हलधर किसान नई दिल्ली | देश में मिट्टी की गिरती सेहत और यूरिया के असंतुलित उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने अब युवाओं को इस अभियान की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने का निर्णय लिया है। उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि टिकाऊ कृषि और स्वस्थ मिट्टी के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को जमीनी स्तर पर लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इसी कड़ी में उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से Hindustan Urvarak & Rasayan Limited (HURL) और Rashtriya Chemicals & Fertilizers Limited (RCF) में कार्यरत लगभग 100 कृषि स्नातकों से विस्तृत संवाद किया। बैठक का मुख्य फोकस खेतों में यूरिया के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ रहे प्रभावों का आकलन करना था।

मिट्टी की सेहत पर गंभीर चिंता
बैठक में कृषि स्नातकों से पूछा गया कि क्या यूरिया के असंतुलित उपयोग से मिट्टी में सूक्ष्म एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी बढ़ रही है। साथ ही, मिट्टी में कार्बन की घटती मात्रा और भूमि की कठोरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता पर विपरीत असर पड़ सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) को बढ़ावा देना ही मिट्टी में नई जान फूंकने का रास्ता है।” इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद का संतुलित उपयोग आवश्यक बताया गया।

‘किसान हमारे वीआईपी हैं’
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन ‘किसान हमारे वीआईपी हैं’ का उल्लेख करते हुए सचिव ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें वैज्ञानिक जानकारी से सशक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सरकार, कंपनियों और किसानों के बीच सबसे मजबूत संवाद कड़ी हैं।
सचिव ने बताया कि विभाग अब तक 8 पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं से भी मिट्टी संरक्षण और जैविक खेती को लेकर चर्चा कर चुका है। साथ ही कृषि स्नातकों को निर्देश दिया गया कि वे जैविक खेती अपनाने वाले किसानों की सफलता की कहानियां तैयार करें, ताकि अन्य किसान भी प्रेरित हों।
जैविक खेती और सामुदायिक भागीदारी पर जोर
बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि वर्मीकम्पोस्ट जैसी योजनाओं की जानकारी स्वयं सहायता समूहों, ‘लखपति दीदी’ और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से घर-घर पहुंचाई जा सकती है। ग्रामीण और ब्लॉक स्तर पर कार्यरत युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन में वृद्धि के साथ मिट्टी की संरचना में भी सुधार देखा गया है।
गोरखपुर के कृषि स्नातक अवधेश सिंह ने खेतों में किए गए प्रयोगों का उदाहरण देते हुए बताया कि संतुलित उर्वरकों और जैविक विकल्पों के प्रयोग से न केवल पैदावार बढ़ी, बल्कि मिट्टी की नमी धारण क्षमता भी बेहतर हुई।
नीति और जमीनी हकीकत का संगम
इस अहम बैठक में उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ HURL और RCF के शीर्ष प्रबंधन भी मौजूद रहे। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जमीनी स्तर से प्राप्त फीडबैक को भविष्य की नीतियों में शामिल किया जाएगा।
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