वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगा
हलधर किसान बालाघाट l बालाघाट की पहचान में चार चांद लगाने वाला सोनेवानी जंगल अब एक ऐसी महत्वपूर्ण भूमिका में होगा, जो न सिर्फ जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगा, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती भी प्रदान करेगा।
📍 टाइगर रिजर्व का भविष्य बनेगा सोनेवानी जंगल
यह जंगल पेंच व कान्हा टाइगर रिजर्व के लिए न सिर्फ एक कॉरिडोर का काम करता है, बल्कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के पांच प्रमुख टाइगर पार्क (नागझिरा-नवेगांव, ताडोबा-अंधारी, मेलघाट, कान्हा, पेंच) और दो अभयारण्यों (उमरेड-करहंडला, फेन अभयारण्य) के लिए एक अनोखा संरक्षण सर्कल भी बनाता है।
इस सर्कल की सीमा दक्षिण में अमरावती-चंद्रपुर-नागपुर, उत्तर में मंडला, पूर्व में गोंदिया, और पश्चिम में बैतूल तक फैली है, जो वन्यजीवों के निर्बाध विचरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करता है।
🌿 सोनेवानी: तालाबों, नदियों और घास के मैदानों से सजी स्वर्ग सी धरती
6 से 7 तालाब, सर्राटी नदी और सिलेझरी के विस्तृत घास के मैदान इस क्षेत्र को एक अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं।
यहाँ वर्षभर पानी की उपलब्धता है, जो वन्यजीवों और बाघों के लिए आदर्श आवास बनाता है।
करीब 180 वर्ग किमी का घना क्षेत्र, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप 5-6 महीने नहीं होता, बाघिनों को शावकों की परवरिश के लिए सुरक्षित वातावरण देता है।
📸 AI कैमरों से निगरानी और संरक्षण
रेंजर श्री हर्षित सक्सेना के अनुसार, क्षेत्र की निगरानी के लिए एआई आधारित कैमरों का उपयोग किया जा रहा है, जो रियल टाइम में वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी प्रदान करते हैं।
🌳 158 वर्ष पुराना सागौन का महावृक्ष
इस जंगल में वर्ष 1867 में ब्रिटिश वन अधिकारी डेट्रिच ब्रांडिस द्वारा लगाया गया सागौन का पेड़, आज भी जीवित है। इसकी 467 सेमी. गोलाई इसे मध्य भारत का सबसे चौड़ा सागौन वृक्ष बनाती है।
📌 प्रबंधन में शामिल होंगे स्थानीय समुदाय
राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 29वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोनेवानी को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
अब अधिसूचना जारी होने के बाद, वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान (WLMP) तैयार किया जाएगा।
स्थानीय प्रबंधन समिति इस जंगल से प्राप्त होने वाले संसाधनों की आजीविका, जागरूकता, प्रशिक्षण व संरक्षण की योजनाएं तैयार करेगी। यह तय होगा कि कितनी मात्रा में जंगल को पर्यटन या संसाधन उपयोग के लिए खोला जाए।
यह भी पढेंः- बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कैमरों की मदद से की जा रही बाघ, तेंदुआ और सहभक्षी वन्य-प्राणियों की गणना
