अब दो रिपोर्टो में भिन्नता होने पर राष्ट्रीय प्रयोगशाला में करा सकेंगे उर्वरक की जांच

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आज से होगा उर्वरक के नमूने प्रक्रिया में बदलाव, एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने नई प्रक्रिया का किया स्वागत

हलधर किसान, दिल्ली। केंद्र सरकार ने उर्वरक नमूने लेने की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए है, यह बदलाव एक मार्च से लागू होने वाले है। जिसका गजट नोटिफिकेशन एक मार्च से जारी होगा। केंद्र सरकार के प्रक्रिया में किए गए बदलावों का एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन नई दिल्ली ने भी स्वागत किया है। एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय कुमार रघुवंशी ने बताया कि उर्वरक नमूने लेने के साथ ही प्रयोगशाला में जांच के दौरान कई विसंगतियां थी, जिसको लेकर एसोसिएशन समय-समय पर शासन का ध्यान आकृष्ट कराता रहा है। अब प्रक्रिया में बदलाव से निश्चित रुप से व्यापारियों को राहत मिलेगी वही विभागीय जांच पर उठने वाले सवालों पर भी विराम लग सकता है।
यह किए बदलाव
भारत सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेसÓ की नीति को आगे बढ़ाने और सुनिश्चित करने के लिए और किसानों को आसानी से उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता, विश्लेषण की एक नई प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी गजट क्रमांक ैएसओ 623 (ई) दिनांक 8 फरवरी 2023 के प्रावधानों के अनुसार इस नई प्रणाली के तहत उर्वरक निरीक्षक तीन नमूने लेकर पहला नमूना राज्य अधिसूचित प्रयोगशाला को भेजेगा और शेष दो भागों को राज्य द्वारा नामित प्राधिकारी के पास जमा करेगा। डीलर/ निर्माता के पास राष्ट्रीय परीक्षण शाला की किसी भी अधिकृत प्रयोगशाला में एक साथ विश्लेषण के लिए राज्य अधिकृत अधिकारी के पास दो नमूनों में से एक भेजने के लिए नमूने लेने की तारीख से 7 दिनों के भीतर आवेदन करने का विकल्प है। यदि दो रिपोर्टों में भिन्नता है, तो ऐसे नमूने निरपवाद रूप से केंद्रीय उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशिक्षण संस्थान फरीदाबाद में रेफरी विश्लेषण के लिए भेजे जाएंगे।Ó यह नई उर्वरक परीक्षण व्यवस्था 1 मार्च 2023 से लागू होगी
संयुक्त निदेशक की होगी तैनाती
इस बीच, एफसीओ के खंड 28, के तहत राज्यों के लिए यह आवश्यक है कि वे अधिसूचना द्वारा एक अधिकारी नियुक्त करें, जो नमूनों की अभिरक्षा के लिए संयुक्त निदेशक के पद से नीचे का अधिकारी न हो। अर्थात उर्वरक का नमूना लेने के तत्काल बाद बगैर समय गवाए संबंधित कम्पनी को सूचना दी जावे, जिससे कम्पनी तत्काल प्रथम सैम्पल के समय रेफरी की अपील कर सके। अब रेफरी की अवधि 30 दिन से कम कर केवल 7 दिन कर दी गई है व प्रथम सैम्पल फेल होने के बाद जो रैफरी होता था उसके स्थान पर प्रथम नमूना लेते समय ही फीस जमा करनी होगी।
फरीदाबाद लेब की रिपोर्ट होगी अंतिम
दोनों नमूनों के विश्लेषण में अंतर होने पर रेफरी सेम्पल फरीदाबाद लेब में भेजा जाएगा और उसकी रिपोर्ट को अंतिम माना जायेगा। यह भी निश्चित कर दिया गया है कि एक सैंपल लैब में भेजने के बाद बाकी 2 सैंपल ज्वाइंट डायरेक्टर के अभिरक्षा में रखे जाएंगे। अत: सभी कंपनी उर्वरक निर्माता कंपनी प्रतिनिधि एवं उर्वरक विक्रेता 1 मार्च के बाद नमूने देने के तत्काल बाद ही इस प्रक्रिया के अनुसार 7 दिनों के अंदर दूसरे नमूने को विश्लेषण के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दें।
अब तक ऐसे होती थी प्रकिया
जानकारी अनुसार उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुसार तीन स्तरीय प्रणाली में उर्वरक के विश्लेषण को अनिवार्य करता हैए यानी नमूने का पहला विश्लेषण किसी भी अधिसूचित प्रयोगशालाओं में किया जाता है, दूसरा विश्लेषण पीडि़त व्यक्ति या एजेंसी की अपील पर और तीसरा नमूना विश्लेषण केवल उन मामलों में जहां पहले विश्लेषण और दूसरी विश्लेषण रिपोर्ट में भिन्नता है। केंद्र सरकार द्वारा इस पूरी प्रणाली की समीक्षा की गई है और यह देखा गया है कि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और अंतिम परिणाम तक पहुंचने में 6 से 8 महीने लगते हैं। जिसके कारण सब्सिडी जारी करने और किसानों को उर्वरक की उपलब्धता को भी प्रभावित करता है।

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