हलधर किसान समाचार
जनपद पंचायत बिरसा क्षेत्र में किसानों को सशक्त बनाने तथा उन्हें नवीन कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से कृषि विभाग बिरसा द्वारा 17 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में ग्राम निक्कुम, बांसिनखार, कटंगी, भीमा, भीमलाट, बिसतवाही और सलघट के कृषक साथियों को राई प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत आवश्यक कृषि उपकरण और उन्नत सामग्री वितरित की गई।
कार्यक्रम में जनपद पंचायत बिरसा अध्यक्ष सविता धुर्वे, उपाध्यक्ष हेमंत साहू, जनपद सदस्य लक्ष्मीकांत धुर्वे, कृषि विभाग से एईओ ललित टेकाम तथा आईओ खिलेश्वरी धुर्वे की मुख्य भूमिका रही। सभी जनप्रतिनिधियों और कृषि अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किसानों को स्प्रे पंप, बीजोपचार की दवा, जिंक, बोरान, माइक्रोन्यूट्रिएंट, नीम ऑयल, कीटनाशक फिप्रोनिल, ट्राईकोडर्मा सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की।
यह वितरण सिर्फ सामग्री का नहीं बल्कि किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का भी एक सशक्त प्रयास रहा। कृषि विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि किसान राई की फसल में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाए तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकें।
जैविक खेती पर कृषि सखियों की विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम में कृषि सखियों द्वारा जैविक खेती के महत्व पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने उपस्थित किसानों को रासायनिक कृषि से होने वाले दीर्घकालिक दुष्प्रभावों तथा जैविक विधियों के लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
कृषि सखियों ने किसानों को जीवामृत के उपयोग और उसकी निर्माण विधि के बारे में समझाया। यह जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने और पौधों की बढ़वार को प्राकृतिक रूप से प्रोत्साहित करने में बेहद कारगर है। जीवामृत बनाने के लिए गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी के मिश्रण से तैयार होने वाली इस खाद को कितने दिनों तक सड़ाना है, कैसे उपयोग करना है—इन सभी पहलुओं पर किसानों को विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।
इसके साथ ही जैविक कीटनाशक नीम-अस्त्र और अग्नि-अस्त्र बनाने की विधि और उपयोग के तरीके भी बताये गये। कृषि सखियों ने बताया कि नीम-अस्त्र कीटनाशकों का प्राकृतिक विकल्प है जो फसलों को कीटों से बचाता है तथा मिट्टी और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता। वहीं अग्नि-अस्त्र तेज प्रभाव वाला जैविक कीटनाशक है जो कीटों को दूर करने में अत्यंत उपयोगी है।
किसानों की सहभागिता और उत्साह
इस कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर इस पहल से किसानों में यह विश्वास बढ़ा कि कृषि विभाग समय-समय पर उनकी जरूरतों को समझते हुए सहायता प्रदान करता रहेगा। किसानों ने स्प्रे पंप और बीजोपचार दवाइयों के उपयोग से उत्पादन वृद्धि के प्रति सकारात्मक उम्मीद जताई।
कई किसानों ने यह भी कहा कि जैविक खेती पर मिली जानकारी उनके लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी। जैविक खेती की लागत कम होने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लंबे समय तक टिकाऊ उत्पादन देने की वजह से वे इस दिशा में आगे बढ़ने का मन बना रहे हैं।
कृषि विभाग की पहल से बढ़ेगी फसल गुणवत्ता
राई प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत दी गई सामग्री से किसानों को फसल सुरक्षा, पोषण प्रबंधन और कीट-व्याधि नियंत्रण में बड़ी सहायता मिलने वाली है। विशेषकर जिंक, बोरान और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता, दाने भराव और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
कृषि विभाग बिरसा की यह कार्रवाई किसानों के व्यापक हित के लिए उठाया गया एक प्रभावी कदम साबित होगी। आधुनिक कृषि उपकरण और जैविक तकनीकें ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को अधिक सशक्त, समृद्ध और सुरक्षित बनाने का माध्यम बनेंगी।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आधुनिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करने और कृषि उत्पादन में सुधार लाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
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