कृषि आदान विक्रेता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कलंत्री ने कहा व्यापार हितों के लिए संगठन की एकता जरुरी
हलधर किसान इंदौर। एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश का प्रादेशिक व्यापारी महाअधिवेशन कानपुर के मोती झील मैदान में आयोजित किया गया। प्रदेशभर के कृषि आदान व्यापारियों की मौजूदगी में संगठन एवं व्यापार हितों पर चर्चा के साथ ही कई मुद्दों पर शासन की नीति, नियमों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के लगभग 40 जनपदों के 3000 से अधिक कृषि आदान व्यापारियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य अतिथि के रूप में ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री ने कहा कि व्यापार हितों के लिए संगठन की एकता जरुरी होती है। हमारी एकता ही हमारी ताकत है। देश के विभिन्न राज्यों, जिलों में कृषि आदान विक्रेता संघ के पदाधिकारी, सदस्य कृषि आदान व्यापार हितों के लिए सक्रियता से काम कर रहे है। वर्तमान में सैंपलिंग के नाम पर व्यापारियों को परेशान करने जैसे मामले सामने आ रहे है, जिसके निराकरण के लिए संगठन के माध्यम से देशभर में आंदोलन करेंगे। विशेष अतिथि विधायक आर्यनगर अमिताभ बाजपेयी ने कृषि व्यापारियों को भरोसा दिया कि उत्तर प्रदेश में होने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष अतुल त्रिपाठी के नेतृत्व में उक्त कार्यक्रम में अतिथियों को माल्यार्पण कर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण पटेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खण्डेलवाल, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश प्रभारी संजय रघुवंशी उपस्थित रहे।
ऐसे आयोजनों से बढ़ती है व्यापारिक एकता

जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्णा दुबे ने कानपुर में हुए महाअधिवेशन पर कहा कि यह कृषि व्यापार एवं व्यापारी हितों के लिए अच्छी पहल है। ऐसे आयोजनों से संगठन की विश्वसनीयता और व्यापारियों में निकटता बढ़ती है। यह हम सभी को एक होने का एक विचार रखने का सशक्त माध्यम साबित होगा। श्री दुबे ने आह्वान करते हुए कहा कि हम सिर्फ व्यापार में अपना टर्नओवर और अपना बैंक बैलेंस की तरफ ही ध्यान देकर व्यापार नहीं करें, जिस व्यापार में हम लगे हैं, उसके नियम कानून की जानकारी हमको होना चाहिए ताकि विभाग का कोई अधिकारी हमारे यहां पर निरीक्षण के लिए आए तो हम भी उसको बता सके कि नियम कानून एक्ट धारा क्या है? क्योंकि अब समय आ गया है जागरूक रहने का और जागरूक करने का।
इन मांगों पर बनी सहमति
सम्मेलन के दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की गई है कि खाद, बिज एवं कीटनाशक के मूल रूप से पेकिंग का सेम्पलिंग फेल होने पर निर्माता कंपनी पर कार्यवाही की जावे और व्यापारी को गवाह के रूप में पेश किया जावे।
- खाद पर डीलर मार्जिन 5 से 7 प्रतिशत किया जावे।
- एक बार लायसेंस लेने के बाद कम्पनियों के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोडऩे की आवश्यकता बन्द की जावे।
- विक्रेता की मृत्यु होने पर उसके नजदीकी रिश्तेदार के नाम से लायसेंस ट्रांसफर किया जावे।
- पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल को स्थगित किया जावे।
- साथ ही प्रदेश में ‘प्रत्येक जनपद में एक गांव जैविक गाँव’ अभियान की शुरुआत भी की गई।
