राजस्थान में बीज गुणवत्ता जांच के नतीजों से मचा हड़कंप, अमानक बीज बेचने वाली फर्मों पर मुकदमे और लाइसेंस निरस्तीकरण की तैयारी; कृषि आदान विक्रेता संघ ने व्यापारियों से जांच-परखकर बीज खरीदने की अपील की
हलधर किसान | जयपुर। किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी का भरोसा देकर बाजार में बेचे जा रहे बीजों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान में मूंगफली के उन्नत बीजों के नाम पर कथित रूप से सामान्य दाने बेचने का मामला सामने आया है। कृषि विभाग की ग्रो आउट टेस्ट जांच में 15 नमूनों में से 14 नमूने आनुवंशिक शुद्धता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस खुलासे ने न केवल किसानों की आर्थिक सुरक्षा, बल्कि कृषि आदान व्यापार की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
कृषि क्षेत्र में बीज की गुणवत्ता सीधे तौर पर फसल के उत्पादन, किसान की लागत और उसकी आय को प्रभावित करती है। ऐसे में यदि पैकेट पर उन्नत किस्म का नाम दर्ज हो, लेकिन उसके भीतर मौजूद बीज अपेक्षित किस्म की आनुवंशिक शुद्धता पर खरा न उतरे, तो इसका खामियाजा अंततः किसान को भुगतना पड़ता है। फसल में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर किसान की मेहनत, समय और पूंजी तीनों प्रभावित होते हैं।
15 में से 14 नमूने जांच में असफल
प्राप्त समाचार के अनुसार, राजस्थान कृषि विभाग की जांच में जीजी-10, आरजी-510, टीजी-37 ए, टीजीवी-24 और आरजी-578 जैसी किस्मों से संबंधित कुल 15 नमूने शामिल किए गए। इन नमूनों को उगाकर चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने पौधों की पहचान और आनुवंशिक शुद्धता का परीक्षण किया। इसके लिए उगाए गए पौधों की विशेषताओं की तुलना प्रमाणित संदर्भ किस्मों से की गई।
जांच के परिणाम चौंकाने वाले रहे। कुल 15 नमूनों में से 14 नमूने निर्धारित आनुवंशिक शुद्धता के मानकों पर विफल पाए गए, जबकि केवल एक नमूना मानकों के अनुरूप मिला। इन परिणामों ने बीज की गुणवत्ता और बाजार में उपलब्ध किस्मों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जांच से पहले ही बड़ी मात्रा में मूंगफली के बीज किसानों तक पहुंच चुके होने की बात सामने आई है। यदि किसानों को उन्नत किस्म के नाम पर अपेक्षित गुणवत्ता वाला बीज नहीं मिला, तो उन्हें उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, प्रभावित किसानों की वास्तविक संख्या और नुकसान का आधिकारिक आकलन सामने आना अभी आवश्यक है।
कृषि मंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा और गुणवत्ताहीन बीज बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। समाचार के अनुसार, संबंधित फर्मों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने और उनके लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की तैयारी है।
इस मामले में प्रभावी कार्रवाई केवल संबंधित फर्मों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली पूरी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में जांच, दोषियों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई के साथ प्रभावित किसानों की शिकायतों के समाधान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कृषि आदान विक्रेताओं की विश्वसनीयता भी दांव पर
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कृषि आदान क्षेत्र से जुड़े श्री कृष्णा दुबे ने कहा कि यदि बीज निर्माता कंपनियां कृषि आदान विक्रेताओं को उन्नत किस्म और उच्च गुणवत्ता का भरोसा देकर अमानक बीज उपलब्ध कराती हैं, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव विक्रेताओं की प्रतिष्ठा और व्यापारिक विश्वसनीयता पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कृषि आदान विक्रेता किसानों और निर्माता कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसान अपनी जरूरत और भरोसे के आधार पर स्थानीय दुकानदार से बीज खरीदता है। ऐसे में बीज की गुणवत्ता खराब निकलने पर सबसे पहले सवाल संबंधित विक्रेता पर उठते हैं, जबकि उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और उसके निर्माण की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच भी जरूरी है।
श्री दुबे ने कृषि आदान व्यापारियों से अपील की कि वे बीज, कीटनाशक, जैविक खाद और रासायनिक उर्वरक सहित सभी कृषि आदानों की खरीद करते समय संबंधित कंपनी की साख, उत्पाद की गुणवत्ता, आवश्यक दस्तावेजों और प्रमाणिकता की उचित जांच करें। केवल आकर्षक पैकिंग, बड़े-बड़े दावों या कम कीमत के आधार पर व्यापारिक निर्णय लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
निर्माता कंपनियों के पंजीकरण की उठी मांग
श्री दुबे ने बताया कि कृषि आदान क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहले भी यह सुझाव दिया गया है कि राज्य में कृषि आदानों की आपूर्ति करने वाली निर्माता कंपनियों का व्यवस्थित पंजीकरण होना चाहिए। इसके अंतर्गत कंपनियों के आवश्यक कानूनी दस्तावेज, निदेशकों, साझेदारों, प्रबंध निदेशकों और महाप्रबंधकों का विवरण तथा गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध रहनी चाहिए।
उनके अनुसार, कई बार अमानक उत्पादों से जुड़ी शिकायत या कानूनी कार्रवाई सामने आने पर संबंधित कंपनी अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती। इससे कृषि आदान विक्रेताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि निर्माता कंपनियों का सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध हो, तो शिकायत की स्थिति में जिम्मेदारी निर्धारित करने और संबंधित पक्ष तक पहुंचने में सहायता मिल सकती है।
देशभर के व्यापारियों को सतर्क रहने की अपील
इस मामले की जानकारी राजस्थान कृषि आदान विक्रेता संघ के अध्यक्ष एवं एआईडीए के राष्ट्रीय पदाधिकारी श्री पुरुषोत्तम खंडेलवाल के माध्यम से प्राप्त होने की बात बताते हुए कृषि आदान व्यापारियों से देशभर में सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
कृषि आदान विक्रेता संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के व्यापारियों से कहा है कि वे किसी भी कंपनी से कृषि आदान खरीदने से पहले उसकी विश्वसनीयता और उत्पाद की गुणवत्ता की पड़ताल करें।
इस अपील में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, लीगल एडवाइजर श्री राजेश मलैया तथा राष्ट्रीय संगठन के सदस्य श्री प्रकाश जैन सहित अन्य पदाधिकारियों के नामों का उल्लेख किया गया है।
गुणवत्ता और जवाबदेही से ही बचेगा किसान
मूंगफली के बीजों की जांच से सामने आया यह मामला कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना, निर्माता कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और कृषि आदान व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

कृषि आदान विक्रेताओं को भी दस्तावेजों, बिलों, बैच विवरण और उपलब्ध गुणवत्ता प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए तथा संदिग्ध उत्पादों के संबंध में संबंधित विभाग से जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही, किसानों को बीज खरीदते समय पक्का बिल लेने और पैकेट पर दर्ज किस्म, बैच नंबर, वैधता तथा अन्य विवरणों की जांच करने के लिए जागरूक करना आवश्यक है।
स्पष्ट है कि किसान के हितों की रक्षा के लिए केवल अमानक बीजों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। बीज की गुणवत्ता से लेकर उसकी आपूर्ति और बिक्री तक जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि किसान की मेहनत सुरक्षित रहे और ईमानदारी से व्यापार करने वाले कृषि आदान विक्रेताओं की प्रतिष्ठा भी बनी रहे।
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