मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना बनी पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि की नई राह

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना: पशुपालकों के लिए आर्थिक समृद्धि की नई राह। जानें इस योजना के लाभ और अवसरों के बारे में।

मुर्राह भैंसों से बदली आदिवासी पशुपालक दीपसिंह मेरावी की किस्मत

मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना” ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों के लिए आर्थिक उन्नति, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है। यह योजना न केवल उन्नत पशुधन उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर रही है। जिले के विकासखंड परसवाड़ा अंतर्गत ग्राम अरंडिया के आदिवासी पशुपालक दीपसिंह मेरावी इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आए हैं।

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दिनांक 20 दिसंबर 2025 को ग्राम अरंडिया में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के एक हितग्राही का स्थलीय सत्यापन किया गया। सत्यापन कार्य डॉ. एन.डी. पुरी, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राकेश शील (पशु चिकित्सा शल्यज्ञ), डॉ. मंजूषा कुशराम (विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी, परसवाड़ा) एवं डॉ. सुरेंद्र मर्सकोले (प्रभारी कृत्रिम गर्भाधान केंद्र, परसवाड़ा) भी उपस्थित रहे।

योजना से मिला आत्मनिर्भरता का संबल

सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि ग्राम अरंडिया निवासी श्री दीपसिंह मेरावी (अनुसूचित जनजाति वर्ग) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का सफलतापूर्वक लाभ लिया। योजना के अंतर्गत उन्हें 75 प्रतिशत अनुदान एवं 25 प्रतिशत स्वयं के अंशदान (73,700 रुपये) के माध्यम से उन्नत पशुधन क्रय करने का अवसर मिला।
श्री मेरावी हरियाणा राज्य के रोहतक जाकर मुर्राह नस्ल की दो उन्नत भैंसें तथा उनके एक माह आयु के बछड़े का चयन कर क्रय कर लाए। पशु क्रय के पश्चात भैंसों को पांच दिवस के भीतर सुरक्षित रूप से ग्राम अरंडिया लाया गया। इसके साथ ही पशुओं का तीन वर्षों का बीमा भी कराया गया, जिससे हितग्राही को भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, हर माह 20 हजार रुपये की शुद्ध आय

दीपसिंह मेरावी ने बताया कि भैंसों के क्रय के समय दुग्ध उत्पादन लगभग 8 लीटर प्रतिदिन प्रति भैंस था, जो मात्र डेढ़ माह की अवधि में बढ़कर 11 लीटर प्रतिदिन प्रति भैंस हो गया है। वर्तमान में उनके द्वारा उत्पादित दूध का विक्रय सांची दुग्ध संघ को किया जा रहा है।
दूध विक्रय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 40 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त हो रही है। सभी खर्चों के बाद उन्हें लगभग 20 हजार रुपये की शुद्ध मासिक आय हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

प्रेरणा बन रहे हैं दीपसिंह मेरावी

श्री मेरावी ने बताया कि उनकी मुर्राह भैंसों को देखने एवं योजना की जानकारी लेने के लिए आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में पशुपालक उनके घर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने उन्हें केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं दी, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी दिलाई है। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन एवं पशुपालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना पशुपालकों के लिए अत्यंत उपयोगी, व्यावहारिक और लाभकारी सिद्ध हो रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही योजना

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने, उन्नत नस्लों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में निरंतर क्रियान्वित की जा रही है। यह योजना आज ग्रामीण अंचलों में खुशहाली और समृद्धि की नई कहानी लिख रही है।

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