हलधर किसान मनावर। मप्र के कई जिलों में सोमवार को मौसम ने करवट ली। मौसम का बदला मिजाज किसानों के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। तेज हवा- आंधी और ओलावृष्टि के साथ हुई बारिश ने एक बार फिर केला उत्पादक किसानों को आर्थिक क्षति पहुंचाई है।
धार जिले के ग्राम बाकानेर में और दर्जनों गांवों में केले की खेती आंधी, तुफान और ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। किसानों के अनुसार करीब 70 से 75 प्रतिशत फसल खराब हुई है। सुबह खेतों में पहुंचे किसानों ने अपनी मेहनत पर पानी फिरता देख बेहाल नजर आए।
ग्राम बाकानेर के कृषक विवेक बडजात्या (राठी )ने बताया कि वर्तमान में केले की फसल लगभग तैयार है। 15-20 दिनों में पककर बाजार में बिकने की स्थिति में थीं । उनके यहां करीब 15 एकड़ रकबे में केले की फसल लगाई गई है, जिसमे से लगभग 5 एकड़ की केले की फसल जो बीती रात आए आंधी- तुफान में चौपट हो गई। बडज़ात्या ने बताया उनके खेत में करीब 1500 से 2000 पौधे जमींदोज हो गए है और जो पौधे खड़े या बचे है, वो पौधे तेज हवा के कारण बहुत कमजोर हो गए है एवं झुक गए है जिससे केले के फल को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा नर्मदा पट्टी होने से हजारों हेक्टेयर में अन्य किसानों के यहां भी केले की फसल लगी है, जिसे भारी नुकसान पहुंचा है।

मुआवजे से नही हो पाती भरपाई
कृषको ने बताया कि पिछले कई वर्षों से शासन स्तर पर फसल का बीमा नही किया जा रहा है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा में फसल को नुकसानी होने पर शासन स्तर पर जो मुआवजा दिया जाता है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कई किसानों के लिए तो यह मुआवजा मजाक साबित होता है। हवा आंधी से फसलों को पहुंचे नुकसान के बाद प्रशासनिक अमले को भी सूचना दी है। किसानों की मांग है कि शासन उन्हें प्रति एकड़ कम से कम एक लाख रुपए रूपये नुकसानी का मुआवजा दिलाए जिससे वे आगामी फसल की तैयारी कर सके।
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