हलधर किसान इंदौर। बीज कानून पाठशाला में आज के अंक में पढ़िये…. बीज खेती का मुख्य आदान है. खेती की जान है इसीलिए खेती के इस मुख्य आदान को बनाए रखने के लिये भारत सरकार ने अनेकों कानून बनाए। इन सभी कानूनों में अमानक बीज बनाने वालों को दण्ड देने के प्रावधान हैं परन्तु बीज की गुणवत्ता न्यूनतम होने पर कृषक की फसल को हुई क्षति बारे कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि भारत सरकार ने बीज नियम-1968 में संशोधन कर नियम-23A जोड़ा। इस नियम-23A के द्वारा कृषक को अधिकार है कि बीज की अमानक गुणवत्ता के कारण फसल में आई क्षति के लिए किसान लिखित में कृषि विभाग में प्रार्थना पत्र दे तो बीज निरीक्षक कृषक के खेत का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा जिसको कृषक प्रमाण के रूप में उपभोक्ता न्यायालय में प्रस्तुत करते हैं इस बारे विचार लेख ‘बीज नियम-23A की पालना नहीं” में किया है।
हरियाणा के आदेश :-
भारत सरकार के अलावा हरियाणा सरकार ने भी पत्र दिनांक 03.01.2002 तथा दिनांक 18.062009 के द्वारा भी कृषक फसल क्षति का अनुमान लगाने का प्रावधान किया गया है जिसके द्वारा प्रत्येक जिले के उप-निदेशक (कृषि) को अधिकार दिया हुआ है कि निरीक्षण दल बनाते समय उसमें दो कृषि अधिकारी एक सम्बन्धित फसल का HAU का बीडर या K.V.K. या K.G.K. से ब्रीडर प्रतिनिधि एक प्रतिनिधि विपक्षी दल का हो। राज्य सरकार के उपरोक्त आदेश के अनुसार निरीक्षण दल का गठन न होने से उपभोक्ता न्यायालय से अनेकों मामले बीज व्यवहारियों के पक्ष में तय होते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के आदेश :-
मध्य प्रदेश सरकार ने भी 29.09.2004 को ऐसा ही आदेश पारित किया हुआ है, जो निम्न प्रकार है:-
मध्य प्रदेश प्रशासन
कृषि विभाग
क्रमांक: B-14/4/2004/14-2
दिनांक: 29.09.2004
बीज गुणवत्ता एवं अंकुरण के सम्बन्ध में शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जिलास्तर पर जाँच प्रतिवेदन एक सप्ताह के अन्दर संचालक कृषि को प्रस्तुत किया जाए। जाँच हेतु निम्न अधिकारियों की एक स्थाई समिति का गठन किया जाता है :-
- उप-संचालक (कृषि) या उसका प्रतिनिधि (सहायक संचालक (कृषि) स्तर से कम नहीं हो / सम्बन्धित जिला (अध्यक्ष)।
- कृषि वैज्ञानिक क्षेत्र कृषि अनुसंधान केन्द्र / कृषि विज्ञान केन्द्र / कृषि महाविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर (सदस्य)।
- सहायक बीज प्रमाणीकरण अधिकारी (सदस्य)।
- सम्बन्धित बीज प्रक्रिया प्रभारी / संस्था का प्रतिनिधि (सदस्य)।
हस्ताक्षर
डा० डी०एन० शर्मा उप-सचिव (कृषि) मध्य प्रदेश शासन, कृषि विभाग
Dated: 29.04.2004
No. B-14/4/2004/14-2
प्रतिलिपि :-
- उप-कुलपति, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर।
- संचालक (कृषि), मध्य प्रदेश सरकार, भोपाल।
- प्रबन्ध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम, अरेरा हिन्स, भोपाल।
- प्रबन्ध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल।
- क्षेत्रीय प्रबन्धक, राष्ट्रीय बीज निगम, भोपाल।
- उप-संचालक (कृषि) जिला कार्यवाही हेतु । की ओर उपरोक्तानुसार
हस्ताक्षर
उप-सचिव (कृषि)
मध्य प्रदेश शासन (कृषि)
उपभोक्ता मामलों में बीज व्यापारी भारत सरकार बीज नियम-23A की पालना न होने या मध्य प्रदेश सरकार के 29.09.2004 के आदेशों की पालना न होने को आधार बना कर चुनौती दे सकता है। यदि निरीक्षण दल का गठन मध्य प्रदेश सरकार के आदेशानुसार नहीं हुआ तो कृषक द्वारा अपनी फसल की क्षतिपूर्ति के प्रमाण में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है उसको इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि जब कमेटी का गठन मध्य प्रदेश सरकार के आदेश 29.09.2004 के अनुसार नहीं तो रिपोर्ट को मान्यता दी जाए।
इस लेख में उद्दत बीज नियम-23A तथा मध्य प्रदेश सरकार के आदेश 29.09.2004 को व्यापारीजन अपने वकील के संज्ञान में लाकर लाभ उठा सकते हैं।
प्रमाणीकरण के प्रतिनिधि का विरोध :-
इस समिति के गठन में यह दोष है कि समिति में मध्य प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था का प्रतिनिधि है जो प्रमाणित बीजों के मामलों में निष्पक्ष नहीं होगा अतः इस तथ्य को चुनौती का माध्यम बनाया जा सकता है।
निरीक्षण की वैज्ञानिक विधि :-
ऐसा अनुभव किया गया है कि निरीक्षण दल के अधिकारी चक्षु आँकन (Eye Estimation) के आधार पर रिपोर्ट में मनमाने रूप में 20-25 प्रतिशत अवान्छनीय किस्म (Oftype plant) पौधे पाये गये आदि-आदि लिख देते हैं। इस तथ्य को चुनौती देनी चाहिए कि मध्य प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था का प्रतिनिधि होने पर वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण क्यों नहीं किया गया और उसी तरह की रिपोर्ट क्यों नहीं बताई गई। यानि निरीक्षण करने में (Count System) जो वैज्ञानिक पद्धति है क्यों नहीं अपनाई गई और रिपोर्ट में Counts का उल्लेख क्यों नहीं है। हरियाणा में वैज्ञानिक निरीक्षण पद्धति का प्रयोग न करने के कारण कई मामले व्यापारी के पक्ष में तय हुए।
मध्य प्रदेश सरकार की निरीक्षण पद्धति :-
मान लें उपर की निरीक्षण पद्धति का कृषि विभाग विरोध करता है तो बीज व्यापारी वर्ग कृषि विभाग की कोई घोषित पद्धति की मांग कर सकता है जिसको निरीक्षण का आधार माना जाए। घोषित का अर्थ कृषि निदेशक के आदेशों से है।
अंकुरण बारे रिपोर्ट :-
यदि किसी कृषक की अपने खेत में बीज के अंकुरण की शिकायत है और कृषि विभाग अपने तथाकथित अनुभव में अंकुरण माना 20-25% ही होने की रिपोर्ट करता है तो न्यायालय में उनके आंकलन को चुनौती दी जानी चाहिए क्योंकि उस आंकलन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यदि बीज का सैम्पल बीज परिक्षणशाला में टैस्ट कराया जाता है तो वहाँ 100 दाने रख कर अंकुरित दाने का प्रतिशत निकाला जा सकता है परन्तु खेत में कितने बीज पड़े और कितने अंकुरित हुए का प्रतिशत निकालना विज्ञान पर आधारित नहीं। उदाहरण के लिए गेहूँ के एक किलो में अमुमन 25000 दाने होते हैं और 40 किलो प्रति एकड़ बीज का उपयोग करने पर एक एकड़ में 10 लाख बीज पड़े और उसमें से कितने प्रतिशत अंकुरित हुए आंकलन करना असम्भव है।
उपरोक्त विधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए हिन्दी में निम्न पुस्तकों का अध्ययन करें।
No. B-14/4/2004/14-2
1. आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति ‘कला निकेतन, ई-70, विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)
2. आर.पी. सिंह, सहायक महाप्रबंधक (सेवानिवृत), नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति शिवछाया, 320, सुन्दर नगर, हिसार-हरियाणा, दूरभाष सम्पर्क 97290-62567
श्रीकृष्णा दुबे जी की प्रतिक्रिया…..

साथियों हमारे आदरणीय मार्गदर्शक आरबीसिंह साहब ने मध्य प्रदेश में उपभोक्ता मामलों के ऊपर कृषि आदान व्यापारियों के हित में काफी अच्छी जानकारी दी है मैं यहां बताना चाहूंगा कि हमारे यहां पर जो उपभोक्ता फोरम के माननीय अध्यक्ष हैं सदस्य हैं उनको भी कृषि से संबंधित मामलों में किसान और कृषि आदान व्यापारियों के बीच में जो भी मामले आते हैं जो भी समस्या आती है उसकी विस्तृत रूप से उनके सामने पटल पर रखना होता है बताना होता है की वास्तविकता क्या है क्या नहीं क्योंकि जैसे मनुष्य का जीवन चक्र में अनेक प्रकार की बीमारियां और संघर्ष है वैसे ही यह खेती किसानी में जीव विज्ञान है इसमें भी काफी सारे रोग किट और मौसम आदि की वजह से जो तकलीफ है परेशानियां खड़ी हो जाती है उनके निराकरण के लिए अच्छे से हमको जो है माननीय उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष महोदय और सदस्यों को वास्तविकता से परिचय कराना होता है काफी सारे मामले में अधूरी जानकारी के एक तरफ जो है फैसला दे दिए जाते हैं जिससे कि कृषि आदान व्यापारियों को और संबंधित कंपनियों को भी बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है साथियों आप भी समझे उपभोक्ता फोरम के मामलों को और अपना व्यापार सुचारू रूप से सौहार्दपूर्ण वातावरण में करें धन्यवाद आपका श्री कृष्णा दुबे अध्यक्ष जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिला इंदौर

