हलधर किसान, इंदौर। बीज की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु बीज अधिनियम मुख्य कानून है। बीज अधिनियम की संशोधित धारा 21 दिनांक 10.06.1981 के अनुसार बीज नमूनों के परिक्षण की प्रक्रिया सीड टैस्टिंग मैन्युअल 1967 के अनुसार होती है। बीज अधिनियम की धारा-4 के द्वारा राज्य बीज परिक्षणशालाओं की स्थापना का अधिकार राज्यों को दिया है और राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर नई राज्य बीज परिक्षणशाला स्थापित करते हैं या अन्य परिक्षणशाला को मान्यता देते हैं। बीज निरीक्षक नमूने लेते हैं और बीज के मानक परखते हैं।
कृषि अधिकारियों में यह गलत धारणा पनप गई है कि राज्य परिक्षणशाला के परिणाम के आधार पर लाइसैंस निरस्त कर सकते हैं जबकि बीज कानूनों के आधार पर राज्य सरकार की परिक्षणशाला का परिणाम निर्णायक (Conclusive) नहीं जब तक इस परिणाम की पुष्टि केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला से न हो। अतः उनकी लाइसैंस निरस्त करने की कार्यवाही अविधिक है।
साथ ही बीज निरीक्षक द्वारा लिए गये सैम्पल का परिणाम अधोस्तर होने पर परिणाम सूचित कर कारण बताओ नोटिस जारी कर देते हैं परन्तु पास लॉट का परिणाम भी माँगना चाहिए क्योंकि बीज अधिनियम 1966 की धारा-16 (1) में नमूने के परिणाम की एक प्रति पाने का व्यापारी को हक है। हो सकता है पास लॉट कहीं अन्य जगह फेल हो तो न्यायालय से पास लॉट का सहारा लेकर लाभ लिया जा सकता है।
1. बीज अधिनियम धारा-16(2):-
धारा-16 (2) में उल्लेख है कि राज्य बीज परिक्षणशाला का अधोस्तर परिणाम जैसे ही बीज निरीक्षक को प्राप्त हो वह दोषी विक्रेता के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर करेगा और पहली पेशी पर दोषी के न्यायालय में उपस्थित होने पर अपने सैम्पल को निर्दोष सिद्ध करने हेतु पुनः परिक्षण का अधिकार उत्पन्न होगा।
2. परिक्षण शुल्क :-
धारा-16(2) के अनुसार निर्धारित शुल्क अदा कर लिखित में न्यायालय को अपने नमूने का न्यायालय के माध्यम से केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला में पुनः परिक्षण कराने का आवेदन देगा। परिक्षण शुल्क दिनांक 28.09.2022 से रुपये 10 से बढ़ाकर 1000/- रुपये कर दिया गया है।
3. न्यायालय द्वारा सैम्पल भेजना :-
न्यायालय के माध्यम से केन्द्रीय परिक्षणशाला से अधोस्तर सैम्पल का पुनः परिक्षण कराने का अधिकार केवल आरोपी बीज विक्रेता का ही नहीं है बल्कि शिकायतकर्त्ता यानि बीज निरीक्षक यानि दावा दायर करने वाला का भी अधिकार है। न्यायालय द्वारा पहले से बीज निरीक्षक के पास रखा गार्ड सैम्पल या बीज विक्रेता के पास उपलब्ध सैम्पल के भाग को परिक्षण हेतु भेजा जा सकता है। ध्यान रहे न्यायालय बीज लॉट का पुनः रिसैम्पलिंग नहीं कराता बल्कि पहले से उपलब्ध सैम्पल का अपनी उपस्थिति में केन्द्रीय परिक्षणशाला को भिजवाया जाता है। सैम्पल भेजने से पूर्व न्यायालय सैम्पल पर लगी सील चैक करता है और सील सही पाई जाने पर ही परिक्षण के लिए सैम्पल भेजा जायेगा। यहाँ यह भी स्पष्ट कर दें कि पुनः सैम्पलिंग नहीं होता और केवल Retesting ही होता है। इस सैम्पल में Retesting में प्रदर्शित कमियाँ ही ठीक होने की सम्भावना है परन्तु सैम्पलिंग में घटित त्रुटियाँ बारे कोई प्रावधान नहीं।
4. बीज निरीक्षक द्वारा पुनः परिक्षण का नोटिस :-
यदा कदा बीज निरीक्षक बीज विक्रेता को न्यायालय में अभियोजन यानि इस्तगासा यानि-शिकायत यानि दावा दायर करने से पहले ही न्यायालय द्वारा पुनः परिक्षण के लिए नोटिस देते रहते हैं। उनके नोटिस पर गौर नहीं करें बल्कि केवल न्यायालय से आये समन पर ही पुनः परिक्षण कराने का निर्णय लें। बीज अधिकारी न्यायालय में वाद की सुनवाई के दौरान उल्लेख करते हैं कि बीज व्यवसायी को सैम्पल पुनः परिक्षण के लिये नोटिस दिए परन्तु दोषी बीज व्यवसाई ने पालना नहीं की। एक वाद में अभियोजन पक्ष ने ऐसी ही दलील दी और न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बीज अधिनियम में जो तरीका Mechanism दिया है उसके अनुसार चला जायेगा न कि कृषि अधिकारियों की मर्जी पर। साथ ही निवेदन है कि न्यायालय के माध्यम से सैम्पल के केन्द्रीय परिक्षणशाला से टैस्ट कराने से पहले जांच लें कि सैम्पल का 9 माह 6 माह या 3 माह का जीवन काल (Validity) समाप्त तो नहीं हो गया। यदि सैम्पल की Validity समाप्त हो गई है तो न्यायालय को लिखित में अपने Retesting बारे अस्वीकृति दें।
5. केन्द्रीय परिक्षणशाला का परिणाम अन्तिम :–
ध्यान रहे कि केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला की रिपोर्ट आने पर राज्य बीज परिक्षणशाला की रिपोर्ट निरस्त हो जाती है। नेशनल सीड्स कारपोरेशन के बाजरा के एक सैम्पल की राज्य सरकार लैब द्वारा भौतिक शुद्धता में 97.5% पाया जाने पर अधोस्तर (Substandard) घोषित किया जबकि उसका अंकुरण सन्तोषप्रद था। केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला में भौतिक शुद्धता 100% बताई परन्तु अंकुरण 59% घोषित किया। अतः धारा-16 (3) के अनुसार भौतिक शुद्धता 97.5 के बजाय 100% बताई दोष निरस्त हो गया परन्तु अंकुरण 59% आया तो लॉट Substandard नहीं माना जायेगा क्योंकि बीज निरीक्षक ने केलव भौतिक शुद्धता का आरोप लगाते हुये वाद दायर किया था। बाद में बीज निरीक्षक नया आरोप नहीं लगा सकता।
6. पुनः परिक्षण 30 दिन में :-
न्यायालय द्वारा पुनः परिक्षण का परिणाम भी भेजने के 30 दिन में आना चाहिए। अन्यथा परिणाम को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। हरियाणा की एक बीज कम्पनी के कपास का सैम्पल राज्य बीज परिक्षणशाला से 33% आया उसे केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला से टैस्ट कराया उसका परिणाम भी 9 माह बाद 33% आया। इस प्रकार 30 दिन बाद के परिणाम का कोई औचित्य नहीं रहा। दूसरे केन्द्रीय परिक्षणशाला परिणाम लेबल / पैकेट पर लिखी 9 माह की वेलेडिटी के बाद आया अतः वह भी निरस्त माना गया और व्यापारी निर्दोष सिद्ध हुआ लेकिन 17 साल बाद।
7. नई केन्द्रीय परिक्षणशालाएं :-
अभी निकट भूतकाल में मैंने 3 नई केन्द्रीय बीज परिक्षणशालाओं की सूचना एक लेख के माध्यम से दी थी। केन्द्रीय बीज प्रमाणीकरण बोर्ड भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि बीज अधिनियम की धारा-16 (2) के अनुसार विवादित सैम्पलों की न्यायालय द्वारा री-टैस्टिंग तो केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला वाराणसी द्वारा ही होगी तथा अन्य तीन केन्द्रीय बीज परिक्षणशालाएं किसी अन्य प्रयोजन के लिए केन्द्रीय परिक्षणशालाएं घोषित की गई हैं।
अमानक बीज से फसलें बहारा भी बरगरीज है प्रमाणित बीज हो तो हलधर के घर मरसडीज है।
फसलें बहारा फसलों की आभा ।
बरगरीज पतझड़ ।
:: लोकोक्ति::
अद्भुत है बीज का अंकुरण
स्वयं को होम कर, करता नया सृजन।
– सौजन्य से –
श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश संगठन मंत्री, कृषि आदान विक्रेता संघ मप्र
श्री कृष्णा दुबे, अध्यक्ष, जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ इंदौर

आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन’, ई-70, विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp
