कपास आयात पर ड्यूटी खत्म कर किसानों को संकट में धकेल रही सरकार: पूर्व केंद्रीय मंत्री यादव

Government is pushing farmers into crisis by abolishing duty on cotton import Former Union Minister Yadav

हलधर किसान खरगोन। केंद्र सरकार ने हाल ही में अमेरिका समेत अन्य देशों से आयातित कपास पर दिसंबर 2025 तक आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) समाप्त कर दी है। सरकार के इस निर्णय पर पूर्व केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव  ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब आगामी माह अक्टूबर से देशभर के किसान अपनी कपास की उपज बेचने के लिए तैयार खड़े होंगे।

सरकार के इस फैसले से देशी कपास की मांग में गिरावट आएगी और कपास उद्योग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति सस्ते विदेशी कपास से करेगा। इसका सीधा नुकसान हमारे किसानों को होगा l जिन्हें उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
मध्यप्रदेश देश में कपास उत्पादन में सातवें स्थान पर है। यहांं 5.37 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में कपास की खेती होती है। वर्ष 2023.24 में प्रदेश में 18.01 लाख बेल्स कपास का उत्पादन हुआ था, जबकि 2024.25 में घटकर 15.35 लाख बेल्स होने का अनुमान है। यानी केवल एक वर्ष में ही 2.66 लाख बेल्स का नुकसान हुआ है।
कपास का लगातार घटता रकबा
यादव ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 6 वर्षों में प्रदेश में कपास की खेती का रकबा 1.13 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। 2019.20 में जहां 6.50 लाख हेक्टेयर में कपास बोया जाता था, वहीं 2024.25 तक घटकर 5.37 लाख हेक्टेयर रह गया है।  
 यादव ने उठाई मांगें
.सरकार को तुरंत विदेशी कपास पर हटाई गई इंपोर्ट ड्यूटी बहाल करनी चाहिए।
. कपास उत्पादक किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य  की गारंटी दी जाए।
. टेक्सटाइल इंडस्ट्री को घरेलू कपास से खरीदने के लिए बाध्यकारी नीति बनाई जाए।
.किसानों को उनके उत्पादन का लाभकारी मूल्य दिलाने हेतु विशेष पैकेज घोषित किया जाए।
श्री यादव ने कहा कि यदि सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती है तो प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लाखों कपास उत्पादक किसान गहरे संकट में फंस जाएंगे। इसलिए सरकार को देश के अन्नदाताओं के हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेना चाहिए ।

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