कृषि आदान विक्रेता संघ ने फैसले को बताया ऐतिहासिक सील पैक दवा = नो केस ! हाइकोर्ट से डीलरों को बड़ी राहत
हलधर किसान, इंदौर।
कृषि आदान विक्रेताओं, थोक–खुदरा व्यापारियों और मार्केटिंग कंपनियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई कीटनाशक सील पैक अवस्था में बेचा गया हो और बाद में उसे misbranded पाया जाए, तो इसके लिए डीलर या मार्केटिंग कंपनी को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में सीधे तौर पर जिम्मेदारी केवल निर्माता कंपनी की ही बनती है।
न्यायमूर्ति यशवीर सिंह राठौर ने M/s Suminova Agri Science बनाम राज्य सरकार (CRM-M-6231 of 2020) प्रकरण में 2 जनवरी 2026 को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने वर्ष 2019 में दर्ज आपराधिक शिकायत, समन आदेश तथा उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को निरस्त कर दिया।
डीलर निर्माता नहीं, विक्रेता है
इस फैसले के सामने आने के बाद कृषि आदान विक्रेता संघ ने इसे अपनी वर्षों पुरानी मांग की जीत बताया है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री, प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय रघुवंशी और जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण दुबे ने संयुक्त रूप से कहा कि संगठन लंबे समय से यह मांग करता आ रहा था कि डीलर केवल विक्रेता होता है, निर्माता नहीं। खाद, बीज या कीटनाशक यदि अमानक या misbranded पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होती है, न कि उस व्यापारी की जो सील पैक उत्पाद ईमानदारी से बेच रहा है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले से यह बात पूरी तरह सिद्ध हो गई है। अब सरकार को चाहिए कि इस निर्णय को अमल में लाते हुए देशभर में कृषि विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे, ताकि जांच और कार्रवाई के दौरान डीलरों पर अनावश्यक प्रकरण न बनाए जाएं।
धारा 33 पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में Insecticides Act की धारा 33 का विशेष उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि डीलर या मार्केटिंग कंपनी के अधिकारियों को तभी दोषी ठहराया जा सकता है, जब उन्हें कंपनी द्वारा “गुणवत्ता के लिए अधिकृत अधिकारी” घोषित किया गया हो। इस मामले में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को “कैजुअल और मैकेनिकल” करार देते हुए कहा कि बिना तथ्यों पर विचार किए और बिना कारण बताए सीधे समन जारी करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
क्या था पूरा मामला
पूरा मामला 22 मई 2017 का है, जब लुधियाना जिले के खन्ना क्षेत्र में कीटनाशक निरीक्षक द्वारा Fipronil 0.3% GR का सैंपल लिया गया था। यह दवा M/s Vikas Organic Ind Corporation, फरीदकोट द्वारा निर्मित थी और M/s Suminova Agri Science, कोटकपूरा द्वारा बाजार में बेची जा रही थी।
राज्य लैब तथा बाद में सेंट्रल इन्सेक्टिसाइड लैब, फरीदाबाद की रिपोर्ट में सैंपल को misbranded बताया गया। इसके बाद डीलर, सप्लायर, मार्केटिंग कंपनी और उसके पदाधिकारियों को आरोपी बनाकर समन जारी कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को खारिज करते हुए कहा कि जब दवा सील पैक थी और डीलर या मार्केटिंग कंपनी का उसके निर्माण, पैकिंग या लेबलिंग से कोई लेना-देना नहीं था, तो उन पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
देशभर के डीलरों के लिए मील का पत्थर
यह फैसला खाद-बीज और कीटनाशक व्यापार से जुड़े हजारों डीलरों के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। अब कोई भी अधिकारी केवल सैंपल के misbranded होने के आधार पर, बिना भूमिका सिद्ध किए, डीलरों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
कृषि आदान विक्रेता संघ का कहना है कि इस निर्णय के देशभर में लागू होने से व्यापारी निडर होकर कारोबार कर सकेंगे और अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी। यह थोक और खुदरा विक्रेताओं की बड़ी जीत है, जिसका प्रभाव पूरे भारत में दिखाई देगा।

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