हलधर किसान वारासिवनी। जिले के किसानों को कृषि विभाग ने सलाह दी है कि धान की खड़ी फसल में नत्रजन की पूर्ति हेतु यूरिया का छिड़काव करें। इस दौरान किसानों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि खड़ी फसल में डीएपी एवं एनपीके उर्वरक का उपयोग नहीं करना चाहिए।
दरअसल, वारासिवनी विकासखंड के विभिन्न ग्रामों—ग्राम लडसड़ा के कृषक श्री थमन चौरागड़े, ग्राम दीनी के श्री जीवनलाल कृभालकार, ग्राम उमरवाड़ा के श्री हेमराज राणा एवं ग्राम नगझर के श्री श्यामराज पटले ने 1 से 4 अगस्त 2025 के बीच शिकायत की थी कि एनपीके 20:20:00:13 खाद खेत के पानी में तैर रही है और घुल नहीं रही है।
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखी गई और किसानों से चर्चा की गई। पाया गया कि खाद 24 से 48 घंटे में पानी में बैठकर घुलने लगी थी। किसानों को समझाइश के बाद वे संतुष्ट हो गए। इसके साथ ही सहकारी समिति दीनी से खाद का नमूना लेकर 3 अगस्त को प्रयोगशाला जांच हेतु भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आना शेष है।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने किसानों को सलाह दी है कि—
- धान की फसल में नत्रजन (80-100 किग्रा/हे.) का आधा भाग, फॉस्फोरस (50-60 किग्रा/हे.) और पोटाश (40 किग्रा/हे.) खेत की तैयारी के समय ही देना चाहिए।
- रोपाई के 3 सप्ताह बाद (कल्ले निकलने की अवस्था पर),
5-6 सप्ताह बाद (बूटिंग अवस्था पर),
तथा 7-8 सप्ताह बाद (अंतिम टॉप ड्रेसिंग में) नत्रजन देना आवश्यक है। - खड़ी फसल में डीएपी एवं एनपीके नहीं डालें, क्योंकि इन उर्वरकों का फॉस्फोरस जड़ों तक नहीं पहुंच पाता और यह महंगे भी होते हैं।
- फॉस्फोरस की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग खेत की तैयारी के समय करना चाहिए।
- खड़ी फसल में आवश्यकता पड़ने पर पानी में घुलनशील एनपीके, नैनो डीएपी और तरल उर्वरकों का स्प्रे किया जा सकता है।
- नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए किसान यूरिया अथवा नैनो यूरिया का छिड़काव करें।
👉 कृषि विभाग ने किसानों को साफ संदेश दिया है कि उचित समय पर सही उर्वरक का प्रयोग करने से ही धान की फसल से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
