हलधर किसान अजमेर। 7 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। यह संयोग ही है कि पितरों को तर्पण देने के पहले ही दिन चंद्र ग्रहण का साया होगा। इस ग्रहण का असर भारत में भी होने से सुतक काल भी मान्य होगा।

ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी (जैन) ने बताया कि चंद्र ग्रहण का आरंभ रात 8.58 बजे तथा ग्रहण का मोक्ष यानी समापन रात 2.25 बजे होगा। चंद्र ग्रहण की शुरूआत, मध्य और मोक्ष पूरे भारत वर्ष में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण का सूतक काल चंद्रग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व शुरू हो जाता है। सूतक काल समाप्त चंद्रग्रहण के बाद ही होता है। सूतक काल की शुरूआत दोपहर 12.57 बजे से होगी। चंद्रग्रहण का सूतक काल जब शुरू हो जाए तो, आपको गलती से भी पूजा स्थल की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण के सूतक काल से ग्रहण के खत्म होने तक पूजा स्थल को ढंक कर रखना चाहिए। ग्रहण के दौरान भोजन पकाने से भी आपको बचना चाहिए और ना ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।
हमारे देश के अलावा चंद्र ग्रहण को एशिया, यूरोप, आस्ट्रेलिया, पश्चिमी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, पूर्वी अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका आदि देशों में भी देखा जा सकता है।
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