पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द की आपराधिक कार्यवाही
हलधर किसान चंडीगढ़ | कृषि आदान व्यापारियों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अदालत ने सीलबंद पैकिंग में मिले मिसब्रांडेड कीटनाशक के मामले में विक्रेता और उसके प्रोपराइटर के खिलाफ दर्ज शिकायत, समन आदेश तथा संबंधित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। इस फैसले को कृषि आदान व्यापारियों के कानूनी अधिकारों और उनके दायित्वों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने मामले के तथ्यों और कीटनाशक अधिनियम, 1968 के प्रावधानों पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने पर विक्रेता को वैधानिक संरक्षण मिल सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पंजाब के मलेरकोटला स्थित मेसर्स सोही खेती सेवा केंद्र और उसके प्रोपराइटर सिकंदर सिंह से संबंधित है। अक्टूबर 2017 में कीटनाशक निरीक्षक और कृषि उपनिरीक्षक ने प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया था। इस दौरान फोरेट 10 प्रतिशत सीजी की पांच-पांच किलोग्राम की 40 पैकिंग मिली थीं। संबंधित कीटनाशक का निर्माण उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद स्थित मेसर्स एस.डी. एग्रो केमिकल्स लिमिटेड द्वारा किया गया था।
निरीक्षण के दौरान लिए गए नमूनों की जांच में कीटनाशक मिसब्रांडेड पाया गया। इसके बाद कीटनाशक अधिनियम की धाराओं 29 और 33 के तहत शिकायत दर्ज की गई और विक्रेता सहित संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू हुई। मामले में विक्रेता की ओर से अदालत में राहत की मांग की गई।
सीलबंद पैकिंग को लेकर अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि कीटनाशक के नमूने मूल सीलबंद पैकिंग से लिए गए थे। उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि पैकिंग के साथ छेड़छाड़ की गई थी या विक्रेता के प्रतिष्ठान में कीटनाशक का भंडारण निर्धारित नियमों के विपरीत हुआ था।
अदालत ने मामले के तथ्यों और पूर्व के न्यायिक फैसलों पर विचार करते हुए संबंधित विक्रेता और उसके प्रोपराइटर के खिलाफ दर्ज शिकायत, समन आदेश तथा उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द कर दी।
इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता या लेबलिंग में गड़बड़ी के मामले में विक्रेता की जिम्मेदारी तय करते समय उपलब्ध साक्ष्यों और कानून में दिए गए संरक्षण पर भी विचार करना आवश्यक है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सीलबंद पैकिंग में बेचे गए प्रत्येक अमानक कीटनाशक के मामले में विक्रेता को स्वतः दोषमुक्त कर दिया जाएगा।
कीटनाशक अधिनियम की धारा 30(3) का महत्व
इस मामले में कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 30(3) महत्वपूर्ण रही। इस प्रावधान के तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर विक्रेता अपने बचाव में यह साबित कर सकता है कि उसने कीटनाशक अधिकृत स्रोत से खरीदा था, उचित सावधानी बरतने के बावजूद उसे संबंधित गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी और उसके पास उत्पाद रहने के दौरान उसकी स्थिति तथा भंडारण उचित था।
ऐसे मामलों में खरीद के बिल, अधिकृत आपूर्तिकर्ता का रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, बैच नंबर और भंडारण संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए कृषि आदान व्यापारियों के लिए जरूरी है कि वे अपने कारोबार में पारदर्शिता बनाए रखें और सभी आवश्यक रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखें।
कृषि आदान व्यापारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
कृषि आदान विक्रेता किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यापारियों द्वारा खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता और लेबलिंग में यदि कोई समस्या सामने आती है, तो संबंधित मामले में निर्माता, आपूर्तिकर्ता और विक्रेता की भूमिका तथा कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण तथ्यों और लागू कानून के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला व्यापारियों के लिए इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि सीलबंद पैकिंग में मिले अमानक उत्पाद के मामले में कानूनी जिम्मेदारी तय करते समय केवल व्यापार करने के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हालांकि, प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और राहत का निर्णय संबंधित साक्ष्यों तथा वैधानिक शर्तों पर निर्भर करेगा।
श्री कृष्णा दुबे ने दी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों और क्षेत्रों के कृषि आदान व्यापारियों को बधाई देते हुए इसे व्यापारियों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया।

श्री दुबे ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला कृषि आदान व्यापारियों के लिए राहत देने वाला है। उन्होंने सभी व्यापारियों से अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों से उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान ही विक्रय करें तथा उत्पादों की खरीद, भंडारण और बिक्री से संबंधित नियमों का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थिति का सामना न करना पड़े।
उन्होंने इस फैसले के संदर्भ में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, लीगल एडवाइजर श्री राजेश मलैया (सागर) तथा बैतूल जिले के अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन सहित संबंधित पदाधिकारियों का उल्लेख करते हुए कृषि आदान व्यापारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
व्यापारियों के लिए क्या है संदेश?
हलधर किसान की इस खबर के माध्यम से कृषि आदान व्यापारियों के लिए संदेश है कि वे गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता दें, अधिकृत कंपनियों और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं से ही माल खरीदें तथा प्रत्येक खरीद और बिक्री का उचित रिकॉर्ड रखें। किसानों को सही उत्पाद उपलब्ध कराना व्यापारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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