धान की खेती में नया अध्याय: ‘डीएसआर विधि’ बनी किसानों की पहली पसंद

New chapter in paddy cultivation DSR method becomes the first choice of farmers

विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में हो रही कार्यशालाएं बनीं नवाचार की प्रेरणा

हलधर किसान बालाघाट। विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में आयोजित कार्यशालाएं अब धान की नवीनतम बोनी विधि – डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) को लेकर किसानों में नई जागरूकता ला रही हैं। शुक्रवार को जिले के विभिन्न जनपदों में आयोजित कार्यशालाओं में किसानों ने इस तकनीक में विशेष रुचि दिखाई।

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वारासिवनी की ग्राम पंचायत कोचेवाही एवं लड्सड़ा, कटंगी के मानेगांव एवं मेहदुली, बालाघाट जनपद के रट्टा व जरेरा, लांजी में बेलगांव व नेवारवाही तथा बिरसा जनपद के सुन्दरवाही व अडोरी में आयोजित इन कार्यशालाओं में कृषि विभाग के साथ-साथ मत्स्य, उद्यानिकी, पशुपालन, सहकारिता व कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने भाग लेकर अपने-अपने विभाग की योजनाओं और संसाधनों की जानकारी दी।

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डीएसआर तकनीक से कम लागत, अधिक उत्पादन
कृषि उपसंचालक श्री राजेश खोब्रागड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के अंतर्गत किसानों को डीएसआर विधि (सीड्रिल मशीन द्वारा बोनी) के लाभों से अवगत कराया जा रहा है। यह तकनीक पारंपरिक पद्धति की तुलना में कम लागत और कम समय में अधिक उत्पादन की संभावना देती है।

श्री खोब्रागड़े ने बताया कि जिले में अब 63 कस्टमर हायरिंग सेंटर हो चुके हैं, जहाँ सीड्रिल मशीनें उपलब्ध हैं। किसान इन केंद्रों से ₹1200 प्रति एकड़ के दर पर मशीनें किराए पर प्राप्त कर सकते हैं।

खेत पाठशाला से होगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री ओमकार सिंह बिसेन ने खेत पाठशाला के माध्यम से डीएसआर विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. उत्तम बिसेन ने फसल रोग, खरपतवार प्रबंधन, बीज उत्पादन और कृषि यंत्रों के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला में सरपंच श्रीमती सुनीता मंजय सोनकर, जनपद सदस्य श्री शंकरलाल इंवाते, कार्यक्रम प्रभारी श्री आर.के. शेंडे, मत्स्य अधिकारी श्री मेश्राम, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. घोडेस्वर, कृषि विस्तार अधिकारी श्री दिलेश खंडेलकर, श्री जी.एन. मेश्राम, उद्यानिकी अधिकारी श्री श्याम, व पटवारी श्री ललित बिसेन उपस्थित रहे।

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