कृषि आदान विक्रेताओं जिला स्तरीय सम्मेलन में निकला निष्कर्ष
हलधर किसान. बैतूल। जिला खाद बीज दवा विक्रेता संघ का वार्षिक सम्मेलन सारले क्रिएशन में आयोजित किया गया। सम्मेलन में बतौर अतिथी जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पंवार, विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे, उपसंचालक कृषि बैतूल, रजक साहब, एवं प्रादेशिक संगठन अध्यक्ष मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी, संभागीय उपाध्यक्ष प्रदीप खंडेलवाल शामिल हुए।
विधायक डॉ. श्री पंडाग्रे ने सम्मेलन में कीटनाशक बीज एवं उर्वरकों के सेंपल फेल होने पर दुकानदारों पर कार्रवाई कि शिकायत पर आश्वस्त किया कि वे मुख्यमंत्री तक यह शिकायत पहुंचाकर इसके निराकरण का प्रयास करेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष राजा भैया ने व्यापारियों से ईमानदारी से व्यापार करने का आव्हान किया एवं ऑनलाइन व्यापार को कृषि व्यवसाय में न करने की सलाह दी, उन्होंने चेताया की इसमें किसानों एवं देश का बड़ा नुकसान होगा।
उप संचालक कृषि आर रजक ने व्यापारियों का आश्वासन दिया कि अभी आप सही व्यापार करते हैं तो आपको कृषि विभाग एवं उसके अधिकारियों से डरने की आवश्यकता नहीं है। आप और हम दोनों ही देश के किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं, फर्क सिर्फ यह है कि हम सरकार की नौकरी कर रहे हैं एवं आप अपना स्वयं का व्यापार कर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। प्रादेशिक अध्यक्ष मानसिंह राजपूत ने संगठन की एकता और सभी को संगठित होकर सजगता से व्यापार करने की सलाह दी। बैतूल संघ अध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया सम्मेलन में उर्वरक व्यवसाय पर चर्चा कर व्यापारियों की मुख्य समस्याओं पर विचार. विमर्श कर संगठन के माध्यम से निराकरण की रणनीति भी बनाई।
व्यापार हित के लिए संगठन में एकता जरुरी
प्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी ने पिछले 7 सालों की आल इंडिया एवं प्रदेश संघ की उपलब्धियों को बैतूल संघ सदस्यों से साझा किया। उन्होंने उर्वरक, बीज एवं कीटनाशकों के नियमों पर विस्तार से चर्चा की एवं व्यापारियों से आह्वान किया कि वे जिला संगठन को मजबूत करें इससे ही प्रदेश एवं देश का संगठन मजबूत होगा एवं भविष्य में भी अनेक लड़ाईयो को लडऩे में आपका सहयोग मिलेगा।
प्रतिभाओं का किया सम्मान
बैतूल संघ द्वारा जिले में प्रथम स्थान पर रहे 10वी, 12वी की छात्राएं क्रमश: गामिनी एवं दिव्यानी का सम्मान भी किया गया। पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा अतिथि मानसिंह राजपूत एवं संजय रघुवंशी ने विक्रेताओं को भी प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए।
