हलधर किसान दिल्ली l दिल्ली–एनसीआर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें 2026-27 के लिए प्रस्तावित बड़े पैमाने के हरितकरण कार्यक्रम और वृक्षारोपण तैयारियों का विस्तार से मूल्यांकन किया गया।
इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य एनसीआर में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और सामुदायिक भागीदारी से संचालित जिला-वार हरितकरण रणनीति को अंतिम रूप देने का था।
🌿 एनसीआर में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर व्यापक चर्चा
मंत्री ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान योजनाबद्ध हरितकरण से ही संभव है। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाएगी, जिसके तहत—
- कुल वन क्षेत्र, संरक्षित वन और चिड़ियाघर
- नगर वन/नमो पार्क
- राजस्व एवं सामुदायिक वन
- नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों और रामसर स्थलों के जलग्रहण क्षेत्र
- पंचायत और नगरपालिका से जुड़ी सार्वजनिक भूमि
इन सभी क्षेत्रों का मानचित्रण, वर्गीकरण और वनस्पति की गुणवत्ता का आकलन कर उपयुक्त हरितकरण मॉडल तैयार किए जाएंगे।
🌳 नर्सरी, ईको-क्लब्स और समुदाय की होगी बड़ी भूमिका
बैठक में यह तय किया गया कि—
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की सभी नर्सरीज़ की सूची व क्षमता का आकलन होगा।
- जरूरत के अनुसार उन्हें मजबूत किया जाएगा ताकि वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त पौध सामग्री उपलब्ध हो सके।
- एनसीआर के सभी ईको-क्लब्स को वृक्षारोपण और जन-जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।
- प्राकृतिक इतिहास संस्थान और उसके क्षेत्रीय केंद्र भी इस बड़े अभियान में सहयोग देंगे।
राज्यों ने सहमति दी कि वे स्थानिक (स्पैशियल) विश्लेषण के आधार पर वृक्षारोपण वाले क्षेत्रों और हितधारकों की पहचान करेंगे।
📅 अगले 5 वर्षों के लिए जिला-स्तरीय सूक्ष्म योजना
श्री यादव ने राज्यों से कहा कि वे अदालतों के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अगले पाँच वर्षों की सूक्ष्म (माइक्रो) योजना तैयार करें, जिसमें स्पष्ट रूप से शामिल होगा—
- हर वर्ष वृक्षारोपण के लिए लिए जाने वाले स्थल
- कार्यान्वयन एजेंसियाँ
- समुदायिक सहयोग की संभावनाएँ
- पौधरोपण का प्रकार और स्थान
- पौध सामग्री के स्रोत
- और धन की उपलब्धता (ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना, मनरेगा, मुआवजा वृक्षारोपण कोष आदि)
इसके साथ ही आक्रामक प्रजातियों से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
📘 एनसीआर की 5-वर्षीय संयुक्त हरितकरण योजना
मंत्री ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि सभी राज्यों की सूक्ष्म योजनाओं को मिलाकर एक संयुक्त 5-वर्षीय एनसीआर हरितकरण मास्टर प्लान तैयार किया जाए।
यह योजना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जाएगी, जिससे हरित क्षेत्र बढ़ेगा और प्रदूषण में दीर्घकालिक कमी आएगी।
🛰️ एफएसआई और ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का सहयोग
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) राज्यों को क्षरित वन भूमि और आक्रामक प्रजातियों के डेटा उपलब्ध कराएगा, ताकि इसे योजना में शामिल किया जा सके। साथ ही राज्यों से कहा गया कि इस प्रकार की भूमि को ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (GCP) के पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि लोग और निजी संस्थाएँ पर्यावरण संरक्षण में सीधे योगदान दे सकें।
🌏 मंत्री का संदेश
मंत्री श्री यादव ने कहा—
“दिल्ली–एनसीआर में वैज्ञानिक तौर पर योजनाबद्ध और तकनीकी रूप से समर्थित हरितकरण रणनीति ही क्षेत्र की पारिस्थितिक सुरक्षा मजबूत करेगी और वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार लाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए अगली बैठक जल्द आयोजित की जाएगी।
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