हजारों की लागत के बाद अब दूसरी फसल लगाने को मजबूर देवली के किसान
हलधर किसान खरगोन। कपास बीजों की उन्नत किस्मों के आने के बाद भी जिले में फसल खराब होने की शिकायतें सामने आ रही है। एक ओर जहां कपास के बंपर उत्पादन के चलते जिले को सफेद सोने के रुप में पहचाना जाता है, वहीं बेहतर उत्पादन को देखते हुए जमीन की उपजाऊ क्षमता, फसल की देखरेख से बेखबर किसान कपास फसल की बुआई कर रहे है। ऐसे में अब यह फसल बेहतर उत्पादन के बजाय कुछ किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण भी बन रही है।
ऐसा इसलिए कि जिले के टांडाबरुड़ क्षेत्र के सैंकड़ों हेक्टयेर रकबे में कुछ वर्षों से कपास फसल की जड़ में सडऩ लगने की बीमारी से परेशान होकर किसान नुकसान उठा रहे है। इस सीजन में भी फसल बचाने के प्रयासों के बाद भी कई किसानों की कपास फसल खराब हुई है और अब वह दूसरी फसल बुआई की तैयारी में जुट गए है।
ग्राम देवली बरुड, कोठा उमरखली आदि में कपास की फसल खराब होने के समाचार है। कृषक जितेंद्र गहलोत ने बताया कि उनकी डेढ़ एकड़ रकबे में कपास उखाड़कर मक्का बुआई करना पड़ी। इससे उन्हें 15 हजार रुपए आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ग्राम बरुड़ निवासी भुरु यादव ने बताया उन्होंने 5 एकड़ रुकबे में कपास बुआई कि थी, उनके खेत में भी एक एकड़ की फसल खराब हुई है। मोतीलाल राठौड़ टांडाबरुड ने बताया कि उन्होंने 2 एकड़ रकबे में कपास की बुआई की है। फसल में मौसम की मार, कीटों का प्रकोप, बीमारियों के लगने, जड़ गलन जैसी बीमारियों के चलते पौध स्थिति में ही फसल दम तोड़ रही है, इसके चलते इस फसल को उखाडऩा मजबूरी बन गया है। किसानों ने मांग की है कि कपास बुआई के बाद निंदाइ, गुड़ाई और खाद-कीटनाशक पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी फसल को बचा नही पाए।
अब शासन- प्रशासन हमें मक्का या सोयाबीन बीज उपलब्ध कराने की मदद कर दे तो कुछ राहत मिल जाएगी।
कृषि विभाग से नही मिला कोई सुझाव
किसानों ने बताया कि कपास फसल में बीमारी कोई पहली बार नही लगी है। पिछले कुछ वर्षाे से समस्या लगातार सामने आ रही है। कृषि विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन विभाग ने अब तक न तो खेतों का सर्वे किया है न ही इससे बचाव का कोई प्रशिक्षण दिया है।
- वैज्ञानिकों के साथ निरीक्षण करेंगे
- देवली के किसानों की कपास फसल खराब होने की शिकायत मिली थी। वैज्ञानिकों की टीम के साथ मौका- मुआयना करेंगे। – गिरधारी भावेर, एसएडीओ, कृषि विभाग खरगोन।
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