हलधर किसान दिल्ली l भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2025 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) के लिए अपने ताजा दीर्घकालिक पूर्वानुमान में देश में सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है। पूरे देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) का 106% बारिश होने की संभावना है। सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देता है, हालांकि उत्तर-पूर्व भारत में सामान्य से कम बारिश की आशंका है। जून 2025 के लिए भी औसत से 8% अधिक बारिश का अनुमान है, जो कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
मॉनसून 2025 : सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भविष्यवाणी की है कि जून से सितंबर 2025 तक देश में मॉनसून की बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का 106% होगी, जो 1971-2020 की अवधि के 87 सेमी के औसत पर आधारित है। यह अनुमान मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश की ओर इशारा करता है। विशेष रूप से मॉनसून कोर जोन (MCZ), जो देश के अधिकांश वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को कवर करता है, में भी सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद है। यह खरीफ फसलों के लिए लाभकारी होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देगा
क्षेत्रीय बारिश का परिदृश्य
IMD ने क्षेत्रीय स्तर पर बारिश के वितरण का अनुमान लगाया है। मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप: इन क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश (>106% LPA) की संभावना है, जो खेती और जल संसाधनों के लिए अनुकूल है। उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य बारिश (92-108% LPA) की उम्मीद, जो स्थिर कृषि उत्पादन का संकेत देता है। वहीं, उत्तर-पूर्व भारत में सामान्य से कम बारिश (<94% LPA), जो इस क्षेत्र में फसलों और जल प्रबंधन के लिए चुनौतियां पेश कर सकता है। वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश, जो ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक उछाल का आधार तैयार करेगी।
जून 2025 का मासिक पूर्वानुमान
जून 2025 में देश में LPA से 108% से अधिक बारिश की संभावना है, जो खरीफ फसलों की बुआई के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की आशंका है। तापमान के मोर्चे पर, जून में अधिकांश भारत में सामान्य से कम अधिकतम तापमान की उम्मीद है, जबकि उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक हो सकता है। न्यूनतम तापमान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहेगा, सिवाय मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों के, जहां सामान्य से कम तापमान की संभावना है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मॉनसून का सीधा असर भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। देश की 65% से अधिक खेती मॉनसून पर निर्भर है, और 60-65% आबादी का रोजगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ा है। सामान्य से अधिक बारिश खरीफ फसलों की पैदावार बढ़ा सकती है, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि होगी। यह FMCG और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांग को बढ़ाएगा, जिससे ग्रामीण बाजार में उछाल आएगा। IMD का यह पूर्वानुमान कृषि योजना, जल संसाधन प्रबंधन, और आपदा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।
निरंतर निगरानी और अपडेट
IMD ने कहा है कि वह मॉनसून की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखेगा और समय-समय पर अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा। यह जानकारी कृषि, जल संसाधन, और आपदा प्रबंधन की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विस्तृत जानकारी और अपडेट IMD की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
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