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भारतीय किसान संघ की बैठक में MSP, बीमा और केसीसी पर बड़ा मंथन”

Big brainstorming on MSP Insurance and KCC in the meeting of Bharatiya Kisan Sangh

हलधर किसान टोंक (राजस्थान) | किसानों के अधिकारों, उनकी उपज की न्यायोचित कीमत और सरकारी योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला टोंक की मासिक बैठक आज कृषि उपज मंडी समिति टोंक के मीटिंग हॉल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में जिले भर से आए किसान प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने एकजुट होकर किसानों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर गहन मंथन किया तथा समाधान की दिशा में ठोस मांगें रखीं।

बैठक का मुख्य विषय समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद रहा। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है तो किसानों को उनकी फसल उसी दर पर बिकने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। किसानों ने यह भी मांग उठाई कि मंडी परिसर में केवल सरकारी एजेंसियों ही नहीं, बल्कि एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन), सरकारी समितियों एवं अन्य अधिकृत संगठनों को भी समर्थन मूल्य पर खरीद करने का अधिकार दिया जाए, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़े और किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।

बैठक में फसल बीमा योजना के तहत रोके गए क्लेम का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया गया। कई किसानों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा और फसल खराब होने के बावजूद उनके बीमा क्लेम महीनों से लंबित हैं या अनुचित कारणों से रोके गए हैं। इस पर किसानों ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि फसल बीमा योजना का उद्देश्य संकट की घड़ी में किसानों को राहत देना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था किसानों को और अधिक परेशान कर रही है।

इसी प्रकार, बैंकों द्वारा केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन पर मिलने वाली सब्सिडी में हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आईं। किसानों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में बैंक किसान को मिलने वाली पूरी सब्सिडी नहीं दे रहे या अनावश्यक कटौतियाँ कर रहे हैं। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस गंभीर विषय को जिला प्रशासन एवं संबंधित उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा ताकि किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जा सके।

बैठक के अंतिम सत्र में कृषि उपज मंडी समिति टोंक के सचिव ने किसानों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई (PMFME) योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत किसान और ग्रामीण उद्यमी अपने स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित कर सकते हैं, जिनमें सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन, बैंक लोन, सब्सिडी तथा उत्पाद की ब्रांडिंग में भी सहयोग दिया जाता है। इससे किसानों को अपनी उपज का मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर बेहतर आमदनी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

बैठक में संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें संभाग अध्यक्ष पोखर लाल जाट, जिला अध्यक्ष रमेश चंद जाट, जिला मंत्री विनय सिंह ताखर, जिला सहमंत्री रामगोपाल चौधरी, जिला उपाध्यक्ष प्रभु लाल मीणा, जिला महिला प्रमुख श्रीमती रजनी सिंह, पीपलू तहसील अध्यक्ष रामजीवन चौधरी, टोडारायसिंह अध्यक्ष जगदीश घटाला, बरवास उपतहसील अध्यक्ष कान शंकर चौधरी, उनियारा तहसील अध्यक्ष निम लाल गुर्जर, तहसील मंत्री शिवजी लाल मीणा, भंवरलाल जाट, कुहाड़ा बुजुर्ग के बाबूलाल जाट, मदन लाल जाट, मीरनगर के लक्ष्मीनारायण जांगिड़, सांखना टोंक के संतराम, मुकेश छान सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज किसान अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है—चाहे वह फसल का सही मूल्य हो, बीमा क्लेम की दिक्कतें हों या बैंकिंग प्रणाली की जटिलताएँ। ऐसे में भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो किसानों की आवाज़ को संगठित कर सरकार तक पहुँचाने का कार्य करते हैं।

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि किसान अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहेंगे और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संगठनात्मक रूप से संघर्ष जारी रहेगा। हलधर किसान के माध्यम से यह आवाज़ अब और भी व्यापक रूप से प्रदेश व देश तक पहुँचेगी, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के साथ हो सके।

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