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“बीजों की ई-मार्केटिंग” – बीज कानून पाठशाला – 36

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हलधर किसान इंदौर। बीज धरा की जान है अतः जान को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिये भारत सरकार ने बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 बनाया। इस मूल्यवान धरा आदान को सरकार सुरक्षित हाथों से वितरण कराती है। बीज अधिनियम के तहत बीज विक्रय हेतु लाइसैंस प्रथा नहीं थी। बीज नियन्त्रण आदेश 1983 में धारा-3 में बताया कि बीज विक्रय लाइसैंस लेकर हो सकेगा।

  1. बीज डीलर की परिभाषा :- बीज नियन्त्रण आदेश 1983 में धारा-2 (e) में विक्रेता को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है:-

“A dealer means a person carrying on the business of Selling. Exporting or Importing Seeds and including an agent of dealer”

इस परिभाषा के अनुसार कोई व्यक्ति और उसका Agent अभिकर्त्ता बीजों का विक्रय निर्यात आयात करता है वह विक्रेता कहलाएगा साथ ही उसका एजेन्ट भी डीलर माना जायेगा। कीटनाशी अधिनियम-1968, उर्वरक नियन्त्रण आदेश 1985 से हट कर बीज कानूनों में होल सेल, खुदरा जिला, राज्य विक्रेताओं को परिभाषित नहीं किया गया है। बीज नियन्त्रण आदेश में तो बीज वितरक शब्द भी नहीं था यह प्रस्तावित बीज अधिनियम में रखा गया है।

  1. डीलर की संशोधित परिभाषा :- भारत सरकार ने अपनी अधिसूचना GST 214 (E) दिनांक 2 जून 2017 को डीलर की परिभाषा संशोधित करते हुए Including as agent of Dealer की जगह Including E-marketer, an agent of Dealer & E-marketer. अब बीज संघ E-marketing का विरोध कर रहे हैं और उत्पादक कम्पनियों पर दबाव डालकर E-Marketer को आपूर्ति न करने की कौशिश कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने अपने पत्र ADO P.P.-IV 1256 दिनांक 23.01.2026 के द्वारा ई-मार्केटिंग को रोकने के लिये एक अभियान चलाया है। इसका विरोध तो E-Marketing की नोटीफिकेशन 2 जून 2017 को ही भारत सरकार पर दबाव देकर ई-मार्केटिंग को डीलर की परिभाषा में से हटवाते/टहनी पत्तियाँ झांगने से बेहतर जड़ ही उखाड़ी जाए।
  1. उपभोक्ता अधिनियम एवं ई-मार्केटिंग :- उपभोक्ता अधिनियम 2019 की धारा-2 (16) में सभी E-Commerce को सम्मलित किया गया है साथ ही भारत सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) Rule 2020 भी रचित कर दिये हैं।

4. ई-मार्केटिंग की हानियाँ :- किसानों द्वारा ई-मार्केटिंग के माध्यम से बीज खरीदारी करने के निम्न हानियाँ हैं :-

(i) भौतिक निरीक्षण किसान बीज क्रय करते समय बीज को भौतिक रूप से चैक नहीं कर पाता अतः उसकी भौतिक शुद्धता घुन लगा, बदरंग, भीगा हुआ, कटा-फटा बीज नहीं देख पाता है।

(ii) अंकुरण में धोखाधड़ी साधारणतया शिकायत मिलती है कि ई-मार्केटिंग के माध्यम से मंगाये बीज उगे नहीं अतः किसान धोखा खा जाता है।
(iii) गलत लैबलिंग ई-मार्केटिंग से मंगाई गई प्रजाति की शंका रहती है मंगाया गया बीज वाच्छित प्रजाति का है या नहीं।
(iv) कृषक विक्रेता के सम्बन्ध इस विधि से व्यापार के कारण कृषक-विक्रेता का अटूट बंधन दरक रहा है। कृषक-व्यापारी केवल व्यापार में ही सांझीदार नहीं होता बल्कि एक-दूसरे के दुख, मांगलिक कार्यों विवाह, सन्तान उत्पत्ति, घर सम्पत्ति खरीदने, बच्चों की शिक्षा में भी एक-दूसरे के कार्यक्रमों में भी हिस्सेदार होते थे यह व्यवस्था टूट रही है।(v) बीज विक्रेताओं का व्यवसाय प्रभावित किसानो को ई-मार्केटिंग के द्वारा कोई विशेष लाभ नहीं है परन्तु स्थानीय व्यापारियों का व्यपार घट रहा है।

(vi) बीज की शिकायत :- बीज गुणहीन होने पर शिकायत कहाँ करें और किसान क्षतिपूर्ति कैसे लें।

5. बीज विधेयक 2025 :- बीज विधेयक 2025 में डीलर की परिभाषा बीज नियन्त्रण आदेश-1983 जैसी है तथा उसमें E-Marketing का उल्लेख नहीं है। अतः अब बीज व्यापारी संघों को प्रयास करने चाहिए कि नये बीज अधिनियम में शब्द E-Marketing, Telli-Marketing, E-Commerce जैसे शब्द न जोड़ दिया जाए।
जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिलाध्यक्ष श्री दुबे की प्रतिक्रिया

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हमारे देश के प्रदेश के समस्त कृषि आदान व्यापारी साथियों आप सभी को ज्ञात होगा कि हमारा राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन नई दिल्ली के द्वारा पिछले 4 वर्षों से हमारे कृषि आदान व्यापार में ऑनलाइन व्यापार करने वाली जो कंपनियां है उनके लिए हमने संगठन लेवल पर मुद्दा उठाया था और केंद्रीय कृषि मंत्रालय से लेकर जो विभाग के संबंधित बड़े अधिकारी हैं उन सब को यह ऑनलाइन कृषि आदान व्यापार से होने वाले नुकसान के बारे में बताया था साथियों हमारे कृषि आदान व्यापार में यह ऑनलाइन वाला जो मामला है यह किसी भी कीमत पर सक्सेस नहीं है और ना ही होगा क्योंकि हमारा जो कृषि आदान है हमारा ग्राहक हमारे प्रतिष्ठान पर आता है वह अपने पसंद की कंपनी का कृषि आदान बीज दवाई या खाद जो भी मांगता है वह हम उसको देते हैं वह बीज का पैकेट हो या कीटनाशक दवाई की बोतल हो उसको अच्छे से देख ता है समझता है और उसके बाद फिर निर्णय लेता है अब यह ऑनलाइन वाले व्यापार में जो ऑनलाइन सप्लाई होता है इसमें वह क्या देखेगा जो ऑनलाइन वाले बंदे ने दे दिया वह दे दिया अब वह सही है कि गलत है उसके परिणाम विपरीत आते हैं तो उसका जिम्मेदार कौन इसके अलावा भी पिछले कई मामलों में देखा गया है यह कुछ किसान भाइयों ने और व्यापारी बंधुओ ने ऑनलाइन कंपनियों से कृषि आदान खरीदा या बुलवाया तो उनको सही कृषि आदान नहीं मिला कुछ लोगों को तो डुप्लीकेट मैटेरियल सप्लाई किया गया जिसका की ना कोई बिल होता है ना बेच नंबर होता है ना लाट नंबर होता है और आगे जाकर यह स्थिति और बिगड़ने वाली है हम केंद्रीय कृषि मंत्रालय से बार-बार इस बात को लेकर आगाह कर रहे हैं अभी फिर एक बार हम यह बताना चाहते हैं अभी हाल ही में हमारे केंद्रीय कृषि मंत्री महोदय ने बीज विधेयक 2025 लाया है इसमें से ऑनलाइन व्यापार वाली कंपनियों को अलग करना ही होगा नहीं तो यह कृषि आदान का जो व्यापार है यह तो चौपट होगा ही उसके साथ-साथ किसान भाइयों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा संगठन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है लेकिन ऊपर जो जिम्मेदार लोग हैं उनको भी इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित निर्णय लेना होगा श्री कृष्णा दुबे उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल l

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लेखक- आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन”, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)

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