हलधर किसान इंदौर। बीज, उर्वरक एवं कीटनाशी तीनों कृषि के मुख्य आदान हैं इसलिए इनकी गुणवत्ता श्रेष्ठ ही नहीं श्रेष्ठतम होनी चाहिए। उर्वरक का कोई अधिनियम नहीं है बल्कि उर्वरक की बिक्री एवं गुणवत्ता नियन्त्रण हेतु उर्वरक नियन्त्रण आदेश 1985 निरूपित किया। इस आदेश के अन्तर्गत उर्वरक निरीक्षक उर्वरक की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूना लेने की प्रणाली को भारत सरकार की अधिसूचना S. 38(E) 13.12.2024 के द्वारा रूपान्तरित किया है जिसकी तुलनात्मक विवेचना निम्न प्रकार है:

विरोधाभाष क्यों :-
उर्वरक एवं बीज विक्रय दोनों आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत आते हैं। उर्वरक नियन्त्रण आदेश 1985 में एक. दो, तीन परिक्षण में पुष्ठि होने के बाद आरोपित व्यापारी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाती है परन्तु बीज के मामलों में राज्य बीज परिक्षण की रिपोर्ट आने के बाद ही लाइसैंस निलम्बन या निरस्तीकरण की तलवार लटक जाती है। वास्तव में राज्य बीज परिक्षणशाला की रिपोर्ट Conclusive निर्णायक नहीं होती बल्कि केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला की पुनः परिक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही यदि आवश्यक हो तो निरस्तीकरण, निलम्बन की कार्यवाही करनी चाहिए।
बीज परिक्षण में तीसरा टैस्ट :-
उर्वरक की तरह बीज परिक्षण में भी तीत्तरा टैस्ट कराने का प्रावधान होना चाहिए।
:: लोकोक्ति :: बीज का भार तो तुला से जान सकते हैं परन्तु बीज की गुणवत्ता प्रमाणीकरण पर निर्भर है।
प्रतिक्रिया
फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत नमूना लेने के लिए एयर टाइट कंटेनर का उपयोग किया जाना चाहिए लेकिन किसी भी जिले में नमूना लेने के लिए कभी भी एयर टाइट कंटेनर का प्रयोग नहीं किया जाता है ।
इसी आधार पर नमूना फेल होने पर शोकाज नोटिस मिलने के बाद व्यापारी को चलेंज करना चाहिए कि नमूना लेने का जब तरीका ही गलत है तो नमूना फेल होने के जवाबदारी व्यापारी की या कंपनी की कैसे हो सकती है।
इसी आधार पर कई केस में व्यापारियों का पक्ष में फैसले दिए गए हैं अतः व्यापारी साथी सावधान होकर इस प्रकार के नमूना लेने की वीडियो रिकॉर्डिंग करके अपने पास रखें और सैंपल फेल होने पर उसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करें। -संजय* *रघुवंशी* *राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल*
श्रीकृष्ण दुबे जी प्रतिक्रिया
*साथियों* *पिछले* *सत्र* *में* *कृषि मंत्री महोदय के दौर में इंदौर में फ़र्टिलाइज़र के सैंपल विभाग द्वारा रेलवे के रैक पर से ही लिए गए थे जो की नियम अनुसार गलत है यदि समय रहते मंत्री महोदय ने इस और ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विभाग के सैंपल लेने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती थी आश्चर्य की बात तो यह* *है की विभाग को भी पूर्ण रूप से यह जानकारी नहीं थी कि सैंपल कहां से कब और कैसे लिया जाता है पूर्व में हमारे राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव संजय रघुवंशी जी के द्वारा प्रदेश के 52 जिले के संचालक कृषि से आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मांगी थी कि पिछले तीन वर्षों में विभाग के द्वारा बीज कीटनाशक व फ़र्टिलाइज़र के सैंपल लेने के उपकरण की कितनी खरीदी की गई है कृपया जानकारी दें लेकिन अभी तक कहीं से भी इसका समाधान पूर्वक जवाब नहीं आया है हमारे समस्त कृषि आदान व्यापारी साथियों आप पूर्ण रूप से ईमानदारी से नियम अनुसार अपना व्यापार करें अच्छी कंपनियों का पूर्ण रूप से शुद्ध माल की हीबिक्री अपने प्रतिष्ठा से करेंउसके बाद भी यदि कोई परेशानी आती है तो ऑल इंडिया एग्री इनपुट्स डीलर एसोसिएशन नई दिल्ली मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल और जिले के संगठन आपके साथ हैं सौहार्दपूर्ण वातावरण में व्यापार करें समस्या आने पर पदाधिकारी से संपर्क करें कृष्णा दुबे उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल जिला अध्यक्ष जागरूक कृषि

आदान विक्रेता संघ इंदौर*
1. आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति ‘कला निकेतन, ई-70, विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)
2. आर.पी. सिंह, सहायक महाप्रबंधक (सेवानिवृत), नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति शिवछाया, 320, सुन्दर नगर, हिसार-हरियाणा, दूरभाष सम्पर्क 97290-62567

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