बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान
हलधर किसान दिल्ली l पंजाब में आई भीषण बाढ़ से 1,000 से ज्यादा गांव और 61,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है. राहत और बचाव अभियान तेजी से जारी है. बाढ़ से प्रभावित सबसे सबसे ज्यादा गांव गुरदासपुर जिले में हैं.

बाढ़ के चलते पंजाब में भारी तबाही हुई है। सोमवार शाम तक 29 लोगों के मारे जाने और 2.56 लाख लोगों के प्रभावित होने की खबर है। हजारों एकड़ में लगी फसल खराब हो गई है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के सीएम भगवंत मान से बात की और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। चीन से दिल्ली लौटते ही पीएम ने भगवंत मान से फोन पर बात की। दोनों के बीच पंजाब में बारिश और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा हुई।

एक तरफ जहां विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पंजाब के लोग आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की ‘अक्षमता’ के कारण परेशान हैं, वहीं राज्य के जल संसाधन मंत्री बी. कुमार गोयल ने दावा किया कि केंद्र के अधीन भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा जून में समय पर पानी छोड़े जाने से तबाही को काफी हद तक कम किया जा सकता था.
पंजाब के लोगों से एक दूसरे का साथ देने की अपील
कुछ विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पंजाब के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की. इस बीच, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने शनिवार को लोगों से राज्य के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने की अपील की.
उन्होंने सभी पंजाबियों से इस मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का साथ देने और संकट में फंसे हर पंजाबी की मदद करने की भी अपील की. कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि पंजाब में बार-बार आ रही बाढ़ के असली कारणों का पता लगाना जरूरी है ताकि लोग सतर्क और तैयार रहें.

बांधों के खराब प्रबंधन से आई बाढ़- कांग्रेस
कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बाढ़ के लिए बांधों और जल स्रोतों के कथित कुप्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहराया और ज़िम्मेदारी तय करने की मांग की.
उन्होंने सवाल किया कि भारी बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद, बांधों में पानी जमा क्यों होने दिया गया और चरणबद्ध तरीके से समय पर पानी क्यों नहीं छोड़ा गया. उन्होंने कहा कि यह किसी अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा से ज़्यादा एक ‘आपराधिक लापरवाही’ है.

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भारी बारिश के कारण सतलुज, व्यास व रावी नदियों और के जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से पंजाब भीषण बाढ़ की चपेट में है. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिलों में हैं.
पंजाब में बाढ़ की जिम्मेदार केंद्र सरकार- जल संसाधन मंत्री
NDRF, सेना, सीमा सुरक्षा बल, BSF और जिला अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 11,330 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. कई मंत्री और विधायक बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा ले रहे हैं. राज्य के जल संसाधन मंत्री गोयल ने पिछले 37 साल में आई सबसे भीषण बाढ़ के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
गोयल ने दावा किया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा जून में समय पर पानी छोड़े जाने से तबाही काफी कम हो सकती थी. पंजाब में लाखों लोग अब भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री ने ‘संकट पर एक भी बयान नहीं दिया, राज्य को कोई मदद देने की तो बात ही छोड़ दें’.
लगातार बारिश के कारण आई भयंकर बाढ़ से पंजाब बेहाल है। पंजाब के राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री एस. हरदीप सिंह मुंडियन के अनुसार, बाढ़ ने 12 जिलों में 2.56 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया है। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। जान-माल, कृषि और पशुधन को भारी नुकसान हुआ है।
मंत्री ने बताया कि अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 15,688 लोगों को निकाला गया है। इनमें सबसे ज्यादा गुरदासपुर (5,549), फिरोजपुर (3,321), फाजिल्का (2,049), अमृतसर (1,700), पठानकोट (1,139) और होशियारपुर (1,052) से हैं। तत्काल राहत प्रदान करने के लिए, राज्य सरकार ने 129 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में 7,144 लोग रह रहे हैं। सबसे ज्यादा फिरोजपुर में 3,987 लोग, उसके बाद फाजिल्का (1,201), होशियारपुर (478), पठानकोट (411) और गुरदासपुर (424) में हैं।
वायु सेना ने लगाए 35 हेलीकॉप्टर
बाढ़ से अब तक 1,044 गांव प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए कई एजेंसियों को लगाया गया है। NDRF ने 20 टीमें तैनात की हैं। सेना, नौसेना और वायु सेना ने 10 टुकड़ियां तैनात की हैं। 8 स्टैंडबाय पर हैं। इनके साथ इंजीनियर यूनिट भी हैं। 35 से अधिक हेलीकॉप्टर बचाव अभियानों में लगे हुए हैं। इनके साथ 114 नावें और एक राज्य हेलीकॉप्टर भी है। सीमावर्ती प्रभावित इलाकों में BSF की यूनिट तैनात की गई हैं।
94,061 हेक्टेयर में लगी फसलें हुईं खराब
बाढ़ से पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। 94,061 हेक्टेयर में लगी फसलें बर्बाद हो गईं हैं। अमृतसर (23,000 हेक्टेयर), मानसा (17,005 हेक्टेयर), कपूरथला (14,934 हेक्टेयर), तरनतारन (11,883 हेक्टेयर) और फिरोजपुर (11,232 हेक्टेयर) सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। कई अन्य जिलों से भी फसलों के नुकसान की खबरें आई हैं।
मंत्री मुंडियन ने कहा कि सरकार ने मेडिकल टीमों और राहत वितरण चैनलों को सक्रिय कर दिया है। पशुधन और बुनियादी ढांचे के नुकसान का पूरा पता पानी कम होने के बाद ही चल पाएगा। भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार तत्काल राहत और दीर्घकालिक पुनर्वास दोनों प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्रीय कृषि ने नई दिल्ली में ली उच्चस्तरीय बैठक
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक कर विभिन्न राज्यों में हो रही बारिश की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने पंजाब में आई बाढ़ व फसलों पर इसके असर के बारे में भी वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी हासिल की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंजाब के किसान बिल्कुल चिंता नहीं करें, केंद्र सरकार इस संकट में पूरी तरह प्रभावित किसानों के साथ खड़ी हुई है।
शिवराज सिंह ने कहा कि वे आगामी दिनों में पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने के साथ ही मौके पर पीड़ित किसानों से भी मिलेंगे और उन्हें हरसंभव मदद की जाएगी। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने देशभर में कृषि क्षेत्र की स्थिति को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान बताया गया कि खरीफ बुवाई क्षेत्रफल में पिछले वर्ष के मुकाबले आशाजनक वृद्धि हुई है। खाद्यान्न फसलों के साथ ही बागवानी क्षेत्र की प्रगति के बारे में भी केंद्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी ली। विशेषकर आलू, प्याज और टमाटर के उत्पादन की स्थिति और कीमतों के बारे में उन्होंने जानकारी हासिल की। बैठक में अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों में हो रही बारिश और जलाशयों की स्थिति के बारे में भी बताया। कई राज्यों में इस वर्ष औसत से अधिक बारिश हुई, जो फसलों के लिए लाभदायक स्थिति है। अच्छी बारिश से जलाशय लबालब हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए कि खाद्यान्न फसलों के साथ ही किसानों को बागवानी सहित इंटीग्रेटेड फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएं, ताकि किसानों को अधिक लाभ हो सकें। भविष्य की मांग के मद्देनजर हमें खेतों में अनाज के साथ अन्य वैकल्पिक उपायों से कृषि क्षेत्र का समग्र विकास करना होगा। बागवानी और इंटीग्रेटेड फार्मिंग इस दिशा में कारगर उपाय है। उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल के किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए भी निर्देशित किया।
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