदा के सैंपल एकत्रित करके सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे. राज्य सरकार ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभादायक बल्कि किसानों के लिए भी अच्छी आमदनी का सौदा है. मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को जांचने के लिए हरियाणा में तेजी से काम हो रहा है.
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के नाते हरियाणा का देश के खाद्यान भंडार में उल्लेखनीय योगदान है. आज के समय की जरूरत के मद्देनजर कृषि क्षेत्र में भी बदलाव की आवश्यकता है. स्वस्थ जीवन और समृद्ध किसान की अवधारणा के अनुरूप हरियाणा आज प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है. प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभादायक है बल्कि किसानों के लिए भी अच्छी आमदनी का सौदा साबित हो रही है.

प्राकृतिक खेती के प्रति बढ़ी दिलचस्पी
प्रदेश सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ्य की उपजाऊ शक्ति को बचाने और खतरनाक कीटनाशकों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए किसानो को प्राकृतिक खेती की और बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं. इसके लिए सरकार ने एक समर्पित प्राकृतिक खेती पोर्टल भी शुरू किया है और अब तक 2994 किसानों ने पंजीकरण कर प्राकृतिक खेती में अपनी रुचि दिखाई है.

प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान दे रही सरकार
किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 4 ड्रम खरीदने पर 3 हजार रुपये और देसी गाय की खरीद के लिए 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान कर रही है. साथ ही, सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती उत्पाद की ब्रांडिग व पैकेजिंग पर प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया गया है.इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक खेती पर गुरूकुल, कुरूक्षेत्र में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जिसमें प्राकृतिक खेती के मॉडल पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विशेष तौर पर शिरकत की थी. प्राकृतिक खेती के मॉडल को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध करने और इसके विस्तार को लेकर इस कार्यशाला में चर्चा की गई थी.

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