सोयाबीन से हटा किसानों का मोह, कपास और मक्का पर जताया भरोसा

Farmers lost interest in soybean expressed trust in cotton and maize

खरीफ सीजन में कृषि विभाग ने तय किया 4 लाख 20 हजार 170 हेक्टेयर बुआई का लक्ष्य

हलधर किसान खरगोन। मानसून आने से पहले किसान सक्रिय हो गए है। खेत तैयार होकर बुआई की तैयारी भी अंतिम दौर में पहुंच गई है। किसानों ने खाद- बीज के साथ खेतों की हलाई- जुताई कर ली है।  अब बुआई में फसल की पसंद पर नजर डालें तो कृषि विभाग के लक्ष्य अनुसार इस साल सोयाबीन में रूचि न लेते हुए कपास और मक्का में रूचि ले रहे है, जिससे कृषि विभाग ने अपने प्रस्तावित लक्ष्य सोयाबीन फसल के रकबे में 12 हजार हेक्टेयर की कमी दर्ज करते हुए मक्का के रकबे में 4 हजार और कपास के रकबे में 5 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी की है।  
उल्लेखनीय है कि जिले में आज से पांच से साल पहले यह स्थिति थी कि खरीफ सीजन में किसान सबसे ज्यादा किसान सोयाबीन की फसल करते थे, इसे निमाड़ में पीला सोने के नाम से पहचान मिली थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई है सोयाबीन की तुलना में दूसरी फसलें किसानों को अधिक मुनाफा दे रही है, इसीलिए जिले के अधिकांश किसान कपास और मक्का की खेती करने लगे हैं। किसानों की मानें तो सोयाबीन पर अतिवृष्टि व कीट का प्रकोप अधिक होता है, इस कारण भी सोयाबीन का रकबा हर साल घटता जा रहा है। केवल सोयाबीन ही नहीं, बल्कि ज्वार, बाजरा और तिल्ली जैसी फसलें भी खेतों में कम दिखाई दे रही है।

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खाद-बीज की बढ़ी मांग

इधर व्यापारी खाद.बीज की दुकानें सजाकर बैठे हैं तो किसान भी अपने खेतों की तैयार कर चुके है, ताकि समय पर बोवनी आरंभ हो जाए। अब किसानों को मानसून आने का इंतजार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि जिले में मानूसन 20 जून के बाद आएगा। वर्तमान में इतनी वर्षा नहीं हुई है कि अभी बोवनी की जाए। किसान इस बात का ध्यान रखें कि 100 मिमी या 4 इंच बारिश होने पर ही  बुवाई करें।  यूरिया की किल्लत के बीच किसान खरीफ फसलों का अच्छा उत्पादन के लिए खेतों में जैविक खाद डाल रहे है।  

जिले में यह रहेगा रकबा

कृषि विभाग के अनुसार अनुसार जिले में इस साल कपास का रकबा 1 लाख 90 हजार हेक्टेयर प्रस्तावित किया गया है। इसकी बुआई गर्मी याने मई माह के दौरान ही शुरु हो जाती है। अब तक जिले में 70 प्रतिशत से अधिक कपास की बोवनी हो चुकी है।  वहीं 1 लाख हेक्टेयर में सोयाबनी की बोवनी प्रस्तावित की है। जबकि गत वर्ष 1 लाख 12 हजार 555 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी।  मक्का फसल पर कम रखरखाव और बेहतर उत्पादन के कारण मक्का के रकबे में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। इस वर्ष 70 हजार हेक्टेयर में मक्का की बोवनी की जाएगी। गत वर्ष 66 हजार हेक्टेयर और 2023 में 46 हजार हेक्टेयर में मक्का की बोवनी की गई थी। कृषि विभाग के अनुसार इस साल जिले में अनाज फसल 72 हजार हेक्टेयर में, दलहन फसलें 8 हजार 500 हेक्टेयर में और खरीफ की फसलें 42 हजार हेक्टेयर में लगाई जाएगी।

संवाददाता – कांतिलाल कर्मा

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