खरबूजे की फसल ने बदली किसान की किस्मत, सालान हो रहा लाखों का मुनाफा

Melon crop changed the farmers variety earning lakhs of profit annually

हलधर किसान खरगोन। जिले में अब किसान परंपरागत खेती के साथ ही उद्यानिकी फसलों में भी रुचि ले रहे है। किसानों के यह नवाचार न केवल फायदेमंद साबित हो रहे है बल्कि किसानों की आय के साधन बन रहे है। ऐसा ही नवाचार बोरावां के किसान मोतीराम वर्मा ने किया है, जिन्होंने परंपरागत फसलों के अलावा खरबूजे की फसल लगाई जो महज प्रयोग के तौर पर शुरु की थी जो आज मुख्य फसल बन गई है। 60 दिन की खरबूजे की फसल से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपए का मुनाफा ले रहे है। वर्मा ने बताया उनका खरबूजा खरगोन, खंडवा के अलावा इंदौर, उज्जैन, रतलाम सहित उत्तर भारत के शहरों तक पहुंच रहा है। माध्यमिक स्तर तक शिक्षित मोतीराम बताते हैं गर्मी में खरबूज की खेती चुनौती का काम है। 8 एकड़ में फसल लगाई है। ड्रिप सिंचाई के साथ इनलाइन लिक्विड खाद दिया। 2 माह में फसल तैयार हो गई। आठ एकड़ में 8 लाख की बचत हुई। प्रति एकड़ 20 हजार रुपए के बीज के अलावा फसल निकालने में कंपोस्ट खाद का अतिरिक्त मुनाफा मिल रहा है। 

 ट्रेक्टर से जुताई बाद ड्रिप इनलाइन बिछाकर बुआई की। 50 दिन में फल लगने पर मक्खियों से बचाव करना ज्यादा कठिन है। डंक लगते ही फल खराब हो जाता है। इसके लिए कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन में फैरोमैन ट्रैप लगाए। ग्रेडिंग बाद फल विक्रेता 10 किलो थोक में खरीदी कर रहे है।  

साल में ले रहे तीन फसल

अपने खेत में साल में तीन बार फसल लेते हैं। तीनों फसलों से 24 लख रुपए सालाना मुनाफा हो रहा है। कपास व डॉलर चने के बाद तीसरी फसल तरबूज खरबूज की होती है। तीसरी फसल के माध्यम से अतिरिक्त आय के साथ खेत में फसल चक्र भी अपना लेते हैं। 8 एकड़ की खेती में तीन फसल में सालाना 24 लाख रुपए तक की आय होती है। 15 सदस्यों के परिवार में आए घटने से 2007.08 से परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक खेती कर रहे है। तीसरी फसल में एक साल तरबूज तो अगले साल खरबूज लगाते हैं।

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