हलधर किसान दिल्ली l केंद्र सरकार की कृषि बुनियादी निधि (एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड – AIF) योजना देश के किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरी है। फसल कटाई और मड़ाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब गांव-गांव में आधुनिक कृषि ढांचे के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि जुलाई 2020 में शुरू हुई इस योजना के तहत 26 जनवरी 2026 तक 1,50,431 परियोजनाओं के लिए 80,224.15 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जिससे देश में करीब 1,27,508 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि एआईएफ किसानों, किसान समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भरोसेमंद वित्तीय सहारा बन चुकी है।
3 प्रतिशत ब्याज छूट से सस्ता ऋण
एआईएफ योजना की सबसे बड़ी खासियत है 3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी, जिससे किसानों और कृषि स्टार्टअप्स को बैंक से सस्ता ऋण मिलता है। इसके अलावा 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर क्रेडिट गारंटी भी दी जाती है, जिसे सीजीटीएमएसई और नाबार्ड के तहत कवर किया गया है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और किसानों को बिना ज्यादा गारंटी के भी वित्तीय मदद मिल जाती है।
गांव स्तर पर बुनियादी ढांचा मजबूत
इस योजना के तहत गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, ग्रेडिंग-छंटाई केंद्र, प्रोसेसिंग यूनिट, पैक हाउस, और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इसका सीधा लाभ यह है कि किसान अपनी फसल को मजबूरी में तुरंत बेचने की बजाय सुरक्षित भंडारण कर बेहतर दाम मिलने पर बाजार में उतार सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटती है और किसानों की आय बढ़ती है।
पीएम-कुसुम से जुड़ा एआईएफ
सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के घटक बी और सी को भी एआईएफ से जोड़ दिया है। सितंबर 2020 से यह व्यवस्था लागू है, जिसके तहत ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने और स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने के लिए एआईएफ के तहत ऋण दिया जा रहा है। इससे किसानों को बिजली की बचत, सिंचाई में सुविधा और पर्यावरण संरक्षण – तीनों का लाभ मिल रहा है।
26 जनवरी 2026 तक पीएम-कुसुम के घटक बी और सी के अंतर्गत 921 परियोजनाओं को 29.20 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि सौर ऊर्जा आधारित कृषि ढांचा भी धीरे-धीरे गांवों में अपनी जगह बना रहा है।
किसान समूहों को विशेष लाभ
एआईएफ के तहत स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), जल उपयोगकर्ता संघ, सहकारी समितियां और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी ऋण लेने के पात्र हैं। संगठित किसानों को यह योजना सामूहिक रूप से गोदाम, कोल्ड स्टोरेज या प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का मौका देती है, जिससे उनकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ती है।
कृषि में निवेश का नया दौर
एआईएफ ने कृषि को सिर्फ खेती तक सीमित न रखकर एग्री-बिजनेस का रूप देने में मदद की है। गांवों में अब निजी निवेश, स्टार्टअप और युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ रही है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
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