वन नेशन वन रजिस्ट्रेशन”- बीज कानून – 35

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हलधर किसान इंदौर।

  1. बीज विक्रय लाइसैंस :- अभी तक बीज नियन्त्रण आदेश 1983 की धारा-3 के अनुसार बीज विक्रय के लिये लाइसैंस लेकर बीज व्यापार करना अनिवार्य था या यूं कहें बीज विक्रेता रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य था। प्रस्तावित अधिनियम स्थापित होने पर बीज नियन्त्रण आदेश निरस्थ होने पर बीज विक्रेता, बीज वितरक, बीज उत्पादक, बीज प्रोसेसिंग इकाई, फलदार पौधों की नर्सरी का पंजीकरण आवश्यक है और यह राज्य सरकार द्वारा है जो बीज अधिनियम की धाराओं के अनुरूप रजिस्ट्रेशन नहीं कर अपनी अलग ही विवेचना कर विसंगतियाँ उत्पन्न होगी और प्रत्येक राज्य में नियम कानून अलग-2 परिलक्षित होंगे।
  2. रजिस्ट्रेशन एक ही है :- बीज नियन्त्रण आदेश 1983 के अनुसार बीज विक्रय लाइसैंस राज्य सरकार के अधिसूचित लाइसेंसिंग अधिकारी लाइसैंस प्रदान करते थे। यह लाइसैंस किसी एक स्थल पर नक्शा बनाकर और कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा स्थल का निरीक्षण करके सन्तुष्ट होने पर दिया जाता रहा है। यह लाइसैंस किसी जिले, राज्य का नहीं होता है बल्कि इस लाइसैंस से पूरे विश्व में बीज व्यवसाय किया जा सकता है। फार्म-B में प्रदान लाइसैंस की भाषा पढ़ने पर स्वयं आभाष हो जायेगा कि लाइसैंस किसी एरिये का नहीं होता है। लाइसैंस की भाषा निम्न प्रकार है:-

“Subjected to the provision of this Seed (Control) Order 1983 and th the terms & conditions of this licence Sh./M/s is hereby granted licence to Sell, Export, Import & Store for said purpose of Seed”.

“This licence shall carry on the aforesaid business at place for

storage & place for sale”.

उपरोक्त पंक्तियों के अध्ययन से इस लाइसैंस के द्वारा लाइसैंसधारी को बीज बेचने, आयात करने, निर्यात करने तथा भंडारण के लिये अधिकृत करता है। इस लाइसैंस के द्वारा व्यापारी विश्व के दूसरे देशों में व्यापार कर सकता है परन्तु विधि की विडम्बना देखिये अपने देश के दूसरे राज्यों तथा जिलों में बीज विक्रय के लिये अलग लाइसैंस लेने के लिये कुपढ अधिकारी बाध्य करते हैं। इसी लाइसैंस में विक्रय स्थल एवं भंडारण स्थल भी निर्दिष्ट कर दिये हैं परन्तु कहीं यह नहीं परिलक्षित होता कि यह लाइसैंस किसी एरिया के लिये प्रदान किया गया है अर्थात “वन नेशन वन रजिस्ट्रेशन पहले भी था परन्तु व्यापारियों की कमी से यह रूप ले पाया।

3. राज्य वार जिलेवार लाइसैंस :- जैसा उपर बताया गया है कि लाइसैंस किसी एरिया, राज्य के लिये नहीं है परन्तु राज्यों / जिलों के अधिकारियों ने कृषकों को उच्च गुणवत्ता का बीज उपलब्ध करवाने की आड़ में अपने निहित स्वार्थ के लिये जिला लाइसैंस, राज्य लाइसैंस, सैन्ट्रल लाइसैंस, खुदरा लाइसैंस, थोक लाइसैंस बनाये। कीटनाशी अधिनियम 1968 तथा उर्वरक नियन्त्रण आदेश 1985 मे थोक एवं खुदरा व्यापारी और लाइसैंस है परन्तु बीज कानूनों में नहीं है पर धक्केशाही जारी है। राज्य को सैन्ट्रल लाइसैंस की आवश्यकता ही नहीं बल्कि राज्य प्रशासन ने बीज उत्पादकों के लाइसैंस प्रदान करने के लिए मुख्यालय के कुछ अति विशिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया और फुटकर बीज विक्रेताओं को जिला स्तर के अधिकारियों को अधिकृत किया जबकि मुख्यालय और जनपदालय के अधिकारियों द्वारा प्रदत्त लाइसैंस की समान महत्ता है। यहाँ यह स्पष्ट कर दूं कि केन्द्रीय सरकार ने अपने पत्र दिनांक 07.09.2021 के द्वारा स्पष्ट भी करती है कि सैंट्रल लाइसैंस नहीं होता।

  1. दूसरे राज्य में लाइसैंस :- प्रदत्त लाइसैंस की भाषा पढ़ने पर दूसरे राज्य में बीज विक्रय करने हेतु अलग से लाइसैंस लेने की दरकार नहीं है। बीज व्यापारियों पर प्रत्ये क राज्य में लाइसैंस लेने का दबाव डाला तो बीज अधिनियम 1966 रचना करने वाली केन्द्रीय सरकार के कृषि विभाग के उपायुक्त गुण नियन्त्रण डॉ० आर.के. त्रिवेदी ने अपने पत्र दिनांक 29.04.2016 द्वारा स्पष्टीकरण भी राज्यों को दिया कि यदि कोई बीज उद्यमी दूसरे राज्य में अपना कार्याल्य या सी. एण्ड एफ. नहीं खोलते और अपने प्रदेश से ही दूसरे राज्य में अधिकृत / मान्यता प्राप्त बीज विक्रेताओं के माध्यम से बीज विक्रय करते हैं तो उन्हें दूसरे राज्य में लाइसैंस लेने की आवश्यकता नहीं है।

5. क्यों राज्य के अधिकारियों की अधिनायकता :- राज्यों, जिलों में लाइसैंस, सैन्ट्रल लाइसैंस, थोक खुदरा लाइसैंस क्यों इजाद किये जा रहे हैं इसके पीछे “समुन्द्र में रह कर मगरमच्छ से बैर नहीं की धारणा व्यापारी को बुजदिल बनाए हुए है और खुद अपने अधिकार के लिये नहीं अड़ते हैं। दूसरे ये चाहते हैं कि सब काम केन्द्र के अधिकारी कर दें और ये राज्य के अधिकारियों की नजर में न आये। हक लेने के लिये संघर्ष करना पड़ेगा और साथ ही अपने आप को भी कानून का पालन करना होगा। एक कहावत है कि “Shining sword can never win the war” चमकती हुई तलवार से युद्ध नहीं जीते जाते बल्कि खडग को रक्त रंजित कर ही सफलता पाई जा सकती है।

6. युनियनों से जुड़ाव :- प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से आज प्रत्येक व्यापारी छोटी-बड़ी युनियनों से जुड़ा हुआ है। यदि नहीं जुड़ा तो जुड़ जाओ। विगत 59 सालों में किसी युनियन या व्यक्ति ने लाइसैंस की असंगत मांग के लिये उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों में कोई याचिका दायर की हो ऐसा दृष्ठान्त नहीं मिलता, न ही बड़े स्तर पर इस बारे केन्द्रीय एवं राज्य अधिकारियों से वार्ता कर लाइसैंस का कोई समाधान नहीं ढूंढा गया। हक कोई थाली में परोस कर नहीं देगा बल्कि हक कुर्बानी देकर छीने जाते हैं।

    7. अलग-2 लाइसैंस नहीं :- हरियाणा सरकार के द्वारा बीज (हरियाणा संशोधन) अधिनियम 2025 पर अपनी स्वीकृति देते हुए केन्द्र सरकार के उपायुक्त बीज श्री एम. गुणशेखरण ने बताया कि बीज व्यवसाय भारतीय संविधान की अनुसूचि 44 में आता है अतः अन्तर्राजीय व्यापार है और अगर अलग-2 राज्यों में भिन्न लाइसैंस होंगे तो व्यापार दुष्कर होगा और ऐसा ही हो रहा है।

    पहले भी एक नेशन एक रजिस्ट्रेशन नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण विश्व था परन्तु यह बीज उद्योग ने कमजोरी दिखा कर एक देश हर दुकान लाइसैंस की अवधारणा कर दी।

    जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिलाध्यक्ष श्री दुबे की प्रतिक्रिया

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    हमारे देश के प्रदेश के समस्त कृषि आदान व्यापारी साथी यो हम सभी को इस बात का समर्थन करना चाहिए कि एक राष्ट्र एक रजिस्ट्रेशन यानी कि वन नेशन वन रजिस्ट्रेशन यह देश एक ही है राष्ट्र एक ही है तो क्या कानून अलग-अलग होंगे उनका भी एक होना आवश्यक है जो कि हमको समझना और समझा ना होगा यह जो बीज विक्रय के लाइसेंस वाली व्यवस्था है इसको आप सभी को समझना होगा क्योंकि जिस व्यापार से आप जुड़े हैं उसके मुख्य बातों की जानकारी आपको होना चाहिए अभी भी देश के प्रदेश के कुछ जिलों में कृषि विभाग के अधिकारी यह कहते हैं कि आप जिस कंपनी का काम कर रहे हैं चाहे वह दिल्ली की हो बैंगलोर की हो हैदराबाद की हो मुंबई की हो उस कंपनी को यदि यहां पर प्रदेश में जिले में व्यापार करना है तो उसको यहां का लाइसेंस लेना पड़ेगा जबकि एक्ट में बीज नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 3 के अनुसार इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है यदि आपको प्रदेश के बाहर की कंपनियों से व्यापार करना है तो आपके पास जो लाइसेंस है जिससे आप व्यापार करते हैं उससे आप व्यापार कर सकते हैं देश की कहीं भी किसी भी जगह की कंपनी है वह अपना माल आपको बिल के साथ तरीके से आपको देगी और आपके पास जो यहां पर प्रदेश में जिले में बीज विक्रय का लाइसेंस है उस आधार पर आप उसको अपने देश में प्रदेश में कहीं भी विक्रय कर सकते हैं लेकिन जानकारी के अभाव में हमारे कृषि आदान व्यापारी जो है विभाग के अधिकारियों के द्वारा जो है भ्रमित किए जाते हैं जो कि अनुचित है कृपया अपने व्यापार की बारीकी को समझे चाहे बीज विक्रय हो चाहे कीटनाशक विक्रय हो चाहे रासायनिक खाद विक्रय करें उसमें आपकी जानकारी होना चाहिए इसके बाद भी यदि कृषि विभाग के अधिकारी नहीं मानते हैं या नहीं समझते हैं तो अपने नजदीकी जिला अध्यक्ष से या प्रदेश अध्यक्ष से प्रदेश सचिव से उनकी बात करवाइए उस व्यापारी का संगठन का सदस्य होना जरूरी होगा ताकि वह अधिकारीआगे इस विषय में आपको बाध्य नहीं करेंगे व्यापारी हित में जारी श्री कृष्णा दुबे अध्यक्ष जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिला इंदौर

    लेखक

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    आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन”, ई-70, विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)

    बीज विधेयक 2025 पर भारत सरकार ने बीज उद्यमियों से परामर्श मांगे थे और आपत्तियों को इंगित करने की अपेक्षा की थी। इस विषय में कुछ बीज व्यवहारियों ने ‘वन नेशन वन रजिस्ट्रशन” की अवधारणा व्यक्त की है।

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