निरंजनलाल अग्रवाल फाउंडेशन ने तीन ब्लॉकों में किया कपास प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन
हलधर किसान खरगोन। कपास की खेती में बेहतर एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादन दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत निरंजनलाल अग्रवाल फांउेडशन ने जिले के 3 ब्लॉकों में प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में दिल्ली के विशेषज्ञों ने खेतों में पहुंचकर कपास फसलों का निरीक्षण कर, किसानों को वर्तमान में की जा रही कपास खेती में अमूलचूल परिवर्तन कर बेहतर उत्पादन के आसान और सरल उपाय बताए।

निरंजनलाल अग्रवाल फाउंडेशन के डायरेक्टर प्रितेश अग्रवाल ने बताया कि भीकनगांव, गोगावां और सेगांव ब्लॉक के ग्राम गोपालपुरा, भोपाडा, सुंदरेल, मालखेडा, देवली, डालकी में आयोजित शिविरों में दिल्ली की बीटल रीजन संस्था के राजीव बरुहा, केविन सदारिया शामिल रहे।
श्री बरुहा ने सघन खेती (एचडीपीएस/ सीएस) की जानकारी देते हुए पैदावार कैसे बड़ाए, नई तकनीको, बीज की वैरायटी चयन, कम डोरा कोल्पा, अंतर्वर्ती फसल, बॉर्डर फसल, रासायनिक दवाईयों का किस तरह उपयोग करें आदि की जानकारी विस्तार से दी।
उत्पादन बढ़ाना है, तो बढ़ाना होगी पौधों की संख्या
श्री राजीव ने कृषि लागत कम या आवश्यकतानुसार करने के तरीके साझा किये। उन्होंने कहा की यदि कपास का प्रति एकड़ कपास का उत्पादन बढ़ाना है, तो हमें प्रति एकड़ कपास की फसल में पौधों की संख्या बढ़ाना होगी। किसान अपनी जमीन अनुसार यदि हल्की, भूरि, लाल मिट्टी हो तो कपास फसल 90 सेंटीमीटर लाइन से लाइन की दुरी और पौधे से पौधे की दुरी 15 सेंटीमीटर रखने पर, प्रति एकड़ में लगभग 29000 पौधे लगाए जा सकते है। पौध संख्या पडऩे से उत्पादन भी बढ़ेगा।
इस दौरान प्रोग्राम लीडर मुकेशसिंह चौहान, क्लस्टर मैनेजर रविंद्र यादव, शेलेंद्र बिरला ने सभी किसानों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
यह भी पढेंः- सोयाबीन के साथ ज्वार, मक्का और मूंगफली की खेती के लिए भी किसानों को करें प्रेरित: उपसंचालक तोमर
