व्यावहारिक कृषि शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम पहल
हलधर किसान बालाघाट | कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक बनाने की दिशा में कृषि महाविद्यालय बालाघाट ने एक सराहनीय कदम उठाया है। महाविद्यालय परिसर में नवस्थापित मशरूम उत्पादन इकाई (मशरूम यूनिट) का भव्य उद्घाटन किया गया। यह पहल विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने तथा किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर सृजित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
मशरूम यूनिट की स्थापना कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख के मार्गदर्शन में एवं डॉ. रमेश अमुले के अथक प्रयासों से सफलतापूर्वक की गई। उद्घाटन अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. देशमुख ने कहा कि मशरूम उत्पादन आज के समय में कम लागत, कम भूमि और कम समय में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। मशरूम पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी है। उन्होंने बताया कि इस यूनिट के माध्यम से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे पढ़ाई के दौरान ही स्वरोजगार की संभावनाओं को समझ सकेंगे और भविष्य में उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।
डॉ. देशमुख ने यह भी कहा कि कृषि शिक्षा तभी सार्थक है, जब छात्र पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करें। मशरूम यूनिट इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे विद्यार्थी आधुनिक कृषि तकनीक सीखकर रोजगार के नए अवसर तैयार कर सकेंगे।
इस अवसर पर डॉ. रमेश अमुले ने जानकारी देते हुए बताया कि मशरूम यूनिट के अंतर्गत मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक, स्पॉन (बीज) तैयार करना, तापमान व आर्द्रता नियंत्रण, रख-रखाव, रोग एवं कीट प्रबंधन, प्रसंस्करण तथा विपणन से संबंधित वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे न केवल विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि आसपास के किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. एन. के. बिसेन ने कहा कि मशरूम यूनिट की स्थापना से महाविद्यालय में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना सकेंगे। उन्होंने इसे कृषि महाविद्यालय बालाघाट की एक दूरदर्शी पहल बताया।
मशरूम यूनिट में उत्पादन हेतु आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसमें शेड/कक्ष का निर्माण व संशोधन, तापमान एवं आर्द्रता नियंत्रण व्यवस्था, रैक प्रणाली, स्पॉन उत्पादन एवं भंडारण सुविधा, कंपोस्ट निर्माण सामग्री, आवश्यक उपकरण तथा प्रशिक्षण से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों और किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महाविद्यालय द्वारा किसानों को बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम एवं मिल्की मशरूम की वैज्ञानिक खेती से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण में उत्पादन के साथ-साथ भंडारण, प्रसंस्करण एवं विपणन की जानकारी भी शामिल होगी, जिससे छोटे एवं सीमांत किसान भी घरेलू या लघु स्तर पर मशरूम उत्पादन इकाई प्रारंभ कर सकें।
कुल मिलाकर, कृषि महाविद्यालय बालाघाट में स्थापित मशरूम यूनिट न केवल विद्यार्थियों के लिए सीखने का सशक्त केंद्र बनेगी, बल्कि क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी साधन सिद्ध होगी। यह पहल व्यावहारिक कृषि शिक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में याद रखी जाएगी।
यह भी पढेंः- भावांतर राशि किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार के संकल्प का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
