Headlines

51वें स्थापना दिवस पर बड़ा तोहफा: अब मशीन से होगी कपास की तुड़ाई, केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

A big gift on the 51st foundation day Cotton will now be harvested by machine says Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan

हलधर किसान भोपाल | भोपाल स्थित ICAR–केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के 51वें स्थापना दिवस समारोह में देश के केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कपास उत्पादक किसानों को एक ऐतिहासिक सौगात दी। इस अवसर पर वैज्ञानिकों द्वारा विकसित स्वदेशी कपास हार्वेस्टिंग मशीन को उन्होंने औपचारिक रूप से किसानों को समर्पित किया। यह मशीन कपास की तुड़ाई को तेज, सस्ता और श्रम-सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब तक कपास की तुड़ाई पूरी तरह हाथों से की जाती रही है, जिसमें समय, श्रम और लागत तीनों की भारी खपत होती है। वर्षों से किसान स्वदेशी और किफायती मशीन की मांग कर रहे थे। वैज्ञानिकों ने लगभग 15 लाख रुपये की लागत से यह मशीन विकसित कर किसानों की इस पुरानी मांग को साकार कर दिखाया है। इससे न केवल तुड़ाई की गति बढ़ेगी बल्कि उत्पादन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे कपास की खेती अधिक लाभकारी बनेगी।

50 वर्षों का नवाचार और यंत्रीकरण की विरासत

मंत्री ने कहा कि संस्थान का 51वाँ स्थापना दिवस भारतीय कृषि यंत्रीकरण की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। आज खेती केवल हाथों और बैलों के भरोसे नहीं चल सकती। बदलते समय में मशीनों का उपयोग अनिवार्य है और पिछले पाँच दशकों में इस संस्थान ने कृषि यंत्रीकरण को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए किफायती मशीनें विकसित कर संस्थान ने उल्लेखनीय योगदान दिया है।

स्थापना दिवस के अवसर पर नवाचारों की एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जहाँ किसानों को नई तकनीकों और यंत्रों की जानकारी दी गई। यहाँ विकसित मशीनें कृषि यंत्र निर्माताओं के माध्यम से देशभर के किसानों तक पहुँचाई जाती हैं।

किसानों और महिलाओं को मिले आधुनिक उपकरण

समारोह के दौरान किसानों और महिलाओं को मानव-चालित एक कतारी सब्जी ट्रांसप्लांटर, हस्तचालित मक्का शेलर और ऐसी उन्नत दरांती भी वितरित की गई जिन्हें बार-बार धार देने की आवश्यकता नहीं होती। मंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को पत्थर से घिसकर दरांती तेज करने की कठिनाई से मुक्ति मिलेगी। साथ ही किसानों को उन्नत बीज भी वितरित किए गए, ताकि वे बेहतर उत्पादन ले सकें।

उन्होंने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि CIAE ने असंभव को आविष्कार में बदला है। यह अनुसंधान, आत्मनिर्भरता और नवाचार का त्रिवेणी संगम है, जिसने परिश्रम को परिणाम और लागत को लाभ में बदल दिया है।

कपास और फसल विविधता पर जोर

मंत्री श्री चौहान ने कहा कि बदलते फसल चक्र के बीच देश को हर प्रकार की फसल की आवश्यकता है। एक समय भैरूंदा, देवास और खातेगांव जैसे क्षेत्रों में कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन अब अन्य फसलें उसकी जगह ले रही हैं। सोयाबीन की चुनौतियों के बीच मक्का जैसी फसलें उभर रही हैं, पर देश को संतुलित फसल व्यवस्था चाहिए।

कपास की घटती उत्पादकता का बड़ा कारण गुलाबी सुंडी (पिंक बॉल वॉर्म) बताया गया। इससे निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई उन्नत किस्में और हाई-डेंसिटी प्लांटेशन पद्धति को बढ़ावा दे रहा है। मशीन से तुड़ाई होने पर मजदूरी लागत घटेगी और श्रमिकों का जीवन भी आसान होगा।

मशीनों से बढ़ेगी ग्रामीण आय

मंत्री ने बताया कि दाल प्रोसेसिंग जैसी छोटी-छोटी मशीनें गांवों में आनी चाहिए। लगभग ढाई लाख रुपये की लागत वाली दाल मशीन प्रति घंटे 200 किलो दाल तैयार कर सकती है। किसान स्वयं अरहर, चना या मूंग की दाल बनाकर बाजार में बेच सकते हैं। दलहन मिशन सहित कई योजनाओं के तहत 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध है। किसान समूह या स्वयं सहायता समूह मिलकर मशीनें खरीदें, ब्रांडिंग करें और शुद्ध दाल बेचकर आय बढ़ाएं।

अंत में उन्होंने कहा कि मशीनों ने जीवन को बदला है, लेकिन संतुलन जरूरी है। तकनीक का उपयोग हो, पर इंसान मशीन न बने। साथ ही प्राकृतिक खेती, गौमाता और पशुधन को भी खेती की व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।

यह भी पढेंः- बालाघाट में पोषण और प्रगति का महाकुंभ: 8 से 12 फरवरी तक जिला स्तरीय कृषि मेला सह प्रदर्शनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *