‘गेहूं का मामा’ खरपतवार से फसल चौपट होने का खतरा

The wheat uncle weed threatens to ruin crops after Punjab and Haryana Madhya Pradesh is now facing this problem with its wheat crop

पंजाब-हरियाणा के बाद अब मध्यप्रदेश में गेहूं पर आफत

हलधर किसान | नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाला खरपतवार ‘गेहूं का मामा’ अब मध्यप्रदेश में भी तेजी से फैल रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने प्रदेश के कई जिलों में इसके बढ़ते प्रकोप की पुष्टि की है, जिससे किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

आईसीएआर की रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर, खरगोन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, नरसिंहपुर सहित अन्य जिलों में गेहूं की फसलों में यह खरपतवार पाया गया है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो गेहूं की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है।


रसायन हो रहे निष्प्रभावी, बढ़ रही समस्या

जांच में सामने आया है कि खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयोग किए जा रहे कई रसायन अब असर नहीं दिखा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण बाजार में उपलब्ध निम्न गुणवत्ता वाले, हल्के और सस्ते रसायनों का लगातार उपयोग बताया जा रहा है।

इसके साथ ही किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेने के बजाय एक-दूसरे की देखादेखी में बिना पूरी जानकारी के दवाओं का चयन कर लेते हैं, जिससे समस्या और अधिक बढ़ रही है।


गेहूं जैसा दिखता है ‘गेहूं का मामा’

‘गेहूं का मामा’ कहलाने वाला यह खरपतवार शुरुआती अवस्था में बिल्कुल गेहूं जैसा दिखाई देता है, इसी कारण किसान समय पर इसकी पहचान नहीं कर पाते।

  • इसमें भी बाली निकलती है
  • लेकिन बालियों में कांटे नहीं होते
  • कॉलर वाला हिस्सा हल्के गुलाबी रंग का दिखाई देता है

यह खरपतवार गेहूं के पौधों की जड़ों को जकड़ लेता है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फसल कमजोर हो जाती है।


30–35% तक घट सकता है उत्पादन

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह खरपतवार गेहूं के उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट ला सकता है। यह पोषक तत्वों, पानी और खाद पर कब्जा कर फसल को कमजोर करता है, जिससे दाने भराव कम हो जाता है।

केवल जबलपुर जिले में ही करीब 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है, जहां अनुमानित उत्पादन लगभग 50 हजार टन है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश करीब 90 लाख हेक्टेयर गेहूं उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान रखता है।


शुरुआत में नियंत्रण से 95% तक रोक संभव

आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय चौधरी ने बताया कि पहले यह खरपतवार बहुत कम दिखाई देता था, लेकिन अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बुवाई के समय सावधानी बरतें, प्रमाणित बीज और उच्च गुणवत्ता वाले अनुशंसित रसायनों का ही उपयोग करें।
शुरुआती अवस्था में नियंत्रण करने पर 95 प्रतिशत तक इसके प्रकोप को रोका जा सकता है।


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