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“असंतुलित उर्वरक नीति से देश की मिट्टी खतरे में, प्रधानमंत्री मोदी को एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन का बड़ा सुझाव”

Know the important suggestion of Agro Input Dealers Association to PM Modi on the threat to soil due to unbalanced fertilizer policy

हलधर किसान नई दिल्ली | देश की खेती और मिट्टी के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार की वर्तमान उर्वरक सब्सिडी नीति (NBS) में बुनियादी बदलाव की माँग करते हुए माननीय नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि असंतुलित उर्वरक नीति के कारण देश की कृषि भूमि धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है, जो आने वाले समय में 14 करोड़ किसान परिवारों और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा संकट बन सकती है।

पत्र में बताया गया है कि वर्तमान में यूरिया और अन्य जटिल उर्वरकों जैसे NPK और DAP की कीमतों में भारी अंतर है। जहाँ यूरिया 45 किलो की बोरी मात्र 266 रुपये में उपलब्ध है, वहीं 50 किलो की NPK बोरी की कीमत 2100 रुपये तक पहुँच चुकी है। इस बड़े मूल्य अंतर के कारण किसान मजबूरी में केवल सस्ता यूरिया ही अधिक मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की अधिकता हो जाती है, जिससे अम्लीयता (Acidity) बढ़ती है, मिट्टी सख्त होती जाती है और उसकी जलधारण क्षमता घटती है। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में फसलों की उत्पादकता घट रही है और भूमि की सेहत बिगड़ रही है।

एसोसिएशन ने इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार को चार ठोस सुझाव दिए हैं। पहला, सामान्य यूरिया की जगह सल्फर कोटेड यूरिया यानी “यूरिया गोल्ड” को बढ़ावा दिया जाए। इसे 40 किलो की बोरी 500 रुपये में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। यह स्लो-रिलीज उर्वरक है, जो फसल को धीरे-धीरे पोषण देता है और मिट्टी की खराबी को 30 प्रतिशत तक कम करता है। दूसरा, अगले पाँच वर्षों में सामान्य यूरिया का उत्पादन हर साल 20 प्रतिशत घटाया जाए और उसकी जगह उन्नत किस्म के यूरिया को अपनाया जाए। इससे किसानों की आदत में भी संतुलित खाद के उपयोग की प्रवृत्ति विकसित होगी।

तीसरा अहम सुझाव सब्सिडी के पुनर्वितरण को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि यूरिया पर होने वाली अतिरिक्त सब्सिडी से बचने वाली राशि का उपयोग NPK और DAP जैसे उर्वरकों की कीमत घटाने में किया जाए। यदि इनकी कीमतें 1350 से 1500 रुपये के बीच लाई जाएँ, तो किसान संतुलित पोषण (Balanced Nutrition) अपना पाएँगे और मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी। चौथा, उर्वरक कंपनियों द्वारा अलग-अलग MRP रखने से किसान भ्रमित होते हैं, इसलिए सरकार को सभी ग्रेड की अधिकतम खुदरा कीमतें पुनः तय करनी चाहिए।

अपने पत्र में श्री कलंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के पिछले दस वर्षों के किसान-हितैषी प्रयासों की भी सराहना की है। उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के लिए 19.60 लाख करोड़ रुपये और किसान सम्मान निधि के तहत 3.70 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों को दिए गए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का “यूरिया का उपयोग कम करने” का विज़न तभी साकार होगा जब NPK, DAP और MOP जैसे उर्वरक भी किसानों की पहुँच में होंगे।

एसोसिएशन ने यह भी माँग की है कि MOP यानी पोटाश की कीमतों को नियंत्रित किया जाए, ताकि गन्ना, धान और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित न हो। इस पूरे विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए प्रधानमंत्री और रसायन मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने का समय भी माँगा गया है।

मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ, भोपाल के अध्यक्ष मान सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव संजय रघुवंशी, सदस्यता अभियान प्रभारी विनोद जैन और प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे ने भी इन सुझावों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि भूमि भी सुरक्षित रहेगी।

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