भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’, 10 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन 49% बढ़ा: शिवराज सिंह चौहान

India will become the worlds ‘food basket

एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कृषि शिक्षा, किसानों की आय और आधुनिक तकनीक पर जोर; फर्जी कृषि डिग्रियों पर रोक के लिए बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल

नई दिल्ली। देश की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत, आधुनिक और किसान-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने कृषि क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों, कृषि शिक्षा की गुणवत्ता, किसानों की आजीविका, आधुनिक तकनीक और कृषि उत्पादों के वैश्विक निर्यात को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपनी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए ‘फूड बास्केट’ बनकर उभरेगा। इसके लिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने और उपज के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।

10 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 49 प्रतिशत की वृद्धि

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने देश की कृषि यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने खाद्यान्न के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। एक समय ऐसा था, जब देश को अपनी खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों से आयातित अनाज पर निर्भर रहना पड़ता था। पीएल-480 कार्यक्रम के तहत अमेरिका से गेहूं आयात करने की स्थिति से निकलकर आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत स्थान बना चुका है। यह उपलब्धि भारतीय किसानों के कठिन परिश्रम, वैज्ञानिकों के अनुसंधान और कृषि क्षेत्र में किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत चावल उत्पादन और निर्यात में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि भारतीय कृषि की बढ़ती क्षमता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में देश की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

श्री चौहान ने कहा कि अब कृषि क्षेत्र के सामने चुनौती केवल अधिक उत्पादन करने की नहीं है। उत्पादित अनाज का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण, बेहतर प्रबंधन, प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि इन व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाता है, तो किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है और कृषि निर्यात को नई गति मिलेगी।

कृषि शिक्षा में गुणवत्ता से समझौता नहीं

कृषि शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बिना आवश्यक मानकों और पर्याप्त सुविधाओं के खुल रहे निजी कृषि महाविद्यालयों तथा फर्जी डिग्रियां देने वाली संस्थाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं के समाधान, वैज्ञानिक अनुसंधान और देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

उन्होंने कहा कि बीएससी कृषि और एमएससी कृषि जैसी तकनीकी डिग्रियां हासिल करने के लिए युवा अपनी मेहनत, समय और धन लगाते हैं। ऐसे में उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और डिग्री का महत्व सुरक्षित रहना चाहिए। किसी भी संस्था को केवल फीस लेकर डिग्रियां बांटने वाली दुकान चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कृषि शिक्षा के नियमन और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए एग्रीकल्चर काउंसिल के गठन की दिशा में कदम उठाने की बात भी उन्होंने कही। इस व्यवस्था का उद्देश्य कृषि शिक्षण संस्थानों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित बनाना है।

छात्रों और विशेषज्ञों के सुझावों से बनेगी कृषि नीति

एग्रीविज़न के राष्ट्रीय अधिवेशन को कृषि क्षेत्र के भविष्य पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए श्री चौहान ने विद्यार्थियों, कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों से अपने अनुभवों तथा सुझावों को खुलकर सामने रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।”

मंत्री ने आश्वासन दिया कि अधिवेशन में सामने आने वाले सुझावों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक योजनाओं में बदलने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक की जाएगी। इस बैठक में अल्पकालीन और दीर्घकालीन योजनाओं पर चर्चा कर उनके क्रियान्वयन की दिशा तय की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती जरूरी

किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्री ने एकीकृत कृषि प्रणाली यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर होने के कारण छोटे और सीमांत किसानों के सामने सीमित भूमि से पर्याप्त आय अर्जित करने की चुनौती है। ऐसी स्थिति में केवल एक फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि किसान अनाज उत्पादन के साथ फल, सब्जियां, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती जैसी गतिविधियों को भी अपनाएं। खेती के इन विभिन्न माध्यमों को जोड़ने से किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिल सकते हैं और फसल खराब होने या बाजार में कीमतें गिरने की स्थिति में आर्थिक नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।

एकीकृत खेती का उद्देश्य उपलब्ध भूमि, पानी, श्रम और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। इसके लिए कृषि विभाग, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण होगी।

एआई, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक से बदलेगी खेती

कृषि के भविष्य पर चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाना समय की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को कृषि क्षेत्र से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से खेती में संसाधनों के उपयोग को बेहतर बनाने, उत्पादन संबंधी निर्णय लेने और कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना होगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसानों के व्यावहारिक अनुभवों को एक साथ लाकर ही खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

एग्रीविज़न के दस वर्षों के सफर पर विशेष पुस्तिका का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीविज़न की दस वर्षों की यात्रा पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सम्मेलन में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, किसान कल्याण और आधुनिक कृषि व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

कुल मिलाकर, एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कृषि क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसानों की आय, कृषि शिक्षा की गुणवत्ता, फसल विविधीकरण, वैज्ञानिक भंडारण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को मजबूत करना आने वाले समय की प्रमुख जरूरतें हैं। यदि इन क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो भारतीय कृषि न केवल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि दुनिया की बढ़ती खाद्य जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगी।

हलधर किसान का दृष्टिकोण: भारत को वैश्विक ‘फूड बास्केट’ बनाने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को लाभकारी मूल्य, बेहतर बाजार, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा और आधुनिक तकनीक का वास्तविक लाभ मिले। किसानों की समृद्धि को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियां ही भारतीय कृषि को आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा सकती हैं।

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