सहकारी सोसाइटियों में उर्वरक विक्रय व्यवस्था पर उठे सवाल, प्रदेशभर में कृषि आदान विक्रेता संघ कर रहा जांच की मांग

Questions raised on fertilizer sales system in cooperative societies

हलधर किसान इंदौर।  सरकार के द्वारा असाधारण राजपत्र में जारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुवे फर्टिलाइजर का अवैध व्यापार जारी है।

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ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश में कृषि विभाग एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से कार्यरत सोसाइटियों एवं मार्कफेड के बीच कोई बड़ी मिली भगत चल रही है, जिसके चलते कृषि विभाग भारत सरकार के नियमों को मध्य प्रदेश में लागू करने से कतरा रहा है । यह नाराजगी कृषि आदान विक्रेता संघ के बैनर तले देवास ओर शाजापुर के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के नाम सौपे ज्ञापन में अपने अपने क्षेत्र की सोसायटी में जांच की मांग की ज्ञापन में बताया कि  सभी सोसाइटियों एवं मार्कफेड के विक्रय स्थल पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए गए शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्तियों की नियोजित किया जाना अनिवार्य है यदि ऐसा होता तो प्रदेश में लगभग 8000 सोसाइटियों पर बीएससी किए हुए व्यक्तियों को रोजगार दिया जा सकता था, लेकिन कृषि विभाग एवं सोसाइटियों की मिली भगत से यह अवसर खो दिया गया है । आज भी सरकार  चाहे तो कृषि विज्ञान में स्नातक या डिग्रीधारी 8000 लोगों को मध्य प्रदेश में नियोजित करते हुए रोजगार दिया जा सकता है। 

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 भारत सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2015 को गजट क्रमांक SO 2776 (E ) एवं 30 जुलाई 2018 को गजट क्रमांक SO 3720 (E) के माध्यम से यह प्रावधान किया है कि फर्टिलाइजर का व्यवसाय करने वाला कोई भी व्यक्ति केमिस्ट्री या बायोलॉजी में स्नातक की डिग्री धारी  हो या 48 सप्ताह का देसी डिप्लोमा कोर्स धारक हो 6 माह का कोर्स किया हुआ हो या 30 जुलाई 2018 के प्रावधान के अनुसार *15 दिवसीय  इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट का सर्टिफिकेट कोर्स*  किया हुआ व्यक्ति  उर्वरक का रिटेल का व्यवसाय कर सकता है और उसी गजट में  यह प्रावधान भी  किया गया है कि समिति एवं मार्कफेड में ऐसे डिप्लोमा धारी व्यक्तियों को नियोजित किया जाएगा ।

प्रदेश सचिव संजय रघुवंशी उज्जैन ने बताया इस नियम को लागू हुए लगभग 10 साल हो चुके हैं लेकिन मप्र के किसी भी जिले में आज तक किसी भी सोसाइटी या मार्केफेड के गोदाम पर शैक्षणिक योग्यता धारी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की गई है।

 इस बारे में जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के प्रदेश सचिव एवं सर्व हिताय कृषि व्यापारी सेवा समिति के अध्यक्ष श्री संजय कुमार रघुवंशी उज्जैन ने बताया कि उनके द्वारा 5 फरवरी 2025 को सभी 52 जिलो में उप संचालक कृषि को आरटीआई के माध्यम से जानकारी भी मांगी गई है लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है । कुछ जिलों में कृषि विभाग में फोन से बात करने पर सम्बंधित अधिकारी अनऑफिशियल रूप से यह कहते हैं कि यदि यह जानकारी हमने आपको ऑफिशियल रूप से दे दी तो हमारी नौकरी पर आ जाएगी क्योंकि हम पिछले 10 सालों से यह अवैध व्यापार करवा रहे हैं।  

उक्त दोनों गजट की कॉपी के साथ ही डायरेक्टर एग्रीकल्चर भोपाल द्वारा सभी उपसंचालक कृषि को 27/05/ 2017 को जारी किए गए पत्र की कापी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है ।

श्री रघुवंशी ने आगे बताया कि इन्हीं प्रावधानों के अनुसार पिछले 10 सालों से मध्य प्रदेश में निजी व्यापारियों को उर्वरक विक्रय हेतु लाइसेंस जारी किया जा रहे हैं लेकिन सोसाइटियों को इन्हीं प्रावधानों से अवैध रूप से छूट दी जा रही है एवं उनके लाइसेंस बार-बार रिन्यूअल किए जा रहे हैं।

ऐसा लगता है कि मप्र के सभी जिले में उपसंचालक कृषि एवं मार्कफेड और  जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की आपसी मिली भगत के कारण भारत सरकार के द्वारा निर्धारित नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से व्यवसाय करवाया जा रहा है ।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पिछले 10 सालों से उन सोसाइटियों से उर्वरकों का व्यापार करवाया जा रहा है जिनके पास 40% किसान सदस्य है उनमें से भी 50% डिफाल्टर है। मतलब यह कि प्रदेश के सिर्फ 20% किसानों के लिए 75% उर्वरक आवंटित किया जा रहा है और 80% किसान जो कि निजी व्यापारियों पर निर्भर हैं उनके लिए सिर्फ 25% आवंटित किया जा रहा है। प्रदेश में 75% यूरिया एवं अन्य खाद जिन सोसाइटियों के माध्यम से विक्रय करवाया जाता है और उन्ही सोसाइटियों द्वारा भारत सरकार के नियमों के खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है ।

संगठन की ओर से सभी जिलों के जिलाधीश को एक पत्र लिखकर निवेदन किया गया है कि इस बारे में सभी जिलों में तत्काल एक कमेटी का गठन करके जांच करवाई जावे एवं दोषियों पर कार्रवाई की जावे और जिले में अवैध रूप से फर्टिलाइजर का व्यापार करने वाली सोसाइटियों के लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जावे।

सर्वहिताय कृषि व्यापारी सेवा समिति के अध्यक्ष संजय रघुवंशी ने अपने इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री  डॉ मोहन यादव, कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंसाना एवं संचालक कृषि मध्य प्रदेश शासन भोपाल को भेजते हुवे उम्मीद जताई गई है कि वे इस बारे में तत्काल ही एक कमेटी का गठन करके भारत सरकार के नियमों को मप्र के जिले में लागू करने की व्यवस्था करेंगे और दोषी व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे ।। 

इंदौर जिलाध्यक्ष दुबे की प्रतिक्रिया

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*खाद* *बीज* *विक्रेता संघ के जागरूक पदाधिकारी साथियों के द्वारा बहुत सराहनीय कार्य किया गया। इसी प्रकार से प्रत्येक जिले में जो है यह अभियान चलेगा तो संगठन की जीत निश्चित है। हम सच्चाई के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं दूध को दूध और पानी को पानी बोल रहे हैं साथियों सब संघर्ष करो सब आपके साथ हैं आपका श्री कृष्णा दुबे उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल अध्यक्ष जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिला इंदौर। 

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