केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह करेंगे सम्मेलन को संबोधित, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल; निवेश गाइड जारी करने के साथ मत्स्य हितग्राहियों को मिलेंगे प्रमाण-पत्र
हलधर किसान भोपाल। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन, मछली प्रसंस्करण और मत्स्य उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के उद्देश्य से भोपाल में 23 अक्टूबर 2026 को ‘मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन–2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, जिसे मिंटो हॉल के नाम से भी जाना जाता है, में होगा। इसमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को सामने लाना, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना, मछली प्रसंस्करण एवं विपणन सुविधाओं का विस्तार करना और मत्स्य उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से निवेशकों, निर्यातकों, मत्स्य व्यवसाय से जुड़े उद्यमियों, सहकारी समितियों और मछली पालन करने वाले किसानों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर होगा मंथन
भारत में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन अपनाकर किसान अपनी आमदनी के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं। वहीं, तालाबों और जलाशयों का वैज्ञानिक उपयोग, आधुनिक उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित मत्स्य आहार तथा बेहतर प्रबंधन से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश में उपलब्ध तालाबों, जलाशयों और अन्य जल संसाधनों को देखते हुए मत्स्य पालन के क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि, इस क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और बाजार तक पहुंच की सुविधाओं का विकास भी जरूरी है।
इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में मत्स्य क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और व्यवसाय के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने पर जोर रहेगा। निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से आधुनिक तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांचे और बाजार आधारित गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
जारी होगी मध्यप्रदेश की मत्स्य निवेश एवं निर्यात गाइड-2026
सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की ‘मत्स्य निवेश एवं निर्यात गाइड-2026’ जारी की जाएगी। इस गाइड के माध्यम से प्रदेश में मत्स्य पालन, मत्स्य व्यवसाय और निर्यात से संबंधित निवेश की संभावनाओं को सामने लाने में मदद मिलेगी। यह पहल संभावित निवेशकों और उद्यमियों को प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके साथ ही अन्य राज्यों से मछली निर्यात की क्षमता से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य मछली के व्यापार और निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने तथा इस क्षेत्र में बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना है।
मत्स्य उत्पादों के निर्यात के विस्तार के लिए गुणवत्ता, स्वच्छता, उचित रखरखाव, शीत शृंखला और परिवहन जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने से उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है।
एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का होगा ऑनलाइन उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया जाएगा। केज कल्चर यानी जालीनुमा पिंजरों में मछली पालन एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से उपयुक्त जलाशयों में नियंत्रित परिस्थितियों में मछली उत्पादन किया जा सकता है।
इस तकनीक में जल की गुणवत्ता, मछलियों की प्रजाति, आहार, घनत्व और प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। वैज्ञानिक तरीके से संचालित केज कल्चर इकाइयां मछली उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकती हैं।
हालांकि, इस तकनीक को अपनाने के लिए स्थानीय जलाशय की उपयुक्तता, पर्यावरणीय प्रभाव, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन जरूरी है। ऐसे में आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को प्रोत्साहन देने वाली पहल किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोल सकती हैं।
तालाबों और अमृत सरोवरों के विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
सम्मेलन में मध्यप्रदेश के तालाबों तथा अमृत सरोवरों के विकास से संबंधित प्रशासनिक मंजूरी पत्रों का वितरण भी किया जाएगा। जल संसाधनों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन मत्स्य पालन गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है।
तालाबों और उपयुक्त जलाशयों का वैज्ञानिक विकास मछली उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। इसके लिए जल की उपलब्धता, जलाशय की स्थिति, मत्स्य बीज की गुणवत्ता और नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
यदि जल संसाधनों का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से किया जाए, तो मत्स्य पालन ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका का बेहतर साधन बन सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन, व्यापार और संबंधित सेवाओं को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
किसानों, सहकारी समितियों और स्टार्टअप्स को मिलेगा प्रोत्साहन
सम्मेलन के दौरान मत्स्य पालन से जुड़े हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। इनमें मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड, मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य क्षेत्र के स्टार्टअप्स से जुड़े लाभार्थी शामिल होंगे।
मछली पालन करने वाले किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पात्रता और लागू नियमों के अनुसार कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सकती है। इससे मछली के बीज, आहार और दैनिक संचालन जैसे खर्चों के प्रबंधन में सुविधा मिल सकती है।
वहीं, मत्स्य सहकारी समितियां छोटे मछली पालकों को संगठित करने, सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने और बाजार तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दूसरी ओर, मत्स्य क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स नई तकनीक, डिजिटल बाजार, उत्पादन प्रबंधन, प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।
ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल
मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन-2026 को मध्यप्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के विकास, निवेश और बाजार विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। सम्मेलन में प्रस्तावित गाइड, एसओपी, केज कल्चर इकाइयों के उद्घाटन तथा हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र वितरण जैसी गतिविधियां इस क्षेत्र में संस्थागत और व्यावसायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ किसानों और मछली पालकों तक पहुंचाने के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार संपर्क को मजबूत बनाना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, भोपाल में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन मत्स्य पालन को पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर आधुनिक, निवेश आधारित और बाजारोन्मुखी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्रदेश में मत्स्य उत्पादन की संभावनाओं को बेहतर ढंग से उपयोग करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के अवसर तलाशे जाएंगे।
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