धान की टाप ड्रेसिंग के लिए कृषि विभाग की किसानों को सलाह

Agriculture departments advice to farmers for top dressing of paddy

हलधर किसान बालाघाट l मध्यप्रदेश राज्य का सर्वाधि‍क धान उत्पादक जिला है। यहां पर रोपा एवं बोआर दोनों पद्धति से धान की फसल लगाई जाती है। बालाघाट जिले में धान की फसल के अनुरूप वर्षा होने के कारण धान की रोपा लगाने का कार्य तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। जिन किसानों की बोनी एवं रोपा का कार्य पूर्ण हो चुका है वे धान की फसल में टाप ड्रेसिंग के लिए उर्वरक का छिड़काव कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में कृषि‍ विभाग के अधि‍कारियों द्वारा किसानों को उर्वरक के इस्तेमाल के संबंध में सलाह दी गई है।

   इस वर्ष बालाघाट जिले में 02 लाख 40 हजार हेक्‍टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 02 लाख 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगाई जा चुकी है। गत वर्ष 2024 में बालाघाट जिले में 02 लाख 56 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगाई गई थी। इस वर्ष मक्का, रागी एवं कोदो के रकबे में वृद्धि होने के कारण धान का रकबा 02 लाख 40 हजार हेक्टेयर रखा गया है।

   किसानों द्वारा धान की फसल में पहली टॉप ड्रेसिंग के रूप में उर्वरक का छिड़काव किया जा रहा है। कृषि‍ विभाग के अधि‍कारियों ने किसानों को सलाह दी है कि जहाँ रोपा लगाया जाता है, वहां खेत में कीचड़ मचाने के समय सिंगल सुपर फास्फेट, डीएपी या एनपीके का उपयोग करना चाहिये। इससे फसलों को अधिकतम लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने धान की पहली टॉप ड्रेसिंग में डीएपी, यूरिया, जिंक सल्फेट, अमोनियम सल्फेट, कैल्शियम सल्फेट, फेरस सल्फेट, मैग्नीशियम सल्फेट आदि उर्वरकों को मिलाकर डालने की प्रक्रिया को गलत बताया है और कहा है कि इस प्रकार से उर्वरकों का आपस में मिश्रण करने से उर्वरकों का अधिकतम लाभ फसलों को प्राप्त नहीं होगा, बल्कि इससे नुकसान ही होता है और उत्पादन लागत भी बढ़ती है।

किसानों को सलाह दी गई है कि डीएपी के साथ कभी भी जिंक सल्फेट, मैग्नीशियम सल्फेट, फेरस सल्फेट आदि उर्वरकों को आपस में नहीं मिलाना चाहिये। इसी प्रकार पोटाश के साथ अमोनियम सल्फेट नहीं मिलाना चाहिये। अगर यूरिया की अकेली टॉप ड्रेसिंग की जा रही है तो यूरिया के साथ जिंक सल्फेट, मैग्नीशियम सल्फेट, फेरस सल्फेट मिलाया जा सकता है।

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