हलधर किसान, नई दिल्ली। भारत अगले दो वर्षों में वैश्विक डेयरी उद्योग का सबसे बड़ा स्तंभ बनने जा रहा है। लगातार बढ़ते दूध उत्पादन, मजबूत होते डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और करोड़ों किसानों की बढ़ती भागीदारी ने भारत को “दूध शक्ति” में बदल दिया है। राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा जारी नवीनतम आकलन के मुताबिक, वर्ष 2026 तक भारत का कुल दूध उत्पादन 24.20 करोड़ टन तक पहुंच जाएगा। इससे भारत वैश्विक दूध आपूर्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा अकेले उत्पादन करेगा। 26 नवंबर को हर साल श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन के जन्मदिन पर ‘National Milk Day’ मनाया जाता है। इस अवसर पर जारी आंकड़े भारत के डेयरी क्षेत्र की रिकॉर्ड–तोड़ प्रगति को दर्शाते हैं।
दूध उत्पादन में तेज उछाल: 10 वर्षों में 63.56% वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2014–15 में दूध उत्पादन: 14.63 करोड़ टन
- वर्ष 2023–24 में उत्पादन बढ़कर: 23.93 करोड़ टन
- वृद्धि: 63.56 प्रतिशत
- वर्ष 2026 का अनुमान: 24.20 करोड़ टन
इस तेज वृद्धि के चलते भारत वैश्विक दूध बाजार में निर्णायक भूमिका निभाने लगा है। उत्पादन बढ़ने के साथ ही देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 124 ग्राम से बढ़कर 471 ग्राम प्रतिदिन हो गई है।
देश की अर्थव्यवस्था में डेयरी सेक्टर का 5% योगदान
- भारत का डेयरी क्षेत्र न केवल उत्पादन में बल्कि रोजगार में भी एक बड़ा आधार बन चुका है।
- डेयरी सेक्टर का आर्थिक योगदान: करीब 5%
- रोज़गार से जुड़े किसान: 8 करोड़ से अधिक
यह दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी इकोसिस्टम बन चुका है, जिसमें छोटे किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
NPDD ने बदला डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर का चेहरा
राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) देश के डेयरी ढांचे को आधुनिक बनाने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के तहत:
- 31,908 डेयरी समितियों का गठन/पुनर्जीवन
- 17.6 लाख नए दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी
- दूध खरीद क्षमता पहुंची: 120 लाख किलो प्रतिदिन
- 61,677 गांवों में दूध टेस्टिंग लैब
- 6,000 बल्क मिल्क कूलर स्थापित
- कुल चिलिंग क्षमता: 149.35 लाख लीटर
- 279 डेयरी प्लांट लैब को आधुनिक मिलावट जांच तकनीक से अपग्रेड
- इससे दूध की क्वालिटी, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग क्षमता में बड़ा सुधार हुआ है।
भारत का विशाल कोऑपरेटिव नेटवर्क
भारत का डेयरी कोऑपरेटिव मॉडल दुनिया में अनोखा है। यह नेटवर्क शामिल करता है:
- 22 मिल्क फेडरेशन
- 241 जिला यूनियन
- 28 मार्केटिंग डेयरियां
- 25 मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन
ये सभी 2.35 लाख गांवों तक सेवाएं पहुंचाते हैं और 1.72 करोड़ किसानों को जोड़ते हैं।
महिलाएं बनी डेयरी सेक्टर की रीढ़
भारत का डेयरी क्षेत्र महिलाओं की भूमिका के कारण और भी मजबूत हुआ है। डेयरी वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70% है। कोऑपरेटिव मेंबर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 35%, सक्रिय महिला सहकारी समितियां में 48,000 महिलाएं शामिल हैं। महिला दुग्ध उत्पादकों की देश में करीब 12 लाख संख्या है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने डेयरी सेक्टर को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
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