हलधर किसान, बालाघाट। जिले को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर एवं अग्रणी बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दिनांक 22 अगस्त 2025 को उपसंचालक कार्यालय, सभागृह कक्ष में जिले के सभी विकासखंडों के पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए कृत्रिम गर्भाधान विषय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पशुओं की नस्ल सुधार, उच्च दुग्ध उत्पादन तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना रहा।
प्रशिक्षण का आयोजन प्रभारी उपसंचालक डॉ. एन.डी. पुरी के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि सत्रों का संचालन पशु चिकित्सा शल्यज्ञ डॉ. राकेश शील एवं पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. रूपाली गजभिए ने किया।
तकनीकी विषयों पर हुआ विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान कृत्रिम गर्भाधान की मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs), सीमेन हैंडलिंग तथा सेक्स सॉर्टेड सीमेन के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली बछियों का जन्म संभव होगा, जिससे भविष्य में जिले के दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
विभाग ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में विभागीय स्टाफ, गौसेवकों एवं मैत्री कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षित करें ताकि यह तकनीक गाँव-गाँव तक पहुँच सके।
डॉ. पुरी का संदेश
प्रभारी उपसंचालक डॉ. पुरी ने कहा –
“कृत्रिम गर्भाधान पशुधन नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादन वृद्धि का सशक्त माध्यम है। विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र पशु को गुणवत्तापूर्ण सीमेन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध हो।”
साथ ही उन्होंने डेयरी योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं वृन्दावन ग्रामों में नियमित भ्रमण कर अधिकाधिक पशुपालकों को विभागीय योजनाओं से जोड़ने के निर्देश भी दिए।
✨ कार्यक्रम की खास बातें
- आयोजन प्रभारी उपसंचालक डॉ. एन.डी. पुरी के मार्गदर्शन में।
- सत्रों का संचालन डॉ. राकेश शील एवं डॉ. रूपाली गजभिए ने किया।
- प्रशिक्षण में SOPs, सीमेन हैंडलिंग एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन पर विशेष जोर।
- सेक्स सॉर्टेड सीमेन से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली बछियों का जन्म संभव।
- अधिकारियों को निर्देश – गौसेवकों व मैत्री कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दें।
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