हलधर किसान, बालाघाट। जिले के किसानों और आम नागरिकों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है जिला स्तरीय कृषि मेला सह प्रदर्शनी, जो 8 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक कमला नेहरू सामुदायिक भवन, सर्किट हाउस रोड, बालाघाट में आयोजित किया जा रहा है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, बालाघाट के तत्वावधान में आयोजित इस पांच दिवसीय भव्य आयोजन का उद्देश्य जिले के किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ना, पोषण युक्त आहार के प्रति जागरूक करना तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। यह प्रदर्शनी प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात्रि 9 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय के अनुसार इस आयोजन का मुख्य फोकस “श्रीअन्न” यानी मिलेट्स, तिलहन फसलें तथा बालाघाट की विशिष्ट पहचान “बालाघाट चिन्नौर” चावल को जन-जन तक पहुंचाना है। बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के दौर में मोटे अनाजों का महत्व फिर से सामने आ रहा है। कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे अनाज न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि किसानों के लिए भी कम लागत और अधिक टिकाऊ खेती का आधार बन सकते हैं। इसी सोच के साथ यह मेला जिले के किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को जोड़ने का कार्य करेगा।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण रहेगा “मिलेट्स रोड शो”, जिसमें मोटे अनाजों से बने विभिन्न व्यंजन और खाद्य उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। लोग यहां इन उत्पादों को देखकर, समझकर और चखकर उनके पोषण गुणों से परिचित हो सकेंगे। यह पहल खास तौर पर शहरी और ग्रामीण परिवारों को अपने दैनिक भोजन में मिलेट्स को शामिल करने के लिए प्रेरित करेगी, जिससे स्वास्थ्य में सुधार और पोषण सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
“एक जिला–एक उत्पाद” योजना के अंतर्गत बालाघाट के प्रसिद्ध चिन्नौर चावल का भी विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। अपनी सुगंध और गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला यह चावल जिले की पहचान है। मेले में इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी जानकारियां भी दी जाएंगी, ताकि किसान इस परंपरागत फसल से अधिक लाभ कमा सकें।
इसके साथ ही मेले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उन्नत विधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ना आज की आवश्यकता बन चुकी है। यहां किसानों को जैविक खाद, कीट नियंत्रण के प्राकृतिक उपाय, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और टिकाऊ खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। तिलहन प्रसंस्करण इकाइयों, कच्ची घानी तेल निर्माण की प्रक्रिया और आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी भी इस प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगी।
पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले में कृषक–वैज्ञानिक संगोष्ठियों का आयोजन भी किया जाएगा। देश और प्रदेश के कृषि विशेषज्ञ किसानों को उन्नत बीज, फसल प्रबंधन, नई तकनीक, रोग नियंत्रण और बाजार से जुड़ी व्यवहारिक जानकारियां देंगे। इससे किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि वे अपनी उपज को बेहतर दाम पर बेचने के लिए भी तैयार हो सकेंगे।
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने जिले के सभी किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, कृषि उद्यमियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस कृषि मेला सह प्रदर्शनी में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। मोटे अनाज, जैविक खेती, चिन्नौर चावल और कच्ची घानी तेल जैसे उत्पादों को अपनाकर न केवल अपनी सेहत सुधारें, बल्कि स्थानीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दें।
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