हलधर किसान भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों को उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार रहेगा। यदि किसी जिले में वितरण व्यवस्था में अव्यवस्था पाई जाती है तो उसके लिए संबंधित जिला कलेक्टर उत्तरदायी होंगे। मुख्यमंत्री ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से बाढ़ एवं अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और उर्वरक वितरण व्यवस्था की वर्चुअल समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभी जिलों के कलेक्टर और संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
किसानों से संवाद बनाए जिला प्रशासन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि उर्वरक वितरण व्यवस्था में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाए और उनसे लगातार संवाद बनाए रखा जाए। जिले में उपलब्ध उर्वरकों के वास्तविक स्टॉक की जानकारी जनप्रतिनिधियों और किसानों से साझा की जाए। साथ ही पैक्स, सहकारी संस्थाओं और निजी विक्रय केन्द्रों का आकस्मिक सत्यापन एवं मॉनिटरिंग अनिवार्य रूप से की जाए।
अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई
बैठक में बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी और अवैध भंडारण-परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक 53 एफ.आई.आर दर्ज की गई हैं, 88 लाइसेंस निरस्त और 102 निलंबित किए गए हैं। 406 विक्रेताओं पर विक्रय प्रतिबंध की कार्यवाही भी की गई है।
वितरण व्यवस्था में नवाचार
दमोह जिले में टोकन वितरण और उर्वरक वितरण की प्रक्रिया अलग-अलग कर दी गई है। टोकन तहसील कार्यालय से दिए जा रहे हैं, जबकि उर्वरक विक्रय केन्द्रों से वितरित हो रहा है। वहीं जबलपुर जिले में किसानों को टोकन फोन कॉल के माध्यम से दिए जा रहे हैं और वितरण केन्द्रों पर डिस्प्ले बोर्ड के जरिए टोकन नंबर व उपलब्ध उर्वरक की जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार के नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।
अतिवृष्टि एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ और भारी वर्षा से जनहानि या पशुहानि हुई है, वहां 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। प्रभावित क्षेत्रों में अस्थाई कैंप, राशन और भोजन वितरण की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित हो। साथ ही पुलिस प्रशासन सतर्क रहकर पुल-पुलियों पर बैरिकेटिंग और चेतावनी की व्यवस्था करे।
औसत से 21% अधिक वर्षा
बैठक में बताया गया कि 1 जून से 2 सितंबर तक प्रदेश में 971.5 मिमी (38.24 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इनमें गुना, मंडला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर जिलों में सबसे ज्यादा बारिश हुई।
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