भारत-जापान ने COP-30 में मजबूत जलवायु साझेदारी की पुष्टि की, जेसीएम बनेगा वैश्विक जलवायु कार्रवाई का नया मॉडल

गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी अरुण यादव

हलधर किसान दिल्ली l   ब्राजील के बेलेम में आयोजित यूएनएफसीसीसी COP-30 के दौरान भारत ने संयुक्त ऋण व्यवस्था (Joint Crediting Mechanism – JCM) को समान, पारदर्शी और मापन योग्य वैश्विक जलवायु कार्रवाई का महत्वपूर्ण साधन बताया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 11वीं जेसीएम साझेदार देशों की बैठक में हिस्सा लेते हुए कहा कि यह व्यवस्था भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत समर्थन देगी।

इस बैठक की अध्यक्षता जापान के पर्यावरण मंत्री महामहिम श्री हिरोताका इशिहारा ने की। उन्होंने बताया कि जेसीएम से जुड़े देशों की संख्या बढ़कर 31 हो चुकी है और पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के अंतर्गत 280 से अधिक परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।

🌱 भारत ने कहा—जेसीएम विकासशील देशों के लिए होगा बड़ा सहारा

अपने भाषण में श्री यादव ने कहा कि जेसीएम जैसी पहल उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रौद्योगिकी-आधारित, सस्ती और मापन योग्य जलवायु समाधान ढूंढ रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से विश्वास और उन्नत तकनीक आधारित सहयोग की मजबूत साझेदारी रही है।

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भारत-जापान के बीच 7 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित सहयोग ज्ञापन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जेसीएम सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा प्रदान करता है, जिसके तहत:

  • जलवायु अनुकूल परियोजनाएं विकसित होंगी
  • उन्नत निम्न-कार्बन तकनीक का उपयोग बढ़ेगा
  • वित्त जुटाने में आसानी होगी
  • उत्सर्जन में कमी के आंकड़े पारदर्शी रूप से साझा होंगे

🔋 भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों को सीधे सहायता

श्री यादव के अनुसार यह व्यवस्था भारत के एनडीसी (राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य) और दीर्घावधि निम्न-उत्सर्जन रणनीति में सीधा योगदान देगी। इसमें खासकर ऊर्जा दक्षता, तकनीकी नवाचार और क्षमता निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

भारत का ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ‘इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल’ विकसित कर रहा है, जिसमें अनुच्छेद 6 और जेसीएम को समर्पित विशेष मॉड्यूल शामिल होगा। इससे परियोजनाओं की मंजूरी, निगरानी और पारदर्शिता में तेजी आएगी।

🔮 किन क्षेत्रों में होगी जेसीएम से बड़ी प्रगति?

मंत्री ने बताया कि आने वाले समय में भारत में निम्न-कार्बन तकनीक का उपयोग इन प्राथमिक क्षेत्रों में बढ़ेगा:

  • सौर और पवन ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण
  • ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया
  • कम्प्रेस्ड बायोगैस
  • टिकाऊ विमान ईंधन (SAF)
  • स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे कठिन क्षेत्रों में कम उत्सर्जन तकनीक

इन सभी क्षेत्रों को भारत की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इससे घरेलू तकनीक विकास, निवेश प्रवाह और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा।

🤝 भारत-जापान सहयोग—दुनिया के लिए आदर्श मॉडल

अपने संबोधन के अंत में श्री यादव ने कहा कि भारत और जापान का सहयोग यह दिखाता है कि पारदर्शी और ईमानदारी से लागू की गई तकनीकी साझेदारी कैसे पेरिस समझौते के लक्ष्यों को धरातल पर मजबूत कर सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जेसीएम भविष्य में समान, असरदार और विश्वसनीय जलवायु साझेदारी का वैश्विक मॉडल बनेगा।

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