हलधर किसान दिल्ली l देश की खाद्य सुरक्षा को सशक्त बनाने, मछली आधारित प्रोटीन की मांग को पूरा करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन में अहम भूमिका निभाने वाले मछलीपालकों के सम्मान में आज राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस 2025 का आयोजन भव्य रूप से किया गया। यह कार्यक्रम भुवनेश्वर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय मीठाजल जीवनपालन अनुसंधान संस्थान में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, श्री जॉर्ज कुरियन, तथा ओडिशा सरकार के मत्स्य मंत्री श्री गोकुलानंद मलिक सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
मत्स्यपालन में लहराई ‘नीली क्रांति’
भारत सरकार के प्रयासों से देश में मत्स्य उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है। वर्ष 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में उत्पादन 195 लाख टन तक पहुंच गया है, जो 104% वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में 140% का विस्तार हुआ है।
झींगा उत्पादन में 270% की बढ़ोतरी और 60,500 करोड़ रुपये से अधिक का समुद्री खाद्य निर्यात देश की ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
इतिहास और उद्देश्य
यह दिवस प्रो. डॉ. हीरालाल चौधरी और डॉ. के.एच. अलीकुन्ही की उस ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में मनाया जाता है, जब 1957 में उन्होंने मेजर कार्प्स मछलियों में प्रेरित प्रजनन तकनीक (Hypophysation) को सफलतापूर्वक अपनाया। इससे देश में अंतर्देशीय जलीय कृषि में क्रांति आ गई।
नई घोषणाएं और सम्मान समारोह
कार्यक्रम में कई नई पहलों की शुरुआत हुई, जैसे—
- नए मत्स्य पालन क्लस्टरों की घोषणा
- बीज प्रमाणीकरण व हैचरी संचालन पर दिशानिर्देश जारी
- आईसीएआर प्रशिक्षण कैलेंडर का विमोचन
- पीएम मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के तहत नई परियोजनाओं की आधारशिला और उद्घाटन
साथ ही, पारंपरिक मछुआरों, सहकारी समितियों, स्टार्टअप्स और केसीसी कार्डधारकों को विशेष सम्मान से नवाजा गया।
आभार और भविष्य की दिशा
इस कार्यक्रम के माध्यम से मत्स्यपालन विभाग ने देश भर के लाखों मछुआरों और मत्स्यपालकों के योगदान को सराहा। केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने अपने भाषण में कहा, “हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं, बल्कि स्थायित्व, गुणवत्ता और समावेशी विकास है।”
🔹 राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की खाद्य संप्रभुता, ग्रामीण समृद्धि और जलीय संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुका है।
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